मेरठ: बिना शराब के यहां जमीन पर नहीं खड़ा होता रावण, पढ़ें रावण के पुतले से जुड़ी ये अनसुनी कहानी
मेरठ में रामलीला का आयोजन इस बार बेहद छोटा है. दशहरे वाले दिन ही तीन घंटे रामलीला का मंचन होगा. रावण और शराब के कनेक्शन की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है.

मेरठ. मेरठ में रावण दहन की तैयारी काफी जोर शोर से चल रही है, लेकिन क्या आपको पता है कि रावण का पुतला खड़ा करने से पहले क्या करना होता है. अगर ये कार्य नहीं करेंगे तो रावण का पुतला खड़ा कर पाना असंभव है. ये दावा मेरठ छावनी राम लीला कमेटी के कोषाध्यक्ष ने किया है.
शराब नहीं..तो रावण नहीं खड़ा होता है!
मेरठ छावनी रामलीला कमेटी के कोषाध्यक्ष विजय कुमार गोयल ने कहा है कि रावण को खड़ा करने से पहले उसकी पूजा होती है और जिस गड्ढे में रावण खड़ा किया जाता है, अगर उसमे शराब नहीं डाली गई तो रावण खड़ा नहीं होगा. अगर आपने जबरदस्ती खड़ा किया तो या तो गिर जायेगा या फिर झुक जायेगा. उन्होंने कहा कि हम पिछले 15 सालों से यही करते आ रहे हैं और हर वर्ष हम प्रयास करते हैं कि रावण को बिना शराब के खड़ा करें लेकिन हर साल प्रयास विफल हो जाता है और अंत में शराब देनी ही पड़ती है.
मेरठ भैसाली ग्राउंड में रामलीला का मंचन चल रहा है, यहां ग्राउंड में रावण तब तक नहीं खड़ा होता जबतक उसे शराब न दी जाय. रावण का पुतला खड़ा करने के लिए गड्ढे में दो बूंद मदिरा डाली जाती है. रावण के ससुराल मेरठ की अनूठी आस्था यही नहीं, बिल्लेश्वर नाथ मंदिर के पुजारी रावण को दामाद और गुरु मानते हैं. दशहरे के दिन दशानन दहन देखना अशुभ मानते हैं. यूं तो समूचे देश में दशहरे का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है. लोग रावण का पुतला दहन देखकर हर्षित होते हैं. लेकिन रावण की ससुराल मेरठ में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो दशानन दहन के वक्त नज़रे फेर लेते हैं.
रावण को मानते हैं दामाद
इनका मानना है कि क्योंकि मंदोदरी यहां की बेटी थीं और रावण यहां का दामाद, इसलिए वो अपने दामाद के पुतले को जलता हुआ कैसे देख सकते हैं? यही नहीं जिस स्थान पर यहां रावण का दहन का सबसे बड़ा कार्यक्रम होता है. उस स्थान की भी मान्यता है कि कभी यहां मंदोदरी का तालाब हुआ करता था. लिहाज़ा इस स्थान पर रावण का पुतला खड़ा करने से पहले गड्ढे में दो बूंद मदिरा डाली जाती है.
मेरठ के भैंसाली ग्राउंड में रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाद का पुतला दहन के लिए बिलकुल तैयार हैं. एक तरफ पंडित जी रावण को गुरु और दामाद की संज्ञा देते हैं तो दूसरी तरफ मेरठ में उस जगह पर रावण, मेघनाद और कुम्भकर्ण का पुतला फूंका जाता है. जहां कभी मंदोदरी तालाब में स्नान के लिए आया करती थीं. इस मैदान की भी अजीब मान्यता है. कहा जाता है कि इस स्थान पर रावण का पुतला जब खड़ा किया जाता है तो गड्ढे में दो बूंद मदिरा डाली जाती है. अगर दो बूंद मदिरा गड्ढे में नहीं डाली जाती तो पुतला बार बार गिर जाता है.
इन मान्यताओं के बीच रावण की ससुराल मेरठ में भव्य और हाईटेक रामलीला मंचन की तैयारी पूरी हो चुकी है. इस बार रावण जिस रथ पर सवार होकर आएगा, उस रथ पर कोरोना भी लिखा होगा. रामलीला कमेटी के सदस्यों का कहना है कि इस बार रावण दहन के साथ कोरोना का भी संहार होगा.
कोरोना को लेकर बरती जा रही है सतर्कता
फ़िलहाल कोरोना काल को देखते हुए रामलीला कमेटी ने पूरी तैयारी कर ली है और उनका कहना है कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए बहुत काम लोगों को ही रामलीला मंचन देखने के लिए आमंत्रित किया है. साथ ही मास्क और सैनिटाइजर की व्यवस्था की गई है, बिना मास्क लगाए किसी को अंदर नहीं आने दिया जायेगा. सरकार और प्रशासन के द्वारा जारी सभी गाइड लाइन का पालन किया जायेगा.
कोरोना काल को देखते हुए इस बार रामलीला मंचन सिर्फ तीन घंटे का होगा. शाम 6 बजे से राम लीला का मंचन शुरू हो जायेगा और करीब रात 21. 30 मिनट पर दहन होगा. रामलीला का मंचन दिल्ली की कमेटी करेगी, जिसका सीधा प्रसारण सोशल मीडिया के कई प्लेटफार्म पर किया जायेगा और इस बार रावण का सारथी कोरोना बनाया गया है, जो रावण दहन के साथ जलेगा और प्रभु श्रीराम से यही प्रार्थना है कि ये कोरोना भी रावण के साथ दहन हो जाये और पहले की तरह रामलीला धूमधाम से मनाई जाए.
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