महोबा: SIR के बाद ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से ग्राम प्रधान का ही नाम गायब, 2300 ग्रामीणों के नाम भी कटे
UP Voter Draft List: महोबा की श्रीनगर ग्राम पंचायत में मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान ग्राम प्रधान समेत 2300 ग्रामीणों के नाम कटे गए है. शिकायत के बाद प्रशासन ने फॉर्म भरकर नाम जोड़ने का आश्वासन दिया.

महोबा में मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य (एसआईआर) में प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है. कबरई विकासखंड की श्रीनगर ग्राम पंचायत के प्रधान समेत करीब 2300 ग्रामीणों के नाम वोटर लिस्ट से गायब कर दिए गए हैं. हैरान करने वाली बात यह है कि मौजूदा प्रधान का नाम तक सूची में नहीं है. इस मामले की शिकायत के बाद एसडीएम ने दावा प्रपत्र भरकर नाम जुड़वाने की बात कही है.
उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की आहट के साथ ही मतदाता सूची के पुनरीक्षण का काम तेजी से चल रहा है. लेकिन महोबा जनपद में बीएलओ और संबंधित कर्मचारियों की एक ऐसी लापरवाही उजागर हुई है, जिसने पूरी चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
ग्राम प्रधान का मतदाता सूची से नाम काटा
जानकारी के अनुसार, मामला कबरई विकासखंड की श्रीनगर ग्राम पंचायत का है. जहां एक या दो नहीं, बल्कि पूरे 2300 मतदाताओं को सूची से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है. सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इस लापरवाही की चपेट में खुद श्रीनगर के मौजूदा ग्राम प्रधान आशीष राजपूत भी आ गए हैं.
आशीष राजपूत के साथ-साथ उनके परिवार के अन्य सदस्य और गांव के हजारों सम्मानित मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से गायब हैं. सरसरी तौर पर हुई इस बड़ी चूक ने ग्रामीणों के बीच हड़कंप मचा दिया है. परेशान ग्राम प्रधान ने आनन-फानन में जिलाधिकारी गजल भारद्वाज के कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है.
मतदाता सूची को फिर किया जा रहा संशोधित- एसडीएम
इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेते हुए महोबा एसडीएम शिवध्यान पांडेय ने बताया कि राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशों के तहत मतदाता सूची का संशोधन किया जा रहा है. श्रीनगर ग्राम प्रधान द्वारा दी गई शिकायत पर जांच की जा रही है. प्रशासन का कहना है कि जिन लोगों के नाम सूची से कट गए हैं, वे घबराएं नहीं. मतदाता 24 दिसंबर से 30 दिसंबर के बीच संबंधित फॉर्म भरकर अपना दावा पेश कर सकते हैं.
बहरहाल,अब सवाल यह उठता है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में नाम किसकी लापरवाही से कटे? फिलहाल, ग्रामीण और प्रधान अपने लोकतांत्रिक अधिकार को वापस पाने के लिए फॉर्म भरने की प्रक्रिया में जुट गए हैं.
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Source: IOCL






















