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UP Election 2022: मुबारकपुर सीट पर AIMIM की एंट्री से हुआ बसपा का खेल खराब, जानिए- क्या है सियासी समीकरण

UP Chunav: आजमगढ़ की मुबारकपुर सीट पर मुस्लिम मतदाता काफी असर रखते हैं लेकिन यहां कांग्रेस, बसपा और AIMIM के मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं ऐसे में मुस्लिम वोटर्स के बंटने की संभावना बढ़ गई है.

Mubarakpur Assembly Seat: आजमगढ़ की मुबारकपुर विधानसभा सीट पर चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प होता जा रहा है. मुस्लिम बहुल इस सीट पर कांग्रेस, बसपा और AIMIM तीनों ने मुस्लिम उम्मीदवारों को उतार दिया है. जबकि सपा से अखिलेश यादव और बीजेपी की ओर से अरविंद जायसवाल मैदान में हैं. ऐसे में अगर मुस्लिम वोटरों का बंटवारा हुआ तो जाहिर से बात है कि इसका फायदा सीधे तौर पर बीजेपी को होगा. इस सीट पर पिछले दो दशकों से बसपा का कब्जा रहा है. ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि यहां के मतदाताओं की रुझान किस ओर होता है.
 
बसपा का गढ़ रही है मुबारकपुर सीट
आजमगढ़ की मुबारकपुर विधानसभा सीट पर 1996 से लगातार बसपा का कब्जा रहा है. इस सीट से 1996 में यशवंत सिंह बसपा के टिकट पर विधायक चुने गए जो इस समय भारतीय जनता पार्टी से विधान परिषद सदस्य हैं. 2002 में बसपा ने इस सीट पर चंद्रदेव यादव करेली को टिकट दिया और वह चुनाव जीते 2007 के विधानसभा चुनाव में फिर बसपा ने चंद्रदेव यादव को ही प्रत्याशी बनाया और वह चुनाव जीते मायावती की सरकार में वह कैबिनेट मंत्री रहे. 2012 में बसपा ने इस सीट से शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली को अपना प्रत्याशी बनाया उनका मुख्य मुकाबला समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव से था उन्होंने अखिलेश यादव को हराकर इस सीट पर बसपा की जीत को बरकरार रखा. 2017 में फिर बसपा ने इस सीट पर शाह आलम को ही प्रत्याशी बनाया. इन चुनावों में भी जीत का सिलसिला बरकरार रहा और शाह आलम ने सपा उम्मीदवार को फिर से हरा दिया. 
 
बसपा के कद्दावर नेता शाह आलम ने छोड़ी पार्टी
लगातार जीत के बाद शाह आलम मायावती के काफी करीब हो गए. मायावती ने शाह आलम को विधानमंडल दल का नेता बनाया. इसी बीच पिछले साल 25 नवंबर को शाह आलम ने एक पत्र लिखकर बताया कि कुछ दिन पहले मायावती के साथ हुई बैठक में कुछ ऐसा हुआ जिससे आहत होकर उन्होंने बसपा विधानमंडल दल के नेता के साथ-साथ पार्टी की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया और चर्चा तेज हो गई कि वह जल्द ही समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर मुबारकपुर सीट से पार्टी के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे.
 
इस बीच सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ उनकी कई बार मुलाकात भी हुई. शाह आलम की मानें तो अखिलेश यादव ने उन्हें कहा कि आप क्षेत्र में जाइए और चुनाव लड़ने की तैयारी करिए इस आश्वासन पर उन्होंने क्षेत्र में पहुंचकर जनसंपर्क भी शुरू कर दिया और बसपा के पदाधिकारियों ने भी शाह आलम के समर्थन में बसपा से त्यागपत्र देकर समाजवादी पार्टी की सदस्यता लेने का ऐलान कर दिया. लेकिन सपा में उनके साथ फिर खेल हो गया और अखिलेश ने यहां शाह आलम को टिकट न देकर 2017 में सपा उम्मीदवार रहे अखिलेश यादव को ही प्रत्याशी बनाया है.
 
AIMIM उम्मीदवार ने बिगाड़ा बसपा का खेल
सपा के टिकट की घोषणा के बाद फिर चर्चा तेज हुई कि शाह आलम, बसपा में वापसी कर सकते हैं लेकिन ऐसा हुआ नहीं. बसपा ने अपने पूर्व घोषित प्रत्याशी अब्दुस्सलाम को अपना उम्मीदवार बना दिया. जिसके बाद शाह आलम के सामने सपा और बसपा दोनों से चुनाव लड़ने का विकल्प ही खत्म हो गया. ऐसे में मुबारकपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की चाहत रखने वाले शाह आलम ने एआईएमआईएम की ओर रुख कर लिया और अब वो ओवैसी की पार्टी से चुनावी मैदान में आ गए हैं.  
 
ये हुआ तो बीजेपी को होगा फायदा
मुबारकपुर सीट की बात करें तो ये मुस्लिम बहुल सीट मानी जाती है. इस सीट पर एक लाख से ज्यादा मुस्लिम वोटर हैं. भारतीय जनता पार्टी ने यहां पर सगड़ी विधानसभा सीट से बीजेपी के पूर्व प्रत्याशी रहे अरविंद जायसवाल को टिकट दिया है. कांग्रेस ने महिला प्रत्याशी परवीन मंदे को टिकट दिया है. लेकिन बसपा से अब्दुल सलाम ,कांग्रेस से परवीन मंदे  और फिर AIMIM से शाह आलम के चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद इस सीट पर चुनाव काफी रोचक होगा. अगर मुस्लिम वोटों का बंटवारा होता है तो इस सीट पर सीधा फायदा भाजपा को मिलेगा. जाहिर है इससे पिछले दो दशक से इस सीट पर चुनाव जीत रही बसपा को झटका लग सकता वही मुस्लिम वोटों के बंटवारे का नुकसान समाजवादी पार्टी को भी होगा. 
 
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