Ayodhya News: पुलिस के हत्थे चढ़े अंतर्राज्यीय गिरोह के 5 बदमाश, वारदात को अंजाम देकर भाग जाते थे दूसरे राज्य
Ayodhya News: अयोध्या पुलिस के हत्थे एक ऐसा गिरोह चढ़ा है जो दूसरे राज्यों से आकर यहां अपराध की वारदातों को अंजाम दिया करता था. ये बदमाश अपराध के बाद दूसरे राज्य में भाग जाते थे.

Ayodhya News: अपराधियों ने इन दिनों अपराध करने का एक अलग तरीका निकाला है. ये दूसरे राज्यों से आते हैं और आपराधिक घटनाओं को अंजाम देकर किसी दूसरे राज्य में भाग जाते हैं. इनका एक ग्रुप होता है जिनके अलग-अलग काम होते हैं. इस सनसनीखेज मामले का खुलासा अयोध्या पुलिस ने किया है. अयोध्या में जहां पिछले दिनों पश्चिम बंगाल का एक गिरोह आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देते हुए पकड़ा गया था, तो अब पुलिस के हत्थे ऐसा ही एक और गिरोह चढ़ा है, जो उत्तराखंड का है.
पुलिस के हत्थे चढ़ा अंतर्राज्यीय गिरोह
अयोध्या पुलिस के मुताबिक उनके हत्थे उत्तराखंड का जो गिरोह चढ़ा है, इस गिरोह ने अयोध्या के साथ-साथ आसपास के कई जनपदों में हुई आपराधिक घटनाओं का भी खुलासा किया है. पुलिस को इनके पास से कई मोटरसाइकिलें, नगदी और अन्य कीमती सामान बरामद हुआ है. अयोध्या के एसएसपी शैलेश पांडे ने बताया कि ये अंतर्राजीय गैंग हैं जो अलग-अलग जगहों पर घूम-घूम कर चोरी, लूट, वाहन चोरी, ठप्पे बाजी आदि की घटनाओं को अंजाम देता है. इस गैंग में 5 लोग शामिल हैं जो मूल रूप से उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर के हैं. इस गैंग के दो सदस्य काफी सालों से यहां पर रह रहे थे.
गिरोह के पांच आरोपी पुलिस की गिरफ्त में
एसएसपी के मुताबिक इस गिरोह के तीन सदस्य इन दिनों मानसी नगर में रह रहे थे. इसके अलावा दो साथी थे जिनके साथ लगातार इनका संपर्क रहता था. पुलिस ने इन पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने जनपद बस्ती की दो घटनाएं, बाराबंकी में वाहन चोरी और फतेहपुर में अपराध की एक घटना कबूल की है. पुलिस को इनको पास से मोटरसाइकिलें, कैश और अन्य समाग्री बरामद हुई है. ये लोग जगह बदल-बदल कर अपराध को अंजाम देते थे ऐसे में इनके खिलाफ कार्रवाई करना एक चैलेंज होता है.
ऐसे गिरोह को ट्रैक करना होता है मुश्किल
अयोध्या के एसएसपी शैलेश पांडे की माने तो दूसरे राज्यों से आकर अपराध करने वालों को ट्रैक करना मुश्किल होता है. क्योंकि ये दूसरे प्रदेश के होते हैं और एक जनपद में अपराध करने के बाद दूसरे जनपद में चले जाते हैं. ये एक सुनियोजित योजना पर काम करते हैं. जिसमें हर सदस्य का काम पहले से बंटा हुआ होता है. लिहाजा इनको पकड़ना मुश्किल होता है बेसिक पुलिसिंग के जरिए ही यह पकड़ में आते हैं और इनको पकड़ने के लिए खासी मुश्किलें भी पेश आती है.
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