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अयोध्या: राम जन्मभूमि के शिलान्यास के बाद वहां इस समय क्या हो रहा है, जानें

राम चबूतरा ही राम मंदिर आंदोलन का पूरा इतिहास समेटे हुए है और जब भी राम चबूतरे का जिक्र होता है खुद ब खुद राम मंदिर का जिक्र हो जाता है.

अयोध्या: राम जन्मभूमि परिसर में मौजूदा समय में क्या हो रहा है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भूमि पूजन के बाद राम मंदिर निर्माण शुरू हुआ या नहीं. ये हर कोई यह जानना चाहता है. आपको बता दें, मौजूदा समय में राम चबूतरे को तोड़ा जा रहा है क्योंकि यह चबूतरा राम मंदिर मॉडल के बीचो-बीच आ रहा है.

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि राम चबूतरा भी राम मंदिर आंदोलन का पूरा का पूरा इतिहास समेटे हुए है और जब भी राम चबूतरे का जिक्र होता है खुद ब खुद राम मंदिर का जिक्र हो जाता है. राम जन्मभूमि परिसर में दो राम चबूतरे हुआ करते थे जिसमें एक आध्यात्मिकता के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर चुका था तो दूसरा श्रद्धा और विश्वास की पहचान बन चुका था.

राम चबूतरे का इतिहास सबसे पहले विवादित ढांचे की दीवाल के बाहरी हिस्से में 21 गुने 17 फुट का एक चबूतरा था जिसे राम चबूतरा कहा जाता था जहां राम की बाल स्वरूप की एक मूर्ति विराजमान थी. यहां लगभग उतने ही लोग पूजन अर्चन के लिए इकट्ठा होते थे जितना अयोध्या के अन्य प्रतिष्ठित मंदिरों में होते थे. लेकिन रामलला के प्राकट्य के बाद सब कुछ बदल गया सुप्रीम कोर्ट में मंदिर मस्जिद विवाद की सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने सबसे पहले इसी राम चबूतरे को राम जन्म स्थान माना था.

यही नहीं विश्व हिंदू परिषद ने जब शिलान्यास कार्यक्रम किया था तब इसी चबूतरे के बगल राम मंदिर का शिलान्यास किया था. अब आप समझ सकते हैं राम मंदिर के इतिहास में राम चबूतरे का क्या महत्व था हालांकि अब राम चबूतरा एक इतिहास बन चुका है क्योंकि विवादित ढांचे के विध्वंस के समय यह राम चबूतरा भी टूट गया था.

कारसेवकों ने बनाया था राम चबूतरा यह चबूतरा कारसेवकों ने बनाया था. इसी राम चबूतरे पर 6 दिसंबर 1992 को कारसेवकों को सरयू जल और एक मुट्ठी बालू लाने को कहा गया था लेकिन कारसेवक नाराज हो गए थे और उन्होंने विवादित ढांचे को विध्वंस कर दिया था. इस तरह अतीत के गाल में समा चुके पहले राम चबूतरे के बाद अब दूसरे राम चबूतरे को भी तोड़ा जा रहा है और इसी के साथ गर्भ गृह के समीप बने दोनों राम चबूतरे इतिहास के पन्नों में दफन हो जाएंगे.

राम चबूतरा तोड़ना क्यों जरूरी है राम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा, विश्व हिंदू परिषद ने जिस जगह शिलान्यास किया था उसके पास की जो जमीन थी वहां पर चबूतरा बना था. कारसेवकों के द्वारा चबूतरा इतना मजबूत था की कई दिनों से उसकी तोड़ाई हो रही है लेकिन अभी तक टूट नहीं पाया है. यहां तक कि जेसीबी मशीन भी काम नहीं कर रही है यह चबूतरा तोड़ना इसलिए आवश्यक है क्योंकि जो मंदिर का मॉडल है उसी के मध्य में यह आ रहा है.

उन्होंने कहा, जब तक यह तोड़ा नहीं जाएगा तब तक नक्शे के अनुसार कार्य शुरू नहीं हो पाएगा और बढ़कर आगे मानस भवन भी तोड़ा जाएगा मानस भवन में चिन्हित कर लिया गया है. लेकिन अभी उसकी तोड़ाई शुरू नहीं हुई है. इस प्रकार से जिसको तोड़ना हटाना और समतलीकरण करना आवश्यक है वह हो रहा है और यह कार्य जल्दी से जल्दी पूर्ण हो जाएगा उसके बाद राम मंदिर का कार्य शुरू हो जाएगा.

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