आगरा में मस्जिद, मजार और मंदिर पर चला बुलडोजर, प्रशासन ने सरकारी जमीन से हटाया अवैध कब्जा
Agra News: प्रशासन के मुताबिक़ कोर्ट के आदेश पर सभी पक्षों को पहले ही नोटिस दिए गए थे. निर्धारित अवधि में मंदिर पक्ष ने मूर्तियों को हटाकर सुरक्षित स्थान पर स्थापित कर दिया गया था.

आगरा में सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई. कोर्ट के आदेश का बाद यहां अवैध तरीके से बनाए गए मस्जिद, मजार और मंदिर को बुलडोज़र से ध्वस्त कर दिया गया. इस दौरान मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा.
ये कार्रवाई आगरा के तहसील सदर अंतर्गत थाना जगदीशपुरा क्षेत्र के अंगूठी गांव में तालाब की भूमि पर बने अतिक्रमण को हटाने के लिए की गई. प्रशासन ने यहां बुलडोजर अभियान चलाया. प्रशासन के मुताबिक यहां के गाटा संख्या 486, रकबा 5 हेक्टेयर भूमि अभिलेखों में तालाब के रूप में दर्ज है.
इस भूमि को लेकर मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में विचाराधीन था, जिसके बाद न्यायालय के आदेश के अनुपालन में कार्रवाई की गई. अभियान के दौरान तालाब की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए जेसीबी मशीनों का उपयोग किया गया.
सरकारी जमीन पर बनी मजार और मस्जिद हटाए
कार्रवाई के दौरान तालाब की भूमि पर बने मंदिर, मस्जिद और मजार को हटाया गया. एसडीएम सदर सचिन राजपूत ने बताया कि न्यायालय के आदेश के क्रम में सभी पक्षों को पूर्व में नोटिस जारी किए गए थे. निर्धारित अवधि के दौरान मंदिर पक्ष द्वारा मूर्तियों को मंदिर से हटाकर सुरक्षित स्थान पर स्थापित कर दिया गया था. प्रशासन का कहना है कि संबंधित पक्षों को नियमानुसार पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराया गया था, जिसके बाद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई.
बुलडोजर एक्शन के दौरान रही कड़ी सुरक्षा
अभियान के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए भारी पुलिस बल और पीएसी को मौके पर तैनात किया गया. कई थानों की पुलिस तथा वरिष्ठ अधिकारी पूरे समय क्षेत्र में मौजूद रहे. प्रशासन द्वारा गांव और आसपास के इलाकों में पैदल गश्त भी की गई तथा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती गई.
प्रशासन का कहना है कि पूरी कार्रवाई न्यायालय के आदेश के तहत शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराई गई है. अभियान समाप्त होने के बाद क्षेत्र में स्थिति सामान्य बनी हुई है और कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है. वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि मजार काफी पुरानी थी तथा मस्जिद लगभग 25 वर्ष पुरानी थी. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि तालाब की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की यह कार्रवाई न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में की गई है.
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