'मर्सिडीज गिफ्ट' वाला बयान देकर फंसीं नीलम गोरे? उद्धव ठाकरे की नेता ने भेजा लीगल नोटिस
Legal Notice to Neelam Gorhe: शिवसेना यूबीटी ने विधान परिषद की उपसभापति नीलम गोरे को कानूनी नोटिस भेजा है. उद्धव ठाकरे गुट का आरोप है कि नीलम गोरे ने अपने बयान से अविभाजित शिवसेना की छवि खराब की है.

Shiv Sena UBT Sends Legal Notice to Neelam Gorhe: महाराष्ट्र विधान परिषद की सदस्य और उप सभापति नीलम गोरे के एक बयान से शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे नाराज दिख रहे हैं. नीलम गोरे के 'मर्सिडीज़' वाले बयान के तीन दिन बाद अब शिवसेना यूबीटी की ओर से उन्हें लीगल नोटिस भेजा गया है. उद्धव गुट का दावा है कि नीलम गोरे ने अपने बयान से न केवल उद्धव ठाकरे बल्कि अविभाजित शिवसेना की छवि खराब करने की भी कोशिश की है.
दरअसल, रविवार (23 फरवरी) को मराठी साहित्य सम्मेलन में भाषण देते हुए नीलम गोरे ने दावा किया था कि अविभाजित शिवसेना में बड़े पद पाने के लिए नेताओं को उद्धव ठाकरे को मर्सिडीज गाड़ियां गिफ्ट करनी पड़ती थीं.
लीगल नोटिस में क्या लिखा है?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अब शिवसेना यूबीटी नेता सुषमा अंधारे की ओर से एडवोकेट असीम सरोड़े ने नीलम गोरे को लीगल नोटिस जारी किया है. नोटिस में कहा गया है कि नीलम गोरे ने शिवसेना यूबीटी और पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे के खिलाफ मानहानिकारक बयान दिया है और अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन जैसे बड़े मंच से उनका अपमान किया गया है.
नोटिस में इस बात का जिक्र है कि नीलम गोरे दावा करती हैं कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में जब अविभाजित शिवसेना थी, तब महत्वपूर्ण पद केवल उन्हें मिलते थे, जो ठाकरे को मर्सिडीज कार गिफ्ट करते थे. वहीं, उन्होंने यह भी दावा किया था कि पार्टी के अंदर नियुक्ति केवल उन लोगों की हुई जिन्होंने उद्धव ठाकरे को अपनी आर्थिक ताकत दिखाई. नोटिस में लिखा गया है कि ये सब बेतुके बयान हैं और अविभाजित शिवसेना की छवि खराब करने के उद्देश्य से दिए गए हैं.
नोटिस में लिखा गया है कि नीलम गोरे के बयान को मीडिया में दिखाया गया है, जिससे शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे की छवि खराब हुई है. वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु ने भी उस सम्मेलन में भाषण दिया, लेकिन कोई भी आपत्तिजनक बयानबाजी नहीं की.
ऐसे बयान के लिए साहित्यिक मंच को चुना जाना गलत
नोटिस में यह भी कहा गया है, ''यह अफसोसजनक है कि आपने (नीलम गोरे) आधारहीन आरोप लगाने और प्रमुख उद्धव बालासाहेब ठाकरे के साथ-साथ तत्कालीन अविभाजित शिवसेना को बदनाम करने के लिए साहित्यिक मंच को चुना है.''
नोटिस में यह भी लिखा गया है कि अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन के आयोजकों ने भी सार्वजनिक रूप से नीलम गोरे के बयान पर अपनी नाराजगी व्यक्त की थी. उन्होंने कहा था कि 'हम किसी को भी ऐसे बयान देने से नहीं रोक सकते लेकिन हम उनसे साहित्यिक सम्मेलनों का सम्मान करने की उम्मीद करते हैं. यह स्थान ऐसे आरोप लगाने के लिए नहीं था.'
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Source: IOCL






















