श्रमिकों के साथ कंधे से कधा मिलाकर चल रही योगी सरकार, यूपी में इन सुविधाओं का मिल रहा लाभ
UP News: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार मानती है कि मेहनतकश लोगों के बिना किसी भी राज्य का विकास अधूरा है और श्रमिक केवल ईंट-पत्थर जोड़ने वाले नहीं, बल्कि भविष्य की नींव रखने वाले होते हैं.

Labor Day 2025: मेहनतकश लोगों के बिना किसी भी राज्य का विकास अधूरा है. यही सोच लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार श्रमिकों के कल्याण के लिए लगातार काम कर रही है. यूपी में श्रमिकों के जीवन को सुरक्षित, सम्मानजनक और बेहतर बनाने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका लाभ अब लाखों श्रमिकों और उनके परिवारों को मिल रहा है.
योगी सरकार मानती है कि श्रमिक केवल ईंट-पत्थर जोड़ने वाले नहीं, बल्कि भविष्य की नींव रखने वाले होते हैं. चाहे काशी विश्वनाथ कॉरिडोर हो या महाकुंभ जैसे आयोजन- हर जगह श्रमिकों की मेहनत का लोहा सरकार ने माना है. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी में श्रमिकों के चरण पखारे थे और सीएम योगी ने प्रयागराज में महाकुंभ के बाद मजदूरों का सम्मान किया.
UPCOS: आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए नया कदम
सीएम योगी ने प्रदेश में काम कर रहे आउटसोर्स कर्मचारियों के हित में ‘उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम’ (UPCOS) के गठन के निर्देश दिए हैं. इसका उद्देश्य वेतन में कटौती, ईपीएफ/ईएसआई जैसी सुविधाओं की कमी और चयन में पारदर्शिता की कमी जैसी समस्याओं को खत्म करना है. सरकार चाहती है कि इन कर्मचारियों को पूरा सम्मान और सुरक्षा मिले.
श्रमिकों के बच्चों के लिए अटल आवासीय विद्यालय
कोरोना काल में जिन बच्चों ने अपने माता-पिता को खोया, उनके लिए हर मंडल में अटल आवासीय विद्यालय खोले गए हैं. इनमें श्रमिकों के बच्चों को मुफ्त शिक्षा, भोजन, ड्रेस और रहने की सुविधा दी जा रही है. अभी 12 जिलों में ये स्कूल काम कर रहे हैं.
सेवामित्र पोर्टल और पेंशन योजनाएं
सेवामित्र पोर्टल पर अब तक 52,000 से ज्यादा कुशल श्रमिकों का पंजीकरण हो चुका है, जिससे उन्हें उनके हुनर के मुताबिक काम मिल रहा है. प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना और अटल पेंशन योजना से भी लाखों श्रमिकों को बुढ़ापे में आर्थिक सहारा मिल रहा है. साथ ही, जनधन योजना के तहत बैंक खाता खुलवाकर उन्हें सीधे आर्थिक सुविधाओं से जोड़ा गया है.
दुर्घटना में सहायता और इलाज का खर्च सरकार उठा रही
अगर किसी पंजीकृत श्रमिक की काम के दौरान मौत हो जाती है, तो सरकार उसके परिवार को 5 लाख रुपये तक की सहायता देती है. सामान्य मृत्यु पर 2 लाख रुपये, जबकि गंभीर बीमारियों के इलाज का पूरा खर्च भी सरकार उठाती है. अपंजीकृत श्रमिकों के लिए भी 1 लाख रुपये तक की सहायता का प्रावधान है.
मातृत्व और बेटी की शादी के लिए भी मदद
महिला श्रमिकों को मातृत्व के दौरान विशेष सहायता दी जाती है. वहीं, बेटी की शादी के लिए भी सरकार 55,000 से 61,000 रुपये तक की आर्थिक सहायता देती है. इससे गरीब श्रमिक परिवारों को बड़ी राहत मिल रही है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार श्रमिकों को केवल योजनाओं तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि उन्हें सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की राह पर ले जा रही है. अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के मौके पर यह साफ हो गया है कि उत्तर प्रदेश में अब मेहनतकश हाथों को न सिर्फ काम मिल रहा है, बल्कि उनके भविष्य को भी उजाले की ओर ले जाया जा रहा है.
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