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यूपी: रिवर फ्रंट घोटाले की खुलने लगी परतें, मनमाने तरीके से जारी किये टेंडर, सर्वे तक नहीं किया गया

रिवर फ्रंट घोटाले में सरकारी धन का जमकर दुरुपयोग किया गया. ई टेंडर की प्रक्रिया नहीं अपनाई गई.वहीं, अफसरों ने मनमाने तरीके से इस प्रोजेक्ट के लिये जारी सराकरी धन का पूरी तरह से लगाया ही नहीं. पढ़ें ये रिपोर्ट.

लखनऊ: अखिलेश यादव सरकार में बनाये गये गोमती रिवरफ्रंट को लेकर घोटाले की पर्ते खुलने लगी हैं. इस प्रोजेक्ट को लेकर मनमानी की गई. जानकारी के मुताबिक, रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले ना तो कोई सर्वेक्षण कराया गया, ना ही कोई कंसलटेंसी कमेटी या संस्था को ही चयनित किया गया.

प्रोजेक्ट का 95 फ़ीसदी बजट खर्च हो गया लेकिन काम सिर्फ 60फ़ीसदी हुआ. इसके अलावा 100 करोड़ का सेंटेज चार्ज मौखिक आदेश पर ही समाप्त कर दिया गया. सेंटेड चार्ज समाप्त करने के लिए बैठक में तत्कालीन प्रमुख सचिव सिंचाई दीपक सिंघल, मुख्य अभियंता शारदा ,सहायक एसएन शर्मा, अधिशासी अभियंता रूप सिंह यादव बीके निरंजन थे.

इससे पहले रूप सिंह यादव ने भी बयान में कहा कि उनके पास सेंटेज चार्ज जमा नहीं करने का कोई लिखित आदेश नहीं था, बस मौखिक आदेश पर सेंटेज चार्ज नहीं लिया गया.

अचरज की बात ये है कि, रिवरफ्रंट के प्रोजेक्ट में ना तो ई टेंडर के प्रक्रिया अपनाई गई और ना ही टेंडर आमंत्रित किए गए. कई महत्वपूर्ण टेंडर में बदलाव को भी प्रकाशित नहीं करवाया गया.

ब्लैक लिस्टेड कंपनी गैमन इंडिया को मिला टेंडर

गैमन इंडिया को लाभ देने के लिए टेंडर की टेक्निकल अहर्ता को भी बदल दिया गया. दिल्ली, राजस्थान और पश्चिम बंगाल के ब्लैक लिस्टेड कंपनी गैमन इंडिया को रिवर फ्रंट का बड़ा टेंडर दिया गया. प्रोजेक्ट के डायाफ्राम वॉल और रबड़ डैम का टेंडर गैमन इंडिया को मिला था.

गैमन इंडिया से 115.6 करोड़ की परफारमेंस ग्रांट भी नहीं ली गई. किसी भी अनुबंध के बाद परफॉर्मेंस ग्रांट लेना अनिवार्य होता है ताकि कंपनी बीच में काम छोड़कर जाए तो उस ग्रांट को रख लिया जाए.

इंटरसेप्टिंग ड्रेन का टेंडर अधीक्षण अभियंता शिवमंगल यादव ने पहले ही जारी कर दिया था. मंत्री परिषद से अनुमोदन 18 जुलाई 2016 को हुआ. 25 जुलाई को शासन ने बजट का पत्र भेजा. लेकिन दो साल पहले ही शिवमंगल यादव ने टेंडर 18 सितंबर 2015 को ही टेंडर स्वीकार कर केके स्पन पाइप प्राइवेट लिमिटेड को टेंडर देकर काम भी शुरू करवा दिया. दूसरे प्रोजेक्ट का फंड डाइवर्ट कर एक साल पहले से ही काम शुरू करवा दिया गया.

मनमानी करते रहे रूप सिंह यादव

जिस केके स्पन पाइप प्राइवेट लिमिटेड को ठेका जारी होने के दो दिन बाद और टेंडर मिलने के 11 दिन पहले हुआ था 7 सितंबर 2015 को हुआ था. रबर डैम का प्रोजेक्ट मूल परियोजना में था ही नहीं इसे बाद में जोड़ दिया गया. डायाफ्राम वॉल और रबर डैम दोनों का ही टेंडर गैमन इंडिया को दिया गया और यह सब रूप सिंह यादव के कार्यकाल में हुआ.

रूप सिंह यादव अधिशासी अभियंता और अधीक्षण अभियंता दोनों के चार्ज पर थे. विजन डॉक्यूमेंट टेंडर प्रक्रिया में चीफ इंजीनियर एसएन शर्मा फंसे थे. विजन डॉक्यूमेंट के लिए टेंडर तीन करोड़ 63 लाख 68 हजार का हुआ.

टेंडर एईकॉम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड गुड़गांव को मिला कंपनी ने प्रोजेक्ट का क्षेत्रफल 7 हेक्टेयर से बढ़ाकर 31.2 हेक्टेयर कर दिया तो विजन डॉक्यूमेंट की लागत बढ़कर दोगुनी यानी 6.85 करोड हो गई. विजन डॉक्यूमेंट टेंडर के सहारे पूरे प्रोजेक्ट का क्षेत्रफल और लागत को बिना किसी अनुमोदन के बढ़ाने की शुरुआत रूप सिंह यादव और चीफ इंजीनियर एस एन शर्मा ने की.

1531.51 करोड़ के बजट में 1437.83 करोड़ खर्च हो गया लेकिन प्रोजेक्ट से जुड़े हुए 6 काम शुरू ही नहीं हुए. 8 प्रोजेक्ट में फंड की 10 फ़ीसदी अधिक खर्च हो गया. कई में 3 गुना और 6 गुना तक अधिक खर्च हुआ लेकिन काम पूरे नहीं किए गए.

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