यूपी में गांवों के स्कूल होंगे स्मार्ट, गोरखपुर में बन रहा है मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय
Gorakhpur News In Hindi: गोरखपुर के खजनी तहसील क्षेत्र के बेलघाट गांव में इस मॉडल विद्यालय का निर्माण 27 मई से शुरू हो गया है और नवंबर 2027 तक इसे पूर्ण किया जाना लक्षित है.

योगी सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था का कायाकल्प करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. ग्रामीण इलाकों के बच्चों को अब शहर के कॉन्वेंट स्कूलों की तरह शिक्षा और सुविधाएं उनके अपने क्षेत्र में ही मिलेंगी. सरकार के इस खास प्रोजेक्ट के तहत 25 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक 'मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय' का निर्माण किया जा रहा है. गोरखपुर के खजनी तहसील क्षेत्र के बेलघाट गांव में इस मॉडल विद्यालय का निर्माण 27 मई से शुरू हो गया है और नवंबर 2027 तक इसे पूर्ण किया जाना लक्षित है.
मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए भटकना नहीं पड़ेगा या दूर दराज के शहरों का रुख नहीं करना होगा. प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा बारहवीं तक की पूरी पढ़ाई एक ही सुरक्षित और सुविधापूर्ण कैंपस के भीतर संचालित की जाएगी. इससे विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्र की छात्राओं को आगे की पढ़ाई जारी रखने में बड़ी सहूलियत मिलेगी.
'यूपी में बेसमेंट में कोचिंग सेंटर नहीं चलेगा', लखनऊ अग्निकांड के बाद सीएम योगी का सख्त निर्देश
मॉडल विद्यालय के निर्माण का कार्य शुरू
कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश जल निगम (शहरी) की कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज यूनिट 19 के सहायक अभियंता संदीप के अनुसार इस मॉडल विद्यालय के निर्माण के लिए धरातल पर काम शुरू कर दिया गया है. नवंबर 2027 तक यह विद्यालय पूरी तरह से बनकर तैयार हो जाएगा, जिसके बाद ग्रामीण बच्चों के लिए इसे खोल दिया जाएगा. 25 करोड़ 33 लाख 44 हजार रुपये की इस परियोजना में पहली किश्त के रूप में बेसिक शिक्षा विभाग ने 8 करोड़ 83 लाख 20 हजार रुपये अवमुक्त कर दिए हैं.
इंफ्रास्ट्रक्चर का विशेष ख्याल
मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय के निर्माण में इंफ्रास्ट्रक्चर का विशेष ख्याल रखा जाएगा. मॉडल विद्यालय पूरी तरह हाईटेक होगा. इसमें मुख्य भवन, मिड डे मील भवन, बाल वाटिका भवन, मल्टीपर्पज हाल, स्टाफ आवास, प्रिंसिपल आवास, डॉरमेट्री, गार्ड रूम, बाउंड्रीवाल के निर्माण साथ ही फायर सेफ्टी और विभिन्न सिविल-इलेक्ट्रिकल कार्य कराए जाएंगे.
डिजिटल और स्मार्ट बोर्ड के जरिए पढ़ाई
मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय में पारंपरिक ब्लैकबोर्ड की जगह डिजिटल और स्मार्ट बोर्ड के जरिए पढ़ाई होगी. आधुनिक फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और कंप्यूटर लैब्स भी होंगी. सुविधायुक्त खेल का मैदान भी विकसित किया जाएगा. नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों के अनुरूप पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ छात्रों को कंप्यूटर एप्लीकेशंस, कोडिंग और वोकेशनल कोर्सेज की ट्रेनिंग भी दी जाएगी ताकि वे भविष्य के लिए तैयार हो सकें.
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी धीरेंद्र त्रिपाठी का कहना है कि सरकार की इस अनूठी पहल से न केवल ग्रामीण और गरीब परिवारों पर निजी स्कूलों की महंगी फीस का बोझ कम होगा, बल्कि गांवों में छुपी प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के लिए एक सही और आधुनिक मंच मिलेगा.
लखनऊ अग्निकांड के बाद एक्शन में धामी सरकार, अस्पतालों और कोचिंग सेंटरों का होगा फायर सेफ्टी ऑडिट

























