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नोएडा प्राधिकरण में सामने आया बड़ा घोटाला, जिनको मिल चुका था मुआवजा उन्हें बांट दिया दोबारा

नोएडा अथॉरिटी के अफसरों ने जांच की जहमत भी नहीं उठाई और जिन्हें मुआवजा मिल चुका था उन्हें फिर से बांट दिया गया.

नोएडा: उत्तर प्रदेश में सरकार चाहे किसी भी पार्टी की हो लेकिन नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के नाम घोटाले में उजागर होते रहते हैं. लेकिन इस बार अधिकारियों ने गलत दस्तावेज पेश कर प्राधिकरण को ही करीब 100 करोड़ का चूना लगा डाला और छह सालों तक इस घोटाले का जिन्न फाइलों में दबा रहा लेकिन अब जाकर बाहर आया है और इसके बाहर आते ही पूरे प्राधिकरण में खलबली मच गई है.  

सामने आया बड़ा घोटाला

नोएडा प्राधिकरण का घोटाले में अक्सर नाम आता रहा है, लेकिन इस बार अधिकारियों ने घोटाले को नए तरीके से अंजाम दिया है. इस घोटाले में अधिकारियों ने किसानों की अधिग्रहण की हुई जमीन का मुआवजा देने के लिए प्राधिकरण के खाते से करीब 100 करोड़ रुपये बांट दिए. यह मुआवजा नोएडा के गेझा तिलपताबाद गांव के लोगों को बांटा गया था लेकिन अब आप सोच रहे होंगे कि किसानों की जमीन यदि अधिग्रहण की गई तो उन्हें मुआवजा मिलना चाहिए. लेकिन यहा अधिकारियों ने खेल ये किया कि उन लोगों को मुआवजा बांट दिया, जो पहले ही मुआवजा उठा चुके हैं. अगर बात यही तक होती तो भी गनीमत थी अधिकारियों ने उन लोगों को भी मुआवजा बांट दिया जो कोर्ट में केस भी हार चुके हैं. 

अपात्रों को बांट दिया मुआवजा

अब आप को और हैरानी होगी जब आप मुआवजा बांटने के तरीके को जानेंगे. दरअसल इन अधिकारियों ने मिली भगत से मुआवजा उठाने वाले किसानों ने प्रार्थना पत्र प्राधिकरण को दिया जिसको बिना जांच किए दो घण्टे के भीतर ही करोड़ों की चेक दे दी गई और रकम खाते से निकल भी गई और इन अधिकारियों ने  ये भी नहीं देखा कि जिन्हें मुआवजा दिया है, वो इस मुआवजे को प्राप्त करने की श्रेणी में है भी या नहीं और प्राधिकरण को गलत दस्तावेज पेश कर सब सही साबित कर दिया. लेकिन इसका खुलासा तब हुआ जब मुआवजा उठाने वाले लाभार्थियो की लिस्ट को सीईओ ने चेक किया. दरअसल सीईओ रितु माहेश्वरी ने मीटिंग के दौरान किसानों की अधिग्रहण जमीन के मुआवजे को लेकर पूरी डिटेल मंगवाई और उन्होंने लाभार्थियो की लिस्ट चेक की तो उन्हें कुछ संदेह हुआ तो उन्होंने बिना बताए सभी लाभार्थियों के खाते की डिटेल की जांच की तो पता चला कि 2015 में गेझा तिलपताबाद के उन लोगों को मुआवजा बांट दिया गया जो इसके पात्र ही नहीं थे. 

यानी उन लोगों को मुआवजा दे दिया गया जो पहले ही मुआवजा उठा चुके हैं या फिर वो कोर्ट में केस हार चुके हैं और जब देखा गया कि ऐसे कितने लोग हैं जिन्हें मुआवजा दुबारा दिया गया तो ऐसे करीब 12 मामले सामने आए, जिसमे से 7-8 केस तो पूरी तरह फर्जी पाए गये जिसकी जांच की जा रही है. लेकिन एक मामला तो ऐसा आया जिसने प्राधिकरण के अधिकारियों की पोल खोलकर रख दी.

यहां से शुरू हुई घोटाले की कहानी

दरअसल ये मामला 1982 से जुड़ा है, क्योंकि 1982 में प्राधिकरण ने गेझा तिलपताबाद गांव की जमीन अधिग्रहण की थी जिसमे  कुंदन नाम के व्यक्ति की भी जमीन को अधिग्रहण किया गया था. जिसके बाद  कुंदन ने प्राधिकरण के खिलाफ जिला सत्र न्यायालय में मुकदमा दायर कर दिया और 1993 में जिला अदालत ने इस मामले का निस्तारण कर दिया था और फैसला कुंदन के खिलाफ किया था. इस फैसले के खिलाफ कुंदन की बेटी रामवती ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील की थी. हाईकोर्ट ने इस अपील को खारिज कर दिया था. 

