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बीजेपी का गढ़ है लखनऊ सीट, इस बार क्या हैं समीकरण?

लखनऊ पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की कर्मभूमि रही है। अटल जी का लखनऊ से खास लगाव रहा है।

लखनऊ, एबीपी गंगा: दिल्ली की सत्ता का रास्ता यूपी से ही होकर गुजरता है। 80 लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश में लखनऊ बेहद ही महत्तवपूर्ण सीट मानी जाती है। लखनऊ पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की कर्मभूमि रही है। अटल जी का लखनऊ से खास लगाव रहा है। यहां से अटल जी पांच बार सांसद चुने गए और यहीं से सांसद रहते हुए भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी तीन बार देश के प्रधानमंत्री बने।

सियासत लखनऊ वाली

1991 में हुए आम चुनावों में अटल जी को पहली बार इस सीट पर जीत हासिल हुई थी, तब उन्होंने कांग्रेस के रंजीत सिंह को मात दी थी, उसके बाद तो अटल जी और लखनऊ का साथ हमेशा-हमेशा के लिए हो गया। हालांकि 1919 से पहले भी अटल जी दो बार इस सीट से चुनाव लड़ चुके थे। पहला चुनाव 1957 में लड़े थे लेकिन जीत नहीं मिल पाई थी, फिर 1962 के चुनाव में भी मैदान में उतरे लेकिन हार का सामना करना पड़ा।

नहीं चला राज बब्बर का ग्लैमर

1991 के बाद 1996 के चुनाव में अटल जी एक बार फिर लखनऊ से ही चुनाव लड़े और उनके सामने समाजवादी पार्टी ने राज बब्बर को उतारा लेकिन लखनऊ में राज बब्बर का ग्लैमर नहीं चला और लखनऊ ने अपने चहेते नेता अटल जी को ही 52 फीसदी से ज्यादा वोट देकर लोकसभा भेजा। इसके बाद तो ये सिलसिला अनवरत 2004 तक जारी रहा, जब तक खुद राजनीति के अजातशत्रु अटल बिहारी वाजपेयी ने राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा नहीं कर दी।

...जब लालजी ने संभाली अटल जी की विरासत

2009 में जब देश में लोकसभा के चुनाव होने थे तब बीजेपी में इस बात को लेकर काफी असमंजस था कि आखिर अटल जी की इस विरासत को कौन संभालेगा। उनकी इस सीट से आखिर कौन उम्मीदवार होगा और क्या जो उम्मीदवार होगा उसे उतना ही प्यार लखनऊ देगा जितना उसने अटल बिहारी वाजपयी को दिया। इस मुश्किल घड़ी में बीजेपी ने जिस नाम पर भरोसा जताया वो था लालजी टंडन का जो वर्तमान में बिहार के राज्यपाल हैं।

पुरानी यादों को किया साझा

लालजी टंडन अटल जी के बेहद ही करीबी रहे हैं। अटल जी जब लखनऊ में रहा करते थे तो कई बार टंडन जी के यहां ही रुक जाते थे। अटल जी से जुड़ाव का फायदा लालजी टंडन को मिला और उन्हें 2009 में बीजेपी ने लखनऊ संसदीय सीट से अपना उम्मीदवार बनाया। लालजी अटल जी के 1957 और 1962 के चुनावों में भी संगठन का जिम्मा संभाल चुके थे। अपनी पुस्तक अनकहा लखनऊ में बाबूजी (लखनऊ में लालजी टंडन को इसी नाम से पुकारा जाता है) ने तमाम पुरानी यादों को साझा किया है। 2009 में हुए लोकसभा के चुनाव में लालजी टंडन ने उस वक्त कांग्रेस की उम्मीदवार रहीं रीता बहुगुणा जोशी को लगभग 41000 वोटों से मात दी थी।

