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अपने इस प्रण से जीवनभर नहीं डिगे महात्मा, मां की दी हुई सीख का पूरा जीवन किया पालन

महात्मा गांधी के जीवन में उनकी मां का प्रभाव दिखता था। गांधी का जीवन बेहद सादा था लेकिन विचार अनमोल थे। अहम बात ये है कि गांधी जी ने पारे जीवन शाकाहार का पालन किया।

नई दिल्ली, एबीपी गंगा। महात्मा गांधी का नाम सुनते ही दिमाग में एक छवि बन जाती है। सत्य और अहिंसा का बोध होने लगता है और बापू की दी हुई सीख जीवन का एक अटूट अंग बन जाती है। महात्मा गांधी सिर्फ एक नाम ही नहीं बल्कि एक पूरा युग हैं। गांधी आकाश में टिमटिमाते तारे नहीं बल्कि पूरा ब्रहमांड हैं। गांधी संपूर्ण हैं और उन पर हर भारतीय को गर्व है।

पूरी दुनिया का सत्य से कराया परिचय 2 अक्टूबर 2019 को पूरा देश राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती का जश्न मनाएगा। 2 अक्टूबर 1869 में गुजरात के पोरबंदर में पैदा हुए मोहनदास करमचंद गांधी को पूरी दुनिया अहिंसा के पुजारी के रूप में जानती है। अहिंसा की ताकत का आभास शायद ही गांधी से ज्यादा किसी और को रहा हो। महात्मा गांधी का जीवन बेहद सादा था लेकिन विचार अनमोल थे। वो गांधी ही थे जिन्होंने पूरी दुनिया को सत्य से परिचय करवाया।

अपने इस प्रण से जीवनभर नहीं डिगे महात्मा, मां की दी हुई सीख का पूरा जीवन किया पालन

खाने में क्या पसंद करते थे गांधी बेहद साधारण दिखने वाले गांधी जी को खाने में क्या पसंद था, क्या इस बारे में आपने कभी सोचा है। गांधी क्या खाते थे, शाकाहार का उनके जीवन पर क्या प्रभाव था और विदेशों में रहते हुए भी गांधी जी कभी व्यसन नहीं पाले, आखिर इसके पीछे शक्ति क्या थी। भारत से अंग्रेजों को भगाने वाले महात्मा गांधी के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातें हम आपको बताने जा रहे हैं। सबसे अहम बात ये है कि गांधी जी शाकाहारी थे और एक वक्त तो उन्होंने चाय और कॉफी तक का त्याग कर दिया था।

दाल-चावल चाव से खाते थे महात्मा महात्मा गांधी को सादा खाना खूब भाता था। दाल-चावल के साथ गांधी जी रोटी भी पसंद करते थे और अपने आहार में इसे शामिल करते थे। दही भी गांधी जी पसंद था और वो अपने आहार में अक्सर दही को शामिल करते थे। बेहद कम लोग ही जानते हैं कि गांधी जी को बैंगन बहुत पसंद था और इसे वो बड़े चाव से खाते थे। गांधी जी दिन में शहद और नींबू के साथ गर्म पानी भी लेते थे।

अपने इस प्रण से जीवनभर नहीं डिगे महात्मा, मां की दी हुई सीख का पूरा जीवन किया पालन

आम की बात ही क्या महात्मा गांधी को आम खूब पसंद था। शायद ही कभी ऐसा हुआ होगा जब गांधी जी को आम खाने का मौका मिला हो और उन्होंने इसे अपने हाथ से जाने दिया हो। खास बात ये है कि गांधी जी चीनी की मिठास से परहेज करते थे। लेकिन आम के लिए उनका प्रेम 'अमर' था। महात्मा गांधी ने अपने कई लेखों में आम को प्रति मोह को लेकर अफसोस भी जताया है। एक वक्त तो ऐसा भी आया जब गांधी जी ने दूध का सेवन बंद कर दिया लेकिन कस्तूरबा गांधी के कहने पर बकरी का दूध पीने के लिए राजी हो गए थे।

जीवन पर दिखा मां का प्रभाव गांधी जी के खान-पान पर पांच साल के शोध के बाद अपनी किताब 'गांधी' सर्च फॉर परफेक्ट डाइट' में अमेरिकी इतिहासकार निको स्लेट ने लिखा है कि स्वस्थ खाना गांधी जी की जिंदगी का अहम हिस्सा था। महात्मा गांधी के खान-पान में उनकी मां का असर दिखता था। मां धार्मिक थीं और अक्सर उपवास रखती थीं। ऐसे में गांधी जी भी अपने खान-पान ध्यान रखते थे।

अपने इस प्रण से जीवनभर नहीं डिगे महात्मा, मां की दी हुई सीख का पूरा जीवन किया पालन

नमक से करते थे परहेज स्लेट ने अपनी किताब में लिखा है कि गांधी जी को पता था कि फल और सब्जियों में प्राकृतिक तौर पर नमक होता है इसलिए वह अपने भोजन में अतिरिक्त नमक लेने से परहेज करते थे। स्लेट के मुताबिक, महात्मा गांधी ने 1911 से ही नमक फ्री डाइट लेनी शुरू कर दी थी। हालांकि 1920 के बाद गांधी जी ने अपने भोजन में हल्का नमक लेना शुरू कर दिया था।

शाकाहार का पालन किया महात्मा गांधी का मानना था कि जिस तरह से जिंदा रहने के लिए हवा और पानी की जरूरत पड़ती है उसी तरह से शरीर को भी पौष्टिक तत्वों की जरूरत होती है। यही वजह रही की गांधी जी खान-पान को लेकर हमेशा बेहद संतुलित रहे। गांधी जी का जन्म शाकाहारी परिवार में हुआ और पूरे जीवन उन्होंने इसका बखूबी पालन भी किया।

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17 बार रखा उपवास आजादी के लिए संघर्ष के दौरान महात्मा गांधी ने 17 बार उपवास रखा और उनका सबसे लंबा उपवास 21 दिन का था। उपवास और खान-पान की गहराई का शानदार संतुलन शायद ही किसी और के जीवन में इस तरह से देखने को मिले जैसा महात्मा गांधी के जीवन में था।

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