पिंडवाड़ा की बेटी अंजू चौहान ने जीता अंतरराष्ट्रीय सम्मान, पर्यावरण और नारी शक्ति का बनी प्रतीक
Rajasthan News: सिरोही जिले के पिंडवाड़ा नगर की बेटी और वन विभाग में कार्यरत वन रक्षक अंजू चौहान को दिल्ली में पर्यावरण संरक्षण एवं नारी सशक्तीकरण के क्षेत्र में सम्मानित किया गया है.

राजस्थान के सिरोही जिले के पिंडवाड़ा नगर की बेटी और वन विभाग में कार्यरत वन रक्षक अंजू चौहान ने राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन किया है. दिल्ली में आयोजित 6वें वुमन प्रेस्टीजियस अवॉर्ड समारोह में उन्हें पर्यावरण संरक्षण एवं नारी सशक्तीकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया है. इस उपलब्धि से न केवल पिंडवाड़ा बल्कि पूरे सिरोही जिले और राजस्थान प्रदेश में गौरव की अनुभूति है.
देशभर की 14 प्रेरणादायी महिलाओं में हुआ चयन
इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए देश के विभिन्न राज्यों से 14 साहसी, कर्मठ और प्रेरणादायी महिलाओं का चयन किया गया था. समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और जमीनी स्तर पर निरंतर कार्य करने वाली महिलाओं में अंजू चौहान का नाम शामिल होना पिंडवाड़ा के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. चयन समिति ने उनके कार्यों को अनुकरणीय बताते हुए उन्हें इस सम्मान के योग्य माना है.
श्रीलंका दूतावास में हुआ भव्य आयोजन
सम्मान समारोह का आयोजन श्रीलंका दूतावास, नई दिल्ली में किया गया, जो अपने आप में इस कार्यक्रम की गरिमा को दर्शाता है. समारोह में श्रीलंका, ताजिकिस्तान, मेडागास्कर सहित कई देशों के राजदूत, अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे. अंतरराष्ट्रीय मंच पर अंजू चौहान को मिला यह सम्मान उनके कार्यों की वैश्विक स्वीकृति का प्रतीक है.
वन रक्षक के रूप में सराहनीय सेवा
वन रक्षक के पद पर कार्यरत अंजू चौहान ने अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए वन्यजीव संरक्षण, वृक्षारोपण, पर्यावरण जागरूकता और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए उल्लेखनीय योगदान दिया है. उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और युवाओं को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया है. उनके प्रयासों से कई महिलाएं सामाजिक गतिविधियों से जुड़ी हैं.
नारी सशक्तीकरण की दिशा में मजबूत पहल
पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ अंजू चौहान ने नारी सशक्तीकरण को भी अपने कार्यों का अहम हिस्सा बनाया. उन्होंने महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने, शिक्षा और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए. यही कारण है कि वे आज क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत बनकर उभरी हैं.
पिंडवाड़ा में खुशी की लहर
जैसे ही अंजू चौहान को यह सम्मान मिलने की खबर पिंडवाड़ा पहुंची, पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई. स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और जन प्रतिनिधियों ने उन्हें बधाइयां दीं. लोगों ने कहा कि अंजू चौहान जैसी बेटियां समाज का गौरव हैं, जो आने वाली पीढ़ियों को आगे बढ़ने और कुछ अलग करने की प्रेरणा देती हैं.
उज्ज्वल भविष्य की कामना
क्षेत्रवासियों ने अंजू चौहान के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए विश्वास जताया कि वे आगे भी इसी तरह समाज और पर्यावरण के लिए कार्य करती रहेंगी. उनका यह सम्मान न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि पूरे जिले के लिए गर्व का विषय है.
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Source: IOCL























