Gorakhpur News: ईद से पहले बाजारों में रौनक, तुर्की, इंडोनेशिया की टोपियों की बढ़ी डिमांड
Gorakhpur News In Hindi: रमजान में टोपियों की मांग बढ़ गई है. नखास जैसे बाजारों में 10 रुपये से 2000 रुपये तक की विभिन्न प्रकार की टोपियां उपलब्ध हैं, जिनमें लोकल, अफगानी, इंडोनेशियाई मॉडल शामिल हैं.

इबादत का जिक्र हो और टोपियों का न हो ऐसा मुमकिन नहीं. माह-ए-रमजान में हर रोजेदार के सर पर टोपी सजी नजर आ रही है. फैशन के इस दौर में टोपियां भी पीछे नहीं हैं और बाजार में एक से बढ़कर एक स्टाइलिश टोपियां मौजूद हैं जो बरबस ही अपनी ओर खींच रही हैं.
शहर के नखास, रेती और घंटाघर बड़ी मस्जिद के पास की दुकानों पर बारीक कढ़ाई और उम्दा धागों से तैयार देशी व विदेशी मॉडल की टोपियां सभी का ध्यान खींच रही हैं.
10 रुपये से लेकर 2000 तक - हर बजट की टोपी मौजूद
नखास स्थित टोपी विक्रेता अख्तर आलम ने बताया कि रमजान में हर माह की तुलना में टोपियों की बिक्री काफी बढ़ जाती है. बाजार में इस समय लोकल, अफगानी, इंडोनेशियाई, तुर्की और बांग्लादेशी मॉडल टोपियां छाई हुई हैं. सबसे सस्ती बर्फी और चिमकी टोपी 10 रुपये में उपलब्ध है.
इंडोनेशिया टोपी 20 से 50, जरवी कॉटन टोपी 30 से 120, फोम वाली टोपी 20 से 40, मोती टोपी 30 से 50, बांग्लादेशी टोपी 80 से 200, मखमल रामपुरी टोपी 40 से 60, चिकन लखनऊवा टोपी 40 से 60, पंचकल्ली टोपी 40 से 50, चांद-तारा टोपी 35, पट्टा गोल टोपी 60 से 150 और अफगानी टोपी 60 से 100 रुपये में मिल रही है. सबसे महंगी बरकाती टोपी गोल 100 से 2000 रुपये तक बिक रही है.
पट्टा गोल और जरवी कॉटन की सबसे ज्यादा डिमांड
अख्तर आलम ने बताया कि इस बार सबसे ज्यादा डिमांड पट्टा गोल और जरवी कॉटन टोपी की हो रही है. उन्होंने बताया कि यह टोपियां दिल्ली, लखनऊ, कलकत्ता, मुंबई और रामपुर से मंगवाई गई हैं. रंग-बिरंगी और सादी दोनों तरह की टोपियों की अच्छी बिक्री हो रही है.
इमाम बोले - अमामा पैगंबर-ए-इस्लाम की प्यारी सुन्नत
चिश्तिया मस्जिद बक्शीपुर के इमाम मौलाना महमूद रजा कादरी ने बताया कि इमामा शरीफ पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की प्यारी सुन्नत है. पैगंबर-ए-इस्लाम हमेशा अपनी मुबारक टोपी पर अमामा मुबारक सजाकर रखते थे. उन्होंने अमामा की तरफ इशारा करके फरमाया कि फरिश्तों के ताज ऐसे ही होते हैं. इमाम ने बताया कि अमामा के साथ नमाज दस हजार नेकियों के बराबर है और अमामा के साथ दो रकातें बगैर अमामा की सत्तर रकातों से अफजल हैं.















