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यूपी चुनाव: 50 साल से कम उम्र के 'सेनापतियों' के हाथ में है चुनावी कमान, जानें- क्या हैं चुनौतियां?

UP Election: यूपी के चुनावी मैदान में नई पीढ़ी पर अपनी पार्टी के भविष्य का पूरा दारोमदार है. योगी आदित्यनाथ, अखिलेश यादव, प्रियंका गांधी और जयंत चौधरी के सामने नई चुनौतियां हैं.

UP Assembly Election 2022: आगामी विधानसभा चुनाव में विभिन्न राजनीतिक दलों की कमान अंडर 50 यानी 50 साल से कम उम्र के सेनापतियों के हाथ में है. दूसरे शब्दों में कहें तो यूपी के चुनावी मैदान में नई पीढ़ी पर अपनी पार्टी के भविष्य का पूरा दारोमदार है. ऐसे में इनकी साख भी दांव पर है. हम ऐसा क्यों कह रहे हैं इसके पीछे बड़ी वजह है. आगामी चुनाव में बीजेपी के चेहरे के रूप में योगी आदित्यनाथ 49 साल साल के हैं. तो वहीं सपा मुखिया अखिलेश यादव की उम्र 48 साल है. वहीं बात कांग्रेस की करें तो पार्टी ने राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी को यूपी की बागडोर सौंपी हुई है. प्रियंका गांधी की उम्र 49 साल है. इसी तरह राष्ट्रीय लोकदल के भविष्य की कमान है 42 साल के जयंत चौधरी के हाथ.

योगी के चेहरे को सामने रखकर चुनावी मैदान में बीजेपी

बात सत्ताधारी बीजेपी की करें तो 2017 में पार्टी ने मुख्यमंत्री के लिए कोई चेहरा सामने नही किया था. लेकिन इस बार ऐसा नही है. बीजेपी, योगी आदित्यनाथ के चेहरे को सामने रखकर चुनावी मैदान में है. पीएम मोदी, राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत पूरा शीर्ष नेतृत्व योगी सरकार की उपलब्धियों पर खुले मंच से जमकर सराहना करता है. 2017 में पार्टी को 403 में 312 सीटें मिली थी. ऐसे में सेनापति की भूमिका में योगी आदित्यनाथ को सिर्फ चुनाव ही नहीं जीतना बल्कि पहले से बेहतर प्रदर्शन करने की भी चुनौती है.

अखिलेश के सामने है बड़ी चुनौती

अब बात करते हैं मुख्य विपक्षी दल यानी समाजवादी पार्टी की. इस दल के मुखिया अखिलेश यादव पूर्व मुख्यमंत्री होने के साथ ही योगी आदित्यनाथ के हम उम्र भी हैं. अखिलेश यादव को अपने पिता मुलायम सिंह यादव से राजनीति विरासत में मिली है. 2012 का चुनाव भी मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में ही लड़ गया और सपा ने बहुमत से सरकार बनाई. ताजपोशी हुई अखिलेश यादव की. यानी नेताजी ने अपनी गद्दी बेटे को सौंप दी. हालांकि उस सरकार का कार्यकाल ख़त्म होने से पहले पारिवारिक मतभेद हुए और पार्टी की कमान अखिलेश के हाथ आ गई. 2017 का चुनाव अखिलेश के नेतृत्व में लड़ा गया लेकिन पार्टी सिर्फ 47 सीट जीतकर विपक्षी दल तक सीमित हो गयी. 2019 में भी पार्टी को निराशा का सामना करना पड़ा. अंदरखाने अखिलेश के नेतृत्व और रणनीति पर भी सवाल उठने लगे. अब देखना होगा कि 2022 में अखिलेश पार्टी को सेनापति के रूप में कहां ले जा पाते हैं.

32 साल से गद्दी से दूर कांग्रेस के सामने तो अस्तित्व की लड़ाई

उत्तर प्रदेश में 32 साल से गद्दी से दूर कांग्रेस के सामने तो अस्तित्व की लड़ाई है. 2022 की जंग में सेनापति हैं प्रियंका गांधी वाड्रा. पार्टी के लोग उनमें इंदिरा गांधी की छवि भी देखते हैं. योगी और अखिलेश की हम उम्र प्रियंका अब यूपी में एक्टिव हैं. संगठन को मजबूत करने के लिए मेहनत कर रही हैं. पार्टी ने प्रदेश की कमान अजय कुमार लल्लू को सौंपी हुई है जो खुद 42 साल के हैं. पार्टी को फर्श से अर्श तक पहुंचाना आसान नहीं. 2019 में भी प्रियंका यूपी के मैदान में थीं लेकिन अपने भाई की सीट भी नहीं बचा सकीं और पार्टी को सिर्फ 1 सीट के साथ संतोष करना पड़ा. हालांकि कहा जा सकता है की 2017 के मुकाबले इस बार पार्टी काफी मेहनत कर रही है. 2017 में पार्टी ने 7 सीटें जीती थी लेकिन उनमें भी दो विधायक अब उनके अपने न रहे.

जयंत चौधरी के लिए नई पारी है

अब बात करते हैं राष्ट्रीय लोकदल की. हाल ही में चौधरी अजीत सिंह के निधन के बाद पार्टी की जिम्मेदारी उनके बेटे जयंत चौधरी पास है. 2017 के चुनाव में पार्टी को सिर्फ एक सीट मिली थी. हालांकि इस बार पार्टी के नेताओं का मानना है कि पश्चिमी यूपी समेत अन्य जगह वो किला फतेह करेंगे. इस उम्मीद की वजह है किसान आंदोलन. जयंत के लिए ये नई पारी है. ऐसे में पार्टी का प्रदर्शन उनका और पार्टी दोनों का भविष्य तय करेगा.

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