कर्ज के बोझ तले दबी पंजाब सरकार, DA की अदायगी बनी चुनौती, कांग्रेस ने घेरा
Punjab News: पंजाब की भगवंत मान सरकार को इसके लिए 14191 करोड़ रुपए खर्च करने पड़ेंगे और पहले ही कर्ज के बोझ तले दबी सरकार के लिए ये टेढ़ा काम है.

पंजाब में कर्मचारियों और पेंशनरों को डीए की अदायगी अब भगवंत मान सरकार के सामने विधानसभा चुनाव से पहले एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है. शुक्रवार (7 अगस्त) को पंजाब सरकार के कर्मचारी और पेंशनर डीए की अदायगी और ओल्ड पेंशन स्कीम के मुद्दे पर बड़ा प्रदर्शन करने जा रहे हैं.
कर्मचारियों संगठनों के नेताओं के मुताबिक तकरीबन एक लाख कर्मचारी जिनमें आउटसोर्स कर्मचारी जो नौकरी पक्की करने की मांग कर रहे हैं और पेंशनर भी प्रदर्शन में हिस्सा लेंगे. पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने सोमवार को राज्य सरकार को सारा डीए अदा करने का आदेश दिया है और इसके लिए सरकार को 15 दिन का समय दिया गया है.
कर्ज के बोझ तले दबी सरकार
सरकार को इसके लिए 14191 करोड़ रुपए खर्च करने पड़ेंगे और पहले ही कर्ज के बोझ तले दबी सरकार के लिए ये टेढ़ा काम है. सरकार हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट भी जा सकती है. फिलहाल पंजाब सरकार पर कर्जा चार लाख करोड़ से ज्यादा है.
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हालांकि विपक्ष और कर्मचारी संगठन लगातार सरकार को इस मुद्दे पर घेर रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि सरकार हाईकोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए डीए अदा करे.
कांग्रेस ने सरकार को घेरा
कांग्रेस नेता और नेता विपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने कहा है कि असल में सरकार डीए देना ही नहीं चाहती और सिर्फ समय व्यतीत कर रही है ताकि इस सरकार के बचे हुए कार्यकाल के चार पांच महीने निकल जाएं और डीए अदायगी का बोझ अगली सरकार पर पड़े.
'इससे बच नहीं सकती आप सरकार'
उन्होंने कहा है कि आम आदमी पार्टी यह कह कर नहीं बच सकती कि पिछली सरकारों के कारण यह बोझ उन पर पड़ा है क्योंकि आम आदमी पार्टी ने जब विधानसभा चुनाव में इस मुद्दे पर वोट मांगे थे तब भी उन्हें पता था कि उन्हें डीए देना पड़ेगा. हालांकि बाजवा ने कहा है कि बेशक इतनी बड़ी रकम का डीए देना मुश्किल काम है खासकर राज्य की आर्थिक स्थिति को देखते हुए पर अगर कांग्रेस की सरकार राज्य में बनती है तो वे कर्मचारियों को उनका हक देंगे.
'पिछली सरकारों की वजह से बनी ऐसी स्थिति'
वहीं वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा है कि राज्य सरकार कर्मचारियों को उनका हक देगी, लेकिन साथ ही उन्होंने पिछली सरकारों पर इल्जाम लगाया है कि उनकी वजह से यह स्थिति पैदा हुई है. उन्होंने कहा है कि शिरोमणि अकाली दल- बीजेपी गठबंधन सरकार के वक्त 2016 में कर्मचारियों के लिए छठे वेतन आयोग को लागू करने का फैसला लिया गया था, जिसे कांग्रेस सरकार के वक्त 2021 में लागू किया गया और इसे 2016 से लागू किया गया. अब उसी तनख्वाह के आधार पर कर्मचारियों को डीए दिया जाना है.
'पंजाब में दिया जाता है ज्यादा वेतन'
उन्होंने कहा है कि पंजाब में कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारियों और अन्य राज्यों के कर्मचारियों के मुकाबले सबसे अधिक तनख्वाह दी जाती है. उन्होंने कहा है कि अगर केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन के आधार पर डीए की अदायगी करनी हो तो यह राज्य सरकार के लिए बड़ा काम नहीं है.
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