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UP Election 2022: यूपी में बीजेपी के लिए राष्ट्रवादी माहौल बनाएगा आरएसएस, तिरंगा यात्रा और वंदे मातरम का सामूहिक गायन होगा

UP Election 2022: आरएसएस का जोर पूर्वांचल, अवध और बुंदेलखंड पर है. पिछले चुनाव में बीजेपी ने इन इलाकों में शानदार प्रदर्शन किया था. बीजेपी अगले साल होने वाले चुनाव में भी इस सफलता को दोहरा चाहती है.

उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव (UP Assembly Election 2022) अगले साल होने हैं. प्रदेश में सत्तारूढ़ बीजेपी (BJP) इन दिनों पूरी तरह से चुनावी मूड में है. सरकार विकास कार्यों के शिलान्यास और लोकार्पण में व्यस्त है. वहीं पार्टी और संगठन के नेता चुनाव की रणनीति बनाने में व्यस्त हैं. चुनाव नजदीक आता देख बीजेपी की मातृ संस्था आरएसएस (RSS) भी सक्रिय हो रहा है. वह अपने कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों को सक्रिय कर रहा है. इसी के तहत आरएसएस ने आजादी के अमृत महोत्सव के तहत कई तरह के कार्यक्रम आयोजित करेगा. इनकी शुरुआत 19 नवंबर को होगी और ये कार्यक्रम 16 दिसंबर तक चलेंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 19 नवंबर को झांसी में रानी लक्ष्मीबाई के जन्मदिन पर 3 दिन तक चलने वाले समारोह की शुरुआत करेंगे. इसका आयोजन उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार कर रही है.

आजादी के अमृत महोत्सव में क्या-क्या करेगी आरएसएस?

आरएसएस आजादी के अमृत महोत्सव के तहत प्रदेश के छोटे-बड़े शहरों, कस्बों और गांवों में सभाओं का आयोजन करेगा, तिरंगा यात्रा निकालेगा और वंदे मातरम के सामूहिक गायन के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. आरएसएस इन कार्यक्रमों के जरिए उत्तर प्रदेश में राष्ट्रवादी माहौल बनाने की तैयारी में है. उसे उम्मीद है कि इसका फायदा आने वाले चुनाव में बीजेपी को मिलेगा. 

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आजादी के अमृत महोत्सव के तहत आएएसएस के कार्यक्रमों की शुरुआत 19 नवंबर से की जाएगी. उस दिन झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की 193वीं जयंती है. वहीं 16 दिसंबर को विजय दिवस मनाया जाएगा. पाकिस्तानी सेना ने 16 दिसंबर 1971 को भारत के सामने आत्मसमपर्ण किया था. इसी के बाद बांग्लादेश के निर्माण का रास्ता साफ हुआ था. आरएसएस की योजना 16 दिसंबर को स्कूल-कॉलेजों में वंदे मातरम गायन के कार्यक्रम आयोजित करने की है. इसके लिए नारा दिया गया है, 'गांव गांव जाएंगे, वंदे मातरम गाएंगे'. 

आरएसएस की राजनीति क्या है

आरएसएस ने कभी भी खुद को राजनीतिक संगठन नहीं कहा है. उसका हमेशा से कहना रहा है कि वह एक सांस्कृतिक और सामाजिक संगठन है, जिसका उद्देश्य लोगों में राष्ट्रवाद की भावना विकसित करना है. लेकिन ऐसा कहते हुए भी वह राजनीति ही कर रहा होता है. वहीं देश में होने वाले चुनावों से पहले उसके कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ जाती है. आरएसएस का राजनीतिक संगठन बीजेपी है. हालांकि आरएसएस हमेशा कहता है कि उसके कार्यक्रमों का फायदा कोई भी दल उठा सकता है. लेकिन वह अपने कार्यक्रमों की रूपरेखा बीजेपी के फायदे के लिए बनाता है.

अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव को देखते हुए आरएसएस ने इन कार्यक्रमों की योजना बनाई है. उसका जोर बुंदेलखंड, पूर्वांचल और अवध के इलाकों में इस तरह के ज्यादा से ज्यादा कार्यक्रम आयोजित करने पर है. पिछले चुनाव में बीजेपी को इन इलाकों में बहुत बड़ी सफलता मिली थी. सफलता तो उसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी मिली थी. लेकिन किसान आंदोलन की वजह से उसे वहां नुकसान होने की आशंका है. इस नुकसान की भरपाई बीजेपी पूर्वांचल, अवध और बुंदेलखंड के इलाकों से करना चाहती है. यूपी की सत्ता का रास्ता भी पूर्वांचल ही तय करता है. इसी वजह से बीजेपी का केंद्रीय नेतृ्तव पूर्वांचल, अवध और बुंदेलखंड में ज्यादा जोर लगा रहा है. प्रधानमंत्री 2 बार पूर्वांचल और एक बार अवध का दौर कर चुके हैं. और वो 19 को बुंदेलखंड जाने वाले हैं. अमित शाह ने भी 12-13 नवंबर को पूर्वांचल का दौरा किया था. 

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