नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश, ऐसे लोगों को बनाते थे शिकार, 3 अरेस्ट
Ambedkarnagar: पुलिस ने इस गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार कर उन्हें जेल भेज दिया है. इनके पास से कई बड़ी कंपनियों के फर्जी नियुक्ति पत्र बरामद हुए हैं. इस गिरोह के निशाने पर बेरोजगार होते थे.

Ambedkarnagar: उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर में पैसे लेकर फर्जी नौकरी का नियुक्ति पत्र बांटने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है. पुलिस ने इस गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ़्तार कर लिया है. आरोप है कि ये लोग बेरोजगार युवक और युवतियों को अपना शिकार बनाते थे और फर्जी ट्रेनिंग और नियुक्ति पत्र देकर उनसे पैसे ऐंठता था. इस गिरोह के तार कई जिलों में जुड़े हैं. ये प्रदेश में घूम-घूमकर नौकरी के नाम पर ठगी करते थे. जिसके बाद पीड़ितों ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था.
पुलिस ने इस गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार कर उन्हें जेल भेज दिया है. इनके पास से कई बड़ी कंपनियों के फर्जी नियुक्ति पत्र बरामद हुए हैं. इस गिरोह के निशाने पर बेरोजगार युवक-युवतियां होते थे. इनका मुख्य ठिकाना प्रयागराज और लखनऊ था. पुलिस इस मामले पर आगे की विधिक कार्रवाई में जुटी है. पुलिस का कहना है का आरोपियों से पूछताछ की जा रही है.
नौकरी का झांसा देकर ठगी
इस बारे में जानकारी देते हुए सीओ टाण्डा ने कहा कि करीब साढ़े तीन महीने पहले विट्स आईटीआई कॉलेज में एक शख्स आया, जिसने अपना नाम रणविजय बताया और खुद को एजेंसी वाला बताकर नर्स की ट्रैनिंग करने वाली 15-20 छात्राओं का इंटरव्यू लिया और उनको मैक्स हॉस्पिटल के नाम पर नियुक्ति पत्र दिया. आरोपी ने कहा कि आपको मैक्स हेल्पकेयर में आप को काम करना है. जिसके बाद उनसे रहने और खाने के नाम पर प्रति कैंडिडेट 4500 रुपये जमा करा लिए. इनसे बाकायदा फोन पे पर पैसा लिया गया.
सीओ ने बताया कि जब ये लड़कियां इस नियुक्ति पत्र लेकर मैक्स हॉस्पिटल लखनऊ पहुंची तो पता चला कि ये नियुक्ति पत्र फर्जी है. जिसके बाद उनके होश उड़ गए. इस मामले में पीड़ित छात्राओं ने टाण्डा कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया. जांच पड़ताल में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ़्तार किया है. इनमें एक का नाम रणविजय है जो सुल्तानपुर का रहने वाला है, दूसरा बाराबंकी से मोहित कुमार और एक बस्ती का रहने वाला प्रशांत मौर्य है. तीनों मिलकर इस पूरे गिरोह को चला रहे था.
इन आरोपियों के पास से पुलिस को अडानी, बिरला जैसी बड़ी कम्पनियों में नौकरी देने का झांसा दिया जता था. जिसके बाद बेरोजगार युवाओं से पैसे वसूलकर उन्हें अपने झांसे में ले लिया जाता था. जांच में पता चला कि ये गिरोह अलग-अलग संस्थाओं के नाम पर बच्चों को ट्रेनिंग देते हैं और फिर ट्रेनिंग देने के पश्चात उनका फर्जी जॉइनिंग लेटर देते थे. पुलिस आगे की विधिक कार्रवाई में जुट गई है.
इनपुट- यज्ञेश त्रिपाठी
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