इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला, कहा- बालिग अपनी मर्जी का मालिक, किसी के भी साथ रहने का है हक
अदालत ने कहा है कि याची उसे परेशान करने वालो के विरूद्ध कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल कर उचित कार्रवाई कर सकती है.

प्रयागराज, मो. मोईन। बालिगों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को अहम फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा है कि बालिग लड़का-लड़की अपनी मर्जी से जहां भी रहें और किसी के साथ भी रहें, उन्हें पूरा अधिकार है. किसी भी कोर्ट या फिर रिश्तेदारों को उनके जीवन की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है.
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए याचिका खारिज की है. अदालत ने कहा है कि याची उसे परेशान करने वालो के विरूद्ध कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल कर उचित कार्रवाई कर सकती है.
बतादें कि न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने रेशमा देवी व अन्य की याचिका पर ये आदेश दिया है. याची का कहना था कि उसने अपनी मर्जी से शादी की है और अपने पति के साथ रह रही है, लेकिन उसके परिवार वाले उसे परेशान कर रहे हैं.
याची ने परिजनों से सुरक्षा की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में मई 2020 में याचिका दाखिल की थी. वही, वरिष्ठ अधिवक्ता एम सी चतुर्वेदी ने याचिका खारिज करने की मांग की थी. उन्होंने कहा था कि याची ने 6 सितंबर साल 2019 को जब शादी की थी तो उस समय वह नाबालिग थी. नाबालिग को संरक्षण देने का अधिकार माता-पिता को है. हालांकि, अदालत ने कहा कि याची की उम्र अभी 18 साल से ऊपर है और वो बालिग है. ऐसे में उसे अपनी मर्जी से जहां चाहे रहने का अधिकार है.
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