पंजाब से ‘आप’ का किला हिला, 6 राज्यसभा सांसद के BJP में जाने से कैसे बदले सियासी समीकरण?
Raghav Chadha Quits AAP: पंजाब में आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है, जहां राघव चड्ढा समेत 6 राज्यसभा सांसद भाजपा में शामिल हो गए. इस बगावत से पार्टी की राज्यसभा में ताकत घट गई है.

- 6 राज्यसभा सांसद आम आदमी पार्टी छोड़ भाजपा में शामिल हो गए।
- इस घटनाक्रम से पंजाब की राजनीति में बड़ा उलटफेर हुआ।
- पार्टी के राज्यसभा सांसदों की संख्या घटकर केवल तीन रह गई।
- चुनावी माहौल में हुई इस बगावत से नेतृत्व की चिंता बढ़ी।
राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के साथ अशोक मित्तल और संदीप पाठक समेत 4 राज्यसभा सांसदों ने आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है. इस घटनाक्रम से पंजाब की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है. पार्टी के अंदर हलचल तेज हो गई है और पंजाब में सियासी समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं.
पंजाब से आम आदमी पार्टी के 6 राज्यसभा सांसदों के एक साथ जाने को बड़ा झटका माना जा रहा है. इन नेताओं के बीजेपी में शामिल होने से पार्टी की पकड़ कमजोर पड़ती दिख रही है. अब पंजाब से राज्यसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व केवल बलवीर सिंह सीचेवाल तक सीमित रह गया है.
Raghav Chadha News: राघव चड्ढा के कदम से हिल गई अरविंद केजरीवाल की सियासत!अब AAP का क्या होगा?
ये हैं 6 सांसद जिन्होंने छोड़ी पार्टी
पंजाब से आम आदमी पार्टी के जिन छह राज्यसभा सांसदों ने भाजपा का रुख किया है, उनके नाम हैं विक्रमजीत सिंह साहनी, अशोक मित्तल, राघव चड्ढा, संदीप पाठक, हरभजन सिंह और राजिंदर गुप्ता. इन सभी सांसदों के भाजपा में शामिल होने से आम आदमी पार्टी को एक साथ बड़ा झटका लगा है.
इन 6 नेताओं के जाने के बाद अब पंजाब से राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के केवल बलवीर सिंह सीचेवाल ही बचे हैं. इससे साफ है कि पार्टी की पंजाब इकाई को गहरी चोट लगी है.
राज्यसभा में संख्या घटी, सियासी असर बढ़ा
राज्यसभा में पहले आम आदमी पार्टी के कुल 10 सदस्य थे, लेकिन अब इनमें से दो-तिहाई सांसद पार्टी छोड़ चुके हैं. इस घटनाक्रम के बाद अब पार्टी के पास केवल 3 सदस्य ही बचे हैं संजय सिंह, नारायण दास गुप्ता और संत बलबीर सिंह.
यह गिरावट सिर्फ संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पार्टी की रणनीति और राष्ट्रीय स्तर पर उसकी स्थिति पर भी पड़ सकता है.
सांसदों का कार्यकाल भी लंबा, असर और गहरा
पार्टी छोड़ने वाले ज्यादातर सांसदों का कार्यकाल अभी कई साल बाकी है. जैसे राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक और हरभजन सिंह का कार्यकाल वर्ष 2028 तक है. ऐसे में इनका पार्टी छोड़ना आने वाले वर्षों में भी आम आदमी पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है.
चुनावी माहौल में बगावत से बढ़ी चिंता
देश में चुनावी माहौल के बीच इस तरह की बगावत ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है. अरविंद केजरीवाल के लिए यह बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है. पंजाब, जो पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता था, वहीं से इस तरह का टूटना संकेत देता है कि अंदरूनी असंतोष गहराता जा रहा है.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह घटनाक्रम सिर्फ शुरुआत हो सकता है. अगर हालात नहीं संभाले गए, तो आगे और नेता भी पार्टी से दूरी बना सकते हैं. वहीं भाजपा के लिए यह पंजाब में अपनी स्थिति मजबूत करने का मौका बनता दिख रहा है. पंजाब से उठी यह बगावत आम आदमी पार्टी के लिए बड़ा संकट बनकर उभरी है, जिसका असर आने वाले चुनावों में साफ दिखाई दे सकता है.
























