महोबा: NHM संविदा कर्मियों की हुंकार, वेतन नीति और स्थानांतरण की मांग को लेकर विधायक को सौंपा ज्ञापन
UP News: उत्तर प्रदेश के लगभग एक लाख संविदा और आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी अपनी अनदेखी के खिलाफ एकजुट हो गए हैं. NHM कर्मचारी संघ ने महोबा में प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री को 9 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा.

उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ कहे जाने वाले करीब एक लाख संविदा और आउटसोर्स कर्मचारी अब अपनी अनदेखी के खिलाफ लामबंद हो गए हैं. अपनी सेवा सुरक्षा और वेतन विसंगतियों से आहत होकर संयुक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) कर्मचारी संघ ने महोबा में जोरदार प्रदर्शन किया. कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित एक 9 सूत्रीय मांग पत्र सदर विधायक राकेश गोस्वामी को सौंपकर जल्द कार्रवाई की मांग की है.
जिला अध्यक्ष डॉ. दिवाकर प्रताप सिंह के नेतृत्व में सौंपे गए इस ज्ञापन में कर्मचारियों ने अपनी दयनीय स्थिति को रेखांकित किया है. संघ की सबसे प्रमुख मांग वेतन विसंगति को दूर करना और मध्य प्रदेश सरकार की तर्ज पर एक पारदर्शी व सम्मानजनक वेतन नीति लागू करना है. इसके अलावा, कर्मचारी लंबे समय से अपने गृह जनपद में स्थानांतरण (Transfer) की मांग कर रहे हैं, ताकि वे अपने परिवार के समीप रहकर सेवा दे सकें.
9 सूत्रीय एजेंडा: बजट बढ़ाने और स्थायित्व पर जोर
कर्मचारियों ने अपनी मांगों में स्वास्थ्य सेवाओं के ढांचे में आमूलचूल परिवर्तन की वकालत की है:
- निश्चित वेतन तिथि: पोर्टल की तकनीकी बाधाओं को दूर कर हर माह की 3 तारीख तक वेतन का भुगतान सुनिश्चित किया जाए.
- बजट में वृद्धि: स्वास्थ्य बजट को कुल बजट का 9 से 10 प्रतिशत तक बढ़ाने की मांग की गई है ताकि बुनियादी सुविधाओं में सुधार हो सके.
- स्थायी ढांचा: बिहार और ओडिशा की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी राज्य आधारित स्थायी स्वास्थ्य ढांचा विकसित किया जाए.
- सामाजिक सुरक्षा: संविदा प्रथा में सुधार करते हुए ईपीएफ (EPF) और ग्रेच्युटी जैसी सुविधाएं दी जाएं और वार्षिक एग्रीमेंट की बाध्यता को खत्म कर दीर्घकालीन अनुबंध किया जाए.
कोविड योद्धाओं का दर्द: 'अब और नहीं सहेंगे अनदेखी'
प्रदर्शन के दौरान डॉ. दिवाकर प्रताप ने कहा कि कोरोना काल जैसी वैश्विक महामारी से लेकर नियमित टीकाकरण अभियानों तक, संविदा कर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर काम किया है. इसके बावजूद उन्हें सेवा सुरक्षा और सम्मानजनक मानदेय के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. 10 वर्ष से अधिक सेवा दे चुके अनुभवी कर्मियों के लिए विशेष समायोजन नीति बनाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई.
विधायक का आश्वासन
सदर विधायक राकेश गोस्वामी ने कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और स्वीकार किया कि उनकी मांगें जायज हैं. उन्होंने आश्वासन दिया कि इस 9 सूत्रीय ज्ञापन को प्राथमिकता के आधार पर मुख्यमंत्री तक पहुंचाया जाएगा और शासन स्तर पर पैरवी की जाएगी. कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो वे प्रदेशव्यापी आंदोलन के लिए बाध्य होंगे.
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Source: IOCL























