आजमगढ़ के युवक की रूस-यूक्रेन युद्ध में मौत, परिजनों ने एजेंट के लिए फांसी की मांग की
Azamgarh News In Hindi: जोगेंद्र यादव 15 जनवरी 2024 को मऊ के एजेंट विनोद यादव, सुमित और दुष्यंत के साथ रूस गया था. एजेंट ने उन्हें गार्ड और हेल्पर की नौकरी का लालच दिया था.

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के कंधरापुर थाना क्षेत्र के गांव निवासी जोगेंद्र यादव को मऊ जनपद का एजेंट विनोद यादव काम दिलाने के बहाने रूस ले गया और उसे एक महीने की ट्रेनिंग के बाद रूस-यूक्रेन युद्ध में भेज दिया. जहां मई में वह युद्ध में घायल हो गया और उसकी मौत हो गयी. उसके शव का पता नहीं चल सका. कोशिश के बाद उसकी वर्दी गांव पहुंची, जिसका परिवार ने अंतिंम संस्कार किया.
परिजनों ने इस मामले में एजेंट और इस गिरोह से जुड़े लोगों को फांसी देने की मांग की है. जोगेंद्र यादव और यहां से गए कई युवकों को ढूंढने के लिए एबीपी ने ख़ास मुहीम चलाई और यही नहीं रूस तक जाकर कवरेज की. तब सरकार ने संज्ञान लेते हुए जोगेंद्र का पता लगाया, लेकिन व ज़िंदा वापस न आ सका.
क्या है पूरा मामला ?
जानकारी के मुताबिक, माधोपट्टी गांव निवासी 35 वर्षीय जोगेंद्र यादव 15 जनवरी 2024 को मऊ के एजेंट विनोद यादव, सुमित और दुष्यंत के साथ रूस गया था. एजेंट ने उन्हें गार्ड और हेल्पर की नौकरी का लालच दिया था. लेकिन रूस पहुंचने के बाद उन्हें एक महीने की ट्रेनिंग देकर सीमा पर युद्ध में भेज दिया गया. मई 2024 में जोगेंद्र ने परिवार से आखिरी बार फोन पर बात की और बताया कि उसे युद्ध में चोट लगी है. इसके बाद उससे कोई संपर्क नहीं हो सका.
जोगेंद्र के छोटे भाई सुनील कुमार यादव ने बताया कि एजेंट ने भाई को फंसा दिया, बाद में फोन आया कि जोगेंद्र की मौत हो गयी, विस्फोट में शरीर उड़ गया. इसलिए बॉडी या कंकाल नहीं मिल सकेगा. सिर्फ वर्दी भेज रहे हैं.जिला प्रशासन से वर्दी मिलने के बाद परिवार ने चंद्रमा ऋषि आश्रम पर श्रद्धांजलि सभा के बाद अंतिम संस्कार कर दिया.
चार बच्चों का पिता था मृतक
जोगेंद्र की मौत की खबर से उसके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. जोगेंद्र के चार बच्चे हैं, 18 वर्षीया मुस्कान, 13 वर्षीय चार्वी, 8 वर्षीय चाहत और 11 वर्षीय आर्या. बच्चों के भविष्य को लेकर परिवार की चिंताएं और बढ़ गयीं हैं.
एबीपी न्यूज़ ने भी निभाई भूमिका
बता दें कि एबीपी न्यूज़ ने इस मुद्दे को लेकर लगातार रिपोर्टिंग की, यही नहीं टीम रूस पहुंचकर लापता भारतियों की तलाश में भी जुटी. चैनल की मुहिम के बाद सरकार सक्रिय हुई, जिसके बाद कुछ अन्य युवकों के कंकाल वापस आए. परिजनों ने मांग की है कि एजेंट विनोद यादव समेत बाकी एजेंटों को फांसी दी जाए ताकि फिर किसी और का बेटा, पिता या भाई न जाए.























