शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को 3 हफ्ते की मोहलत, गिरफ्तारी पर रोक, पूछताछ कर सकती है पुलिस
Swami Avimukteshwaranand Saraswati द्वारा दाखिल की गई अग्रिम जमानत की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनवाई हुई और अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है.

प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ दर्ज कथित यौन उत्पीड़न मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से फिलहाल बड़ी राहत मिली है. हाईकोर्ट ने अपने चेंबर में केस से जुड़े वकीलों को बताया कि अगली सुनवाई तक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मुकुंदानंद, दोनों की गिरफ्तारी पर रोक रहेगी.
अदालत का विस्तृत आदेश रात तक हाईकोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड हो सकता है. इसी आदेश में यह भी उल्लेख होगा कि मार्च के तीसरे सप्ताह में अगली सुनवाई किस तारीख को होगी. तब तक दोनों आरोपियों के खिलाफ कोई गिरफ्तारी नहीं की जाएगी, हालांकि पुलिस चाहे तो पूछताछ कर सकती है और शंकराचार्य को जांच में पूरा सहयोग करना होगा.
जस्टिस जे.के. सिन्हा की बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा. कोर्ट रूम में अधिवक्ताओं की भारी भीड़ और गहमागहमी के कारण सुनवाई चेंबर में की गई, जहां केवल केस से जुड़े वकील मौजूद रहे. सुनवाई के दौरान न्यायालय ने बचाव पक्ष से यह भी पूछा कि पहले सेशन कोर्ट का रुख क्यों नहीं किया गया और सीधे हाईकोर्ट आने का औचित्य क्या है. राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने मुख्य रूप से अग्रिम जमानत अर्जी की पोषणीयता पर आपत्ति जताई.
अदालत ने कहा- पहले सेशन कोर्ट जाना था...
उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता को पहले सेशन कोर्ट जाना चाहिए था और वहीं के आदेश को चुनौती देनी चाहिए थी, सीधे हाईकोर्ट आना उचित नहीं है. सरकार ने यह भी कहा कि मामला न्यायालय के आदेश पर दर्ज एफआईआर से संबंधित है और जांच वैज्ञानिक आधार पर की जा रही है. शिकायतकर्ता का बयान दर्ज किया जा चुका है और आगे जांच में आरोपियों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे. सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि सबूत नष्ट करने या कथित पीड़ितों व गवाहों को प्रभावित करने की आशंका हुई तो गिरफ्तारी की कार्रवाई की जा सकती है.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दिलीप गुप्ता ने दलीलें पेश करते हुए कहा कि पुलिस जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा. बचाव पक्ष ने शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी उर्फ आशुतोष पांडेय की कथित आपराधिक पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए उसकी क्रिमिनल हिस्ट्री अदालत के समक्ष रखी. यह भी कहा गया कि जिन बच्चों को नाबालिग बताकर शोषण का आरोप लगाया गया है, उनमें से एक के बालिग होने का दावा उसकी मार्कशीट के आधार पर किया गया है.
पीड़ित बच्चे इस समय कहां हैं? हाईकोर्ट ने पूछा
साथ ही अदालत को बताया गया कि दूसरे कथित पीड़ित को अभी न्यायालय में पेश नहीं किया गया है. अदालत ने शासकीय अधिवक्ता से यह भी पूछा कि कथित पीड़ित बच्चे इस समय कहां हैं और उनकी सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं.
शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से अग्रिम जमानत अर्जी का कड़ा विरोध किया गया और आशंका जताई गई कि यदि आरोपी बाहर रहे तो वे साक्ष्यों और गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए आशुतोष ब्रह्मचारी के रवैए पर भी हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई और टोका-टाकी करने पर फटकार लगाई. सुनवाई के दौरान कुंभ और माघ मेले के दौरान कथित यौन शोषण के आरोपों का जिक्र हुआ और अदालत में एफआईआर भी पढ़ी गई.
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Source: IOCL
