और एबीपी गंगा की पड़ताल में पता चला कि, घोटाले का खेल नोएडा प्राधिकरण के अफसरों ने यहीं से शुरू किया. दरअसल इलाहाबाद हाईकोर्ट से अपील खारिज होने के बावजूद, आरोप है कि रामवती ने मामले को हाईकोर्ट में लंबित बताकर प्राधिकरण के सीईओ को समझौते के लिए आवेदन पत्र दिया था. प्राधिकरण के विधिक विभाग में तैनात दोनों ही अफसरों ने रामवती के साथ मिलीभगत के तहत जांच करके इस मामले को कोर्ट में लंबित बताया था. प्रधिकरण के विधिक विभाग में तैनात दिनेश कुमार सिंह और वीरेंद्र सिंह नगर ने रामवती की याचिका को लंबित बता कर उसे बचा हुआ मुआवजा दिलवा दिया जबकि इस याचिका को हाईकोर्ट पहले ही खारिज कर चुकी थी.

यही वजह है कि, सीईओ के निर्देश पर नोएडा प्राधिकरण के विधिक अधिकारी विधि विभाग सुशील भाटी ने नोएडा के थाना सेक्टर 20 में मुकदमा दर्ज कराया है. जिसमें लिखा है कि प्राधिकरण के वर्ष 2015 में सहायक विधिक अधिकारी के पद पर तैनात वीरेंद्र सिंह नागर और विधिक सलाहकार अधिकारी दिनेश कुमार सिंह ने रामवती नामक एक महिला से जमीन के मुआवजे के संबंध में प्रार्थना पत्र दिया था. जिस पर बिना कोई जांच किए दोनों अधिकारियों ने प्रार्थना पत्र मिलने की तारीख के दिन ही उसे  7 करोड़ 26 लाख 80 हजार 427 रुपये का चेक जारी कर दिया था जो पूरी तरह गैर कानूनी था.

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की

इसके बाद नोएडा पुलिस ने दोनों अधिकारियों और महिला के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 467,468,471 और 120बी के तहत FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. नोएडा पुलिस का कहना है कि, पूरे मामले की जांच की जा रही है जांच में जो भी तथ्य निकलकर आएंगे उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. लेकिन जब एबीपी गंगा ने इस सवाल खड़े किए कि, नोएडा प्राधिकरण की तरफ से भ्रष्टाचार के खिलाफ कई मामले दर्ज कराए गए लेकिन कार्रवाई अभी तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई,तब अधिकारियों का कहना था पुलिस साक्ष्य खंगाल रही है और जैसे ही साक्ष्य पुलिस के हाथ लगेंगे कार्रवाई निश्चित होगी.

दोषी अधिकारियों के खिलाफ होगी कार्रवाई

फिलहाल नोएडा प्राधिकरण सीईओ रितु महेश्वरी का कहना है कि, पूरे मामले की जांच अभी भी की जा रही है, जैसे जैसे सच सामने आता जा रहा विभागीय कार्रवाई के साथ साथ  FIR भी दर्ज कराई जा रही है, और जांच में अगर अन्य अधिकारियों का भी नाम सामने आता है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी. लेकिन एक के बाद एक घोटालों ने यह साबित जरूर कर दिया कि नोएडा प्राधिकरण के कुछ अधिकारी अपने मुनाफे के लिए कुछ भी कर सकते हैं.

फिलहाल अथॉरिटी ने उन सभी 9 लोगों से वसूली के लिए राजस्व अधिनियम के तहत वसूली का नोटिस जारी करने का आग्रह किया है, जिन्हें मुआवजे के नाम पर अतिरिक्त करीब 100 करोड़ रुपये की रकम बांट दी गई. सीईओ रितु महेश्वरी का कहना है कि, अगर इन लोगों ने जल्द ही रकम नोएडा प्राधिकरण को वापस नहीं कि इन सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

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मैं बलराम पांडेय ABP नेटवर्क में वरिष्ठ संवाददाता हूं. मीडिया उद्योग में 19 वर्षों से अधिक अनुभव के साथ, मैं रिपोर्टिंग और विश्लेषण में अपने अनुभव का लाभ उठाकर दर्शकों को आकर्षित और जागरूक करने वाली उच्च-प्रभाव वाली कहानियाँ पेश करता हूं. वर्तमान में, मैं दिल्ली सरकार और राजनीतिक घटनाओं, प्रवर्तन निदेशालय (ED), CBI को कवर करने, के साथ बड़े इंटरव्यू और समसामयिक मामलों पर व्यावहारिक विश्लेषण प्रदान करने के लिए ज़िम्मेदारी निभा रहा हूं 
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