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UP Election 2022: विधानसभा चुनाव में कहां खड़े हैं बसपा छोड़ने वाले विधायक, जानिए कौन किस सीट से लड़ रहा है चुनाव

UP Election 2022: गोरखपुर की चिल्लूपार विधानसभा सीट से 2017 में बसपा से जीते विनय शंकर तिवारी ने पिछले साल दिसंबर में समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया था. सपा ने उन्हें उसी सीट से उम्मीदवार बनाया है.

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election 2022) अब अपने अंत की ओर बढ़ रहा है. अब केवल दो चरण का चुनाव बाकी है. अंतिम दो चरणों में 3 मार्च और 7 मार्च को वोटिंग कराई जाएगी. ये दोनों दौर प्रदेश के पूर्वांचल के इलाके में है. बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने 2017 में 19 सीटें जीती थीं. लेकिन चुनाव आते-आते पार्टी के में केवल 3 विधायक ही रह गए. इनमें से कुछ ने पार्टी छोड़ दी तो कुछ को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. बसपा छोड़ने वाले 7  विधायकों की प्रतिष्ठा अगले दो दौर के चुनाव में दांव पर है. यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता उन पर फिर विश्वास जताती है या अविश्वास.आइए जानते हैं कि बसपा से निकलकर गए विधायक कहां से चुनाव लड़ रहे हैं.

बसपा ने 2017 में कितनी सीटें जीती थीं. 

गोरखपुर जिले की चिल्लूपार विधानसभा सीट से 2017 में बसपा के टिकट पर जीते विनय शंकर तिवारी ने पिछले साल दिसंबर में समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया था. सपा ने उन्हें उनकी सीट से उम्मीदवार बनाया है. कभी यह सीट उनके पिता और पूर्वांचल के बाहुबली हरिशंकर तिवारी की सीट हुआ करती थी. उन्होंने इस सीट का 1985 से 2007 तक इस सीट से विधायक रहे. उन्हें 2007 और 2012 में इस सीट से हार मिली थी. उन्होंने 2017 के चुनाव में अपने बेटे को बसपा के टिकट पर चुनाव मैदान में उतारा.वो जीते भी.वहां उनका मुकाबला बसपा से होते हुए बीजेपी में पहुंचे राजेश त्रिपाठी से है. वहां बसपा के पहलवान सिंह और कांग्रेस की सोनिया शुक्ल भी मुकाबले में हैं.   

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बसपा को 2017 के चुनाव में सबसे अधिक सफलता अंबेडकर नगर जिले में मिली थी. उसने वहां पर 3 सीटों पर जीत दर्ज की थी. उसने जलालपुर, अकबरपुर और कटेहरी सीट जीत थी. अकबरपुर सीट से राम अचल राजभर जीते थे. वो इस सीट से लगातार छह बार से विधायक चुने जा रहे हैं. चुनाव से ठीक पहले उन्होंने बसपा छोड़ सपा की सदस्यता ले ली. वहीं कटेहरी से लालजी वर्मा जीते थे. वो टांडा से भी चार बार विधायक रह चुके थे. वो भी बसपा छोड़ सपा में शामिल हो चुके हैं. सपा ने उन्हें कटेहरी से ही टिकट दिया है. 

पिता सपा और बेटा बसपा में

वहीं जलालपुर से रितेश पांडेय जीते थे. बसपा ने उन्हें 2019 लोकसभा चुनाव में टिकट दिया. वो जीते भी और विधायक पद से इस्तीफा दे दिया. सपा ने इस बार जलालपुर से रितेश पांडेय के पिता राकेश पांडेय को टिकट दिया है.वह सपा के टिकट पर 2002 में विधायक चुने गए थे. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बसपा से आए विधायकों पर सपा का दांव कितना सही साबित हो सकता है.  

सास-ससुर की सीट से चुनाव लड़ने पहुंची बहू

श्रावस्ती के भिनगा से बसपा के टिकट पर जीते असल राइनी जीते थे. बाद में वो सपा में शामिल हो गए. सपा ने उनकी सीट बदलकर श्रावस्ती सदर से उम्मीदवार बनाया है. सुषमा पटेल ने 2017 का चुनाव जौनपुर की मुंगरा बादशाहपुर सीट से जीता था. वो पिछले साल बसपा छोड़ सपा में शामिल हो गई थी. सपा ने इस बार उन्हें मड़ियाहू सीट से टिकट दिया है. उनका घर भी इसी इलाके में है. वहां उनके सास-ससुर इस सीट से विधायक रह चुके हैं. 

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आजमगढ़ को सपा-बसपा का गढ़ माना जाता है. साल 2017 के चुनाव में सगड़ी सीट से वंदना सिंह ने बसपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी. पिछले साल वो बसपा छोड़ बीजेपी में शामिल हो गई थीं. बीजेपी ने उन्हें सगड़ी से ही उम्मीदवार बनाया है.

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