UP पंचायत चुनाव में देरी के दावों के बीच योगी सरकार का बड़ा फैसला, पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी, जानें- कैसे तय होगा आरक्षण?
UP Panchayat Chunav 2026: उत्तर प्रदेश सरकार ने पंचायत चुनाव से पहले बड़ा कदम उठाते हुए ग्रामीण निकायों में OBC आरक्षण तय करने के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया है.

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव से पहले ग्रामीण निकायों में आरक्षण को लेकर सरकार ने बड़ी पहल की है.सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में राज्य सरकार ने 'राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग' का गठन किया है. आयोग का उद्देश्य त्रिस्तरीय पंचायत निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को आरक्षण देने के लिए उनके सामाजिक और प्रशासनिक पिछड़ेपन जांच करना है.
सरकार की ओर से जारी प्रावधानों के अनुसार आयोग पंचायतवार अध्ययन कर यह तय करेगा कि किन क्षेत्रों में पिछड़े वर्ग की कितनी हिस्सेदारी है और उसी आधार पर उन्हें आनुपातिक आरक्षण दिया जाएगा. प्रदेश में पंचायतों में आरक्षण की व्यवस्था उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1947 तथा उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम, 1961 के तहत लागू की जाती है.
इसके लिए उत्तर प्रदेश पंचायत राज (स्थानों और पदों का आरक्षण और आवंटन) नियमावली, 1994 और उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत (स्थानों और पदों का आरक्षण और आवंटन) नियमावली, 1994 लागू हैं. इन्हीं नियमावलियों के तहत ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत में अध्यक्ष एवं सदस्यों के पदों का आरक्षण तय किया जाता है.
कब तक आएगी पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट?
संविधान के अनुच्छेद 243D और संबंधित अधिनियमों की धाराओं के तहत राज्य सरकार को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण लागू करने का अधिकार प्राप्त है. प्रावधानों के मुताबिक आरक्षित पदों की संख्या संबंधित वर्ग की जनसंख्या के अनुपात में तय की जाएगी. हालांकि, पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण कुल पदों के 27 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा.
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि पिछड़े वर्गों की जनसंख्या के आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध नहीं होते हैं, तो सर्वेक्षण कर उनकी संख्या निर्धारित की जा सकती है. माना जा रहा है कि पंचायत चुनाव से पहले यह कवायद प्रदेश में OBC आरक्षण के मुद्दे को लेकर काफी अहम साबित हो सकती है.
इस आयोग में पांच सदस्यों की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा ऐसे व्यक्तियों में से की जायेगी, जो पिछड़े वर्गों से सम्बन्धित मामलों का ज्ञान रखते हों. राज्य सरकार द्वारा इसमें से एक सदस्य उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश होंगे जिन्हें आयोग के अध्यक्ष के रूप में नामांकित किया जायेगा.का होगा. इस आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों का कार्यकाल सामान्य तौर पर नियुक्ति से 6 माह का होगा.






















