डूंगरपुर में किसानों, मजदूरों और छात्रों का जेल भरो आंदोलन, जानें क्या हैं मांगें?
Dungarpur News In Hindi: डूंगरपुर में किसानों, मजदूरों, छात्रों और महिला कर्मियों ने जनमुद्दों को लेकर जेल भरो आंदोलन किया. प्रदर्शनकारियों ने भूमि अधिकार, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा की मांग उठाई.

राजस्थान के डूंगरपुर में सोमवार को विभिन्न जनमुद्दों को लेकर बड़ा जेल भरो आंदोलन किया गया. किसानों, मजदूरों, विद्यार्थियों, महिला कर्मियों और आदिवासी समाज के लोगों ने अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया. अखिल भारतीय किसान सभा, सीटू समेत कई संगठनों के संयुक्त आह्वान पर आयोजित इस आंदोलन में सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया और सामूहिक गिरफ्तारी दी.
आंदोलन की शुरुआत बादल महल रोड से हुई, जहां बड़ी संख्या में लोग हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर पहुंचे. रैली जिला मुख्यालय तक पहुंची, जहां प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. प्रदर्शनकारियों ने वनाधिकार पट्टे, भूमि अधिकार, रोजगार, शिक्षा, किसान समस्याओं और महिला कर्मियों की मांगों को लेकर अपनी आवाज बुलंद की.
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किसान और आदिवासी परिवारों ने उठाया भूमि अधिकार का मुद्दा
आंदोलन में वनाधिकार अधिनियम 2006 के तहत पात्र परिवारों को वनाधिकार पट्टे जारी करने की मांग प्रमुख रही. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कई आदिवासी परिवार लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं. इसके अलावा अनाम जमीन पर सालों से काबिज गरीब और पात्र परिवारों को खातेदारी अधिकार देने की मांग भी उठाई गई. आंदोलनकारियों ने कहा कि भूमि अधिकार मिलने से हजारों परिवारों को स्थायी सुरक्षा मिल सकेगी.
छात्रों ने परीक्षा नियम और छात्रसंघ चुनाव को लेकर उठाई आवाज
विद्यार्थी संगठनों एसएफआई और डीवाईएफआई ने प्रतियोगी एवं पात्रता परीक्षाओं में 40 प्रतिशत न्यूनतम अंकों की बाध्यता खत्म करने की मांग की. छात्र नेताओं का कहना है कि टीएसपी और आदिवासी क्षेत्रों के विद्यार्थियों को पहले से ही कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में अतिरिक्त न्यूनतम अंक की बाध्यता उनके अवसरों को प्रभावित कर रही है. प्रदर्शनकारियों ने राजस्थान के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव फिर से बहाल करने की मांग भी की.
आशा-आंगनवाड़ी कर्मियों ने भी बुलंद की आवाज
आंदोलन में आशा सहयोगिनियों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की समस्याएं भी प्रमुखता से उठाई गईं. महिला कर्मियों ने मानदेय बढ़ाने, लंबित भुगतान जल्द जारी करने, सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग की. वहीं किसानों ने मेवाड़ डेम की नहरों में पर्याप्त पानी छोड़ने, कृषि कार्य के लिए नियमित बिजली उपलब्ध कराने और स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर पुनर्विचार की मांग की.
प्रदर्शन के अंत में बड़ी संख्या में किसानों, मजदूरों, छात्रों, महिलाओं और विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं ने सामूहिक गिरफ्तारी दी. आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को गांव और तहसील स्तर तक विस्तार दिया जाएगा.
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