Gorakhpur Dengue: गोरखपुर में 'टाइगर' मच्छर ने मचाया आतंक, अब तक मिले 123 डेंगू मरीज, लोगों को दी जा रही ये सलाह
Gorakhpur News: डेंगू ‘टाइगर’ नाम के मच्छर के काटने से होता है. ये मच्छर साफ और रुके हुए पानी में पनपते हैं. इसमें अधिक लापरवाही जानलेवा भी साबित हो जाती है.

Gorakhpur News: गोरखपुर (Gorakhpur) में डेंगू का कहर बरपा रहा है. सरकारी अस्पतालों के साथ निजी नर्सिंग होम में भी डेंगू के मरीज इलाज कराने के लिए पहुंच रहे हैं. गोरखपुर में अब तक 123 डेंगू के मरीज मिले हैं. जिन्हें इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है. इनमें कई मरीजों का घर पर ही इलाज के साथ चिकित्सक निगरानी कर रहे हैं. डेंगू ‘टाइगर’ नाम के मच्छर के काटने से होता है. ये मच्छर साफ और रुके हुए पानी में पनपते हैं. इसके काटने से मरीज के प्लेटलेट्स तेजी से नीचे घटने लगते हैं. इसके साथ ही तेज बुखार और आम दवाओं से आराम नहीं मिलता है. इसमें अधिक लापरवाही जानलेवा भी साबित हो जाती है.
बेड की संख्या बढ़ाई गई
गोरखपुर के जिला चिकित्सालय में डेंगू के लिए अलग से वार्ड बनाया गया है. यहां पर 15 बेड की संख्या को बढ़ाकर 25 कर दिए गए है. यहां पर भर्ती सभी मरीज डेंगू से पीडि़त हैं. यहां भर्ती मरीजों में कुछ ऐसे हैं जो दूसरे शहर में बीमार होने के बाद यहां अपने शहर में आकर भर्ती हुए हैं. तो कुल लोकल यहीं के रहने वाले हैं. यहां पर भर्ती शबाना पादरी बाजार की रहने वाली हैं. वे बताती हैं कि उनकी डेंगू की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. वे एक दिन पहले यहां पर भर्ती हुई हैं. वे बताती हैं कि चिकित्सक समय पर आते हैं. यहां पर दवाएं भी नियमित रूप से मिल रही है.
सरफराज खान बताते हैं कि उन्हें डेंगू हो गया था. वे गोरखपुर के उरुवा बाजार ग्रामीण इलाके के रहने वाले हैं. वे प्रयागराज में तैयारी करते हैं. उनका प्लेटलेट्स काफी डाउन हो गया था. वे वापस गोरखपुर आकर यहां जिला चिकित्सालय में भर्ती हुए. वे यहां पर तीन दिन से भर्ती है. यहां पर इलाज ठीक से चल रहा है. यही वजह है कि बुखार आने पर लापरवाही की बजाय तुरंत चिकित्सक से उपचार की सलाह दी जा रही है. शहर के राजघाट, शेषपुर, तुर्कमानपुर, बसंतपुर, पादरीबाजार, लालडिग्गी, गीताप्रेस रोड, घंटाघर, जाफराबाजार, तिवारीपुर इलाके में डेंगू के मरीज अधिक हैं.
अब लोगों को दी जा रही ये सलाह
गोरखपुर के सीएमओ आशुतोष कुमार दुबे ने बताया कि गोरखपुर में अभी तक डेंगू के 123 पॉजिटिव मरीज पाए गए हैं. उन्होंने बताया कि अभी भी बुखार के मरीज ओपीडी में आ रहे हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में भी आशा-एनम के द्वारा लगातार संदेश आ रहा है. आशा-एनम उन्हें दवाएं और संदेश भी दे रहे हैं प्रचार वाहन के साथ लोगों को जागरूक करने का काम किया जा रहा है. निगरानी समितियां लोगों को मच्छर से बचने के उपाय बता रहे हैं. नगर निगम और ग्राम्य विकास की टीम भी स्प्रे और फागिंग कर रही हैं. स्कूलों में भी बच्चों को जागरूक करने के साथ फुल बाहर का कपड़ा पहनने के निर्देश दिए जा रहे हैं. ये भी बताया जा रहा है कि किसी भी तरह से ऐसे बर्तन, प्लास्टिक के डिब्बों को हटाने के लिए भी जागरूक किया जा रहा है. जिससे उसमें पानी एकत्र नहीं होने पाए.
गोरखपुर के सीएमओ आशुतोष कुमार दुबे ने बताया कि खुले भाग पर मच्छर रोधी क्रीम लगाए और पुराने टायर-ट्यूब हटाएं. वहीं उन्होंने कहा कि अस्पताल में बेड की संख्या को 15 से 25 कर दिया गया है. मच्छरदानी के अंदर सोने की व्यवस्था की गई है. जिससे उन्हें मच्छर काटने नहीं पाए. क्योंकि उन्हें मच्छर काटेगा, तो डेंगू और बढ़ सकता है. उन्होंने बताया कि डेंगू के मरीजों को भी मच्छरदानी में ही सोना चाहिए. शहरी क्षेत्र में मरीजों की संख्या अधिक हैं. ग्रामीण क्षेत्र में कम हैं. जिला चिकित्सालय में तीन मरीज भर्ती हैं. छह मरीजों का घर पर उपचार चल रहा हैं. टाइगर मच्छर के काटने से डेंगू होता है. ये अधिक ऊंचाई पर नहीं उड़ पाते हैं. ये उजाले में दिन के समय और घुटने के नीचे ही काटते हैं. इसीलिए सलाह दी जाती हैं कि कहीं पर भी पानी एकत्र नहीं होने दें. इसके साथ ही खुले में नहीं सोएं और पूरी बाह के कपड़े पहनने के साथ मच्छरदानी में सोने का प्रयास करें.
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