दिल्ली: UGC ऑफिस बाहर स्टूडेंट्स का विरोध प्रदर्शन, समता संबंधी नियमों को वापस लेने की मांग
UGC Controversy: डीयू के पीएचडी छात्र आलोकित त्रिपाठी ने बताया कि यूजीसी के अधिकारियों को हमने मांगें सौंप दी हैं. वे हमारी मांगों की सूची में से कुछ बिंदुओं पर चर्चा करने के लिए सहमत हुए हैं.

दिल्ली के विभिन्न कॉलेज के स्टूडेंट्स के एक ग्रुप ने मंगलवार (27 जनवरी) को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और उनका कहना था कि आयोग द्वारा जारी किए गए नए नियमों से परिसरों में अराजकता फैल सकती है.
बड़ी संख्या में अवरोधकों और भारी बारिश के बीच कम से कम 100 विद्यार्थियों ने विरोध प्रदर्शन में भाग लिया. समूह ने आयोग को मांगों की एक सूची सौंपी, जिसमें नियमों को पूरी तरह से वापस लेने की मांग भी शामिल है. दिल्ली विश्वविद्यालय के पीएचडी छात्र आलोकित त्रिपाठी ने बताया कि यूजीसी के अधिकारियों को हमने मांगें सौंप दी हैं. वे हमारी मांगों की सूची में से कुछ बिंदुओं पर चर्चा करने के लिए सहमत हुए हैं.
त्रिपाठी ने कहा, “यूजीसी के अधिकारियों ने बताया कि वे ‘इक्विटी स्क्वाड’ में सामान्य समुदाय से एक सदस्य की नियुक्ति की हमारी मांग पर विचार करेंगे. दूसरा, आयोग ने हमें आश्वासन दिया कि वह 15 दिनों के भीतर यानी 12 फरवरी से पहले, कोई समाधान निकालेगा. अंत में, उन्होंने बताया कि झूठी शिकायतों को रोकने के लिए शिकायतकर्ता की पहचान गुप्त नहीं रखी जाएगी.”
उन्होंने कहा कि विरोध करने वाले समूह को आश्वासन दिया गया है कि उनकी बात सुनी जाएगी. विरोध प्रदर्शन करने वालों ने छात्र समुदाय से एकता की अपील करते हुए उनसे ‘यूजीसी के भेदभाव’ को रोकने के लिए एकजुट होने का आग्रह किया.
आयोग ने 13 जनवरी को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्द्धन हेतु) विनियम, 2026 को अधिसूचित किया था और इस नए नियम ने सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के बीच व्यापक आलोचना को जन्म दिया. विद्यार्थियों की दलील है कि यह ढांचा उनके खिलाफ भेदभाव को जन्म दे सकता है.
कॉलेज व विश्वविद्यालयों में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए लागू किए गए नए नियमों के तहत आयोग ने संस्थानों को विशेष समितियां, हेल्पलाइन और निगरानी दल गठित करने को कहा है, ताकि विशेषकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों की शिकायतों का निपटारा किया जा सके.
विद्यार्थियों का कहना है कि नए नियमों से कॉलेजों में पूरी तरह अराजकता फैल जाएगी, क्योंकि अब सबूत पेश करने की जिम्मेदारी पूरी तरह आरोपी पर आ जाएगी और गलत तरीके से आरोपित किये गए विद्यार्थियों के लिए कोई सुरक्षा उपाय नहीं है.
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Source: IOCL

