मैदान में उतरे राजनाथ सिंह

2014 में जब लोकसभा के चुनाव हुए तब बीजेपी ने बाबूजी पर भरोसा नहीं जताया और इस सीट से पार्टी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री रहे राजनाथ सिंह को उम्मीदवार बनाया। हालांकि उस वक्त लालजी टंडन थोड़ा नाराज भी हुए थे, लेकिन फिर पार्टी ने उन्हे मना लिया था। एक बार फिर अटल जी की इस सीट पर बीजेपी ने जीत हासिल की और इस बार जीत का अंतर भी पिछली बार से पांच गुना ज्यादा रहा। 2014 के चुनाव में राजनाथ सिंह ने कांग्रेस की उम्मीदवार रीता बहुगुणा जोशी को लगभग 2 लाख 72 हजार 749 वोटों से मात दी और केंद्र सरकार में गृहमंत्री बने।

लखनऊ में कब होना है चुनाव

लखनऊ संसदीय सीट पर पांचवे चरण में वोटिंग होनी है। यानि 6 मई (सोमवार) को वोट डाले जाएंगे। लखनऊ लोकसभा में कुल पांच विधानसभा सीटें शामिल हैं। ये हैं लखनऊ पश्चिम, लखनऊ उत्तरी, लखनऊ पूर्वी, लखनऊ मध्य और लखनऊ कैंट। ये सभी शहरी सीटें हैं। लखनऊ की सीट बीजेपी की सबसे सुरक्षित सीटों में से एक है। इन पांच विधानसभा सीटों पर बीजेपी का कब्जा है और इन पांच विधायकों में तीन योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री है, जिनमें बृजेश पाठक, रीता बहुगुणा जोशी और आशुतोष टंडन शामिल हैं।

वोटरों की संख्या

अगर लखनऊ के वोटरों की बात करें तो यहां कुल वोटर 35 लाख 73 हजार, 944 हैं, जिनमें पुरूष वोटर 19 लाख, 22 हजार, 184 और महिला वोटर 16 लाख, 51 हजार, 626 है, जबकि थर्ड जेंडर के वोटरों की संख्या 134 है। इस बार लखनऊ में 51,417 नए वोटर जुड़े हैं इनमें 38 हजार युवा वोटर हैं जो पहली बार अपने मतदान का प्रयोग करेंगे। सबसे ज्यादा 9951 नए वोटर लखनऊ पश्चिम में जुड़े हैं जबकि लखनऊ कैंट में वोटर कम हुए हैं। लखनऊ में नोटिफिकेशन 10 अप्रैल को जारी होगा जबकि नामांकन की आखिरी तारीख 18 अप्रैल है। 22 अप्रैल तक नाम वापिस लिए जा सकते ।

कौन है किसके मुकाबले

लखनऊ संसदीय सीट पर अभी तक कांग्रेस और गठबंधन ने अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। गठबंधन में ये सीट समाजवादी पार्टी के खाते में गई है लेकिन वो अभी तक अपना उम्मीदवार तय नहीं कर पाए हैं। चर्चा है कि कायस्थ वोटों की संख्या को देखते हुए पार्टी किसी कायस्थ समुदाय के व्यक्ति को इस सीट से अपना उम्मीदवार बना सकती है, जबकि कांग्रेस किसी ब्राह्मण कैंडिडेट पर दांव लगा सकती है। बीजेपी ने एक बार फिर केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह को ही इस सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है।

क्या है लखनऊ में जातीय समीकरण

2011 की जनगणना के मुताबिक लखनऊ जिले की कुल आबादी 45 लाख 89 हजार है। जिसमें 71.1 प्रतिशत जनसंख्या हिंदुओं की है। इसके बाद 26.34 फीसदी आबादी मुसलमानों की है। अनुसूचित जाति की आबादी यहां लगभग 14.5 प्रतिशत है, तो अनुसूचित जनजाति लगभग 0.2 फीसदी है। इसी तरह ब्राह्मण, राजपूत वोटर मिलकर कुल करीब 18 फीसदी हैं। ओबीसी मतदाता 28 फीसदी हैं।

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