हल्द्वानी: सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले गफूर बस्ती में तनाव, 5000 परिवारों की निगाहें निर्णय पर टिकीं
Haldwani News: रेलवे भूमि अतिक्रमण विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले गफूर बस्ती और बनभूलपुरा में तनाव का माहौल है. यहां किसी प्रकार का विवाद न हो इसके लिए प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ा दी है.

रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में आज (2 नवंबर) सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला आने वाला है. यह निर्णय तय करेगा कि गफूर बस्ती और बनभूलपुरा क्षेत्र में बसे 5000 से अधिक परिवारों का भविष्य क्या होगा. फैसले से कुछ घंटे पहले ही पूरे क्षेत्र में डर, अनिश्चितता और बेचैनी का माहौल है. लोग अपने घरों के बाहर खड़े होकर सिर्फ एक ही बात पर चर्चा कर रहे हैं आज क्या होगा.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले एबीपी की ग्राउंड रिपोर्ट में स्थानीय लोगों ने अपनी पीड़ा और डर को बेबाकी से साझा किया. रहीस खान का दावा है कि कुछ जमीन रेलवे की है, लेकिन सब नहीं है.
स्थानीय निवासी मुहम्मद रहीस खान का कहना है कि रेलवे पूरे 80 एकड़ क्षेत्र को अपनी भूमि बताकर गलत कर रहा है. उन्होंने कहा कि कुछ जमीन रेलवे की है, इसमें कोई दोराय नहीं, लेकिन बहुत सी जमीनें फ्रीहोल्ड हैं, कई की रजिस्ट्री है. रेलवे सबको एक ही दायरे में ला रहा है, जो सही नहीं है. उनके मुताबिक विवादित जमीन की वास्तविक स्थिति की जांच किए बिना ही पूरा इलाका अतिक्रमण घोषित किया गया है.
70 साल से यहां रह रहे हैं, अब कहां जाएं — नसीम जहां
एबीपी संवाददाता ने जब नसीम जहां से बात की तो वो बात करते-करते रो पड़ीं. उन्होंने कहा कि उनका घर रेलवे लाइन के बिलकुल पास है. हम 70 साल से यहां रह रहे हैं. हमारे पास कोई दूसरी जगह नहीं है. अगर हमें हटाया गया तो हम कहां जाएंगे. उनकी बातों में वर्षों की उम्मीद और वर्तमान की चिंता साफ झलकती दिखी.
हम राजनीति के शिकार हुए- इशरत
स्थानीय निवासी इशरत का कहना है कि यह विवाद चुनावों के समय ही ज्यादा उभरता है. उन्होंने कहा कि हर चुनाव से पहले यही मुद्दा उठता है. आम लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है. क्या मुसलमान के लिए रहने की जगह नहीं है. हम आखिर जाएं तो कहां. उनके अनुसार, राजनीति के बीच आम नागरिक सबसे बड़ा नुकसान झेल रहा है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि नेताओं ने सिर्फ आश्वासन दिए. कभी कोई ठोस समाधान नहीं दिया. अब हमारी आखिरी उम्मीद सुप्रीम कोर्ट है. बस इतनी गुजारिश है कि अगर हटाया जाए तो हमें कहीं और बसाया जाए.
इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए बनभूलपुरा और आसपास के क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है. प्रशासन ने पूरे इलाके को संवेदनशील घोषित कर दिया है, खासकर इसलिए क्योंकि पिछले वर्ष यहां बड़ा उपद्रव हुआ था.
हजारों परिवारों की उम्मीदें आज के फैसले पर टिकीं
सुप्रीम कोर्ट का फैसला यह निर्धारित करेगा कि क्या गफूर बस्ती और बनभूलपुरा के निवासी अपने घरों में रह पाएंगे या उन्हें विस्थापन का सामना करना पड़ेगा. पूरा हल्द्वानी आज एक बड़े निर्णय की प्रतीक्षा में है, जो वर्षों पुराने इस विवाद को नई दिशा दे सकता है.
ये भी पढ़िए- संसद में गतिरोध रहेगा जारी! किरेण रिजिजू से बैठक के बाद धर्मेंद्र यादव के बयान से मिले संकेत























