BJP नेता रविंद्र चव्हाण का उद्धव ठाकरे पर हमला, 'कांग्रेस की गोद में बैठकर मराठी अस्मिता का ढोल...'
Maharashtra Municipal Election: बीजेपी नेता रविंद्र चव्हाण ने कहा कि कांग्रेस के समर्थन से उद्धव ठाकरे ने सरकार बनाकर 105 शहीदों का अपमान किया. चुनाव आते ही ठाकरे को मराठी मानुस की याद आती है.

महाराष्ट्र में महानगरपालिका चुनाव को लेकर प्रचार के आखिरी दिन बीजेपी के प्रदेश रविंद्र चव्हाण उद्धव ठाकरे पर जमकर बरसे. उन्होंने कहा कि संयुक्त महाराष्ट्र के लिए 105 शहीदों ने जो खून बहाया, उस आंदोलन पर गोलियां चलाने का पाप कांग्रेस का है और यह इतिहास में दर्ज एक अटल सत्य है. सत्तर साल पहले, 16 जनवरी 1956 को पंडित नेहरू ने मुंबई को केंद्रशासित करने की घोषणा की थी.
उसी घटना से प्रेरित होकर बालासाहेब ठाकरे ने 'मराठी मानुस के न्यायसंगत अधिकारों' के लिए शिवसेना की स्थापना की, यह भी एक निर्विवाद सत्य है. मराठी मानुस के नाम पर राजनीति करने वालों को पहले इतिहास में झांकना चाहिए.
रविंद्र चव्हाण ने तंज कसते हुए, ''यूबीटी गुट के नेता जानबूझकर यह तथ्य भूल जाते हैं कि संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलनकारियों पर गोलीबारी करने वाले उस समय प्रदेश में भी कांग्रेस के मुख्यमंत्री थे और केंद्र में भी कांग्रेस की ही सरकार थी. आज कांग्रेस की गोद में बैठकर मराठी अस्मिता का ढोल पीटना, कांग्रेस की बंदूक अपने कंधे पर रखकर चलाने जैसा है.'' चव्हाण मुंबई में महापालिका चुनाव प्रचार के समापन के अवसर पर पत्रकारों से बात कर रहे थे.
उद्धव ठाकरे ने 105 शहीदों का किया अपमान- रविंद्र चव्हाण
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष ने आगे कहा, ''कांग्रेस के समर्थन से उद्धव ठाकरे ने अपनी सरकार बनाकर 105 शहीदों का अपमान किया. सिर्फ अपनी राजनीतिक दुकान चलाने के लिए कांग्रेस से हाथ मिलाते समय उद्धव ठाकरे को मराठी अस्मिता का सुविधाजनक विस्मरण हो गया. यह महाराष्ट्र की जनता ने देखा है.''
कोंकण के लिए कांग्रेस ने कुछ नहीं किया- रविंद्र चव्हाण
उन्होंने ये भी कहा कि 1990 के दशक में कोंकण में रेलवे आई, लेकिन उस समय कांग्रेस सत्ता में नहीं थी. मधु दंडवते और जॉर्ज फर्नांडिस जैसे दूरदर्शी नेताओं के प्रयासों से कोंकण रेलवे शुरू हुई. 2014 के बाद कोंकण रेलवे के कई स्टेशनों और आसपास के इलाकों का कायाकल्प हुआ, वे आधुनिक और सुसज्जित बने. यह सब बीजेपी सरकार के कार्यकाल में हुआ. कांग्रेस के सत्ता में रहते हुए कोंकण के लिए कुछ नहीं किया गया, लेकिन उन्हीं कोंकणी लोगों के समर्थन से उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस की बैसाखियों के सहारे मुख्यमंत्री पद हासिल किया.
यूबीटी और मनसे मराठी हितैषी कैसे- रविंद्र चव्हाण
रविंद्र चव्हाण ने सवाल उठाया, ''उबाठा सेना और मनसे बाकी दलों से ज्यादा मराठी के हितैषी कैसे हो गए? क्या किसी ने इसका ईमानदारी से उत्तर खोजने का प्रयास किया है? यहां जन्मा कोई अमराठी भाषी सिर्फ इसलिए बीजेपी में नहीं आता कि वह अमराठी है, बल्कि अन्य दलों में नेतृत्व, विचारधारा और भविष्य सीमित हैं, इसलिए वह बीजेपी में आता है, यह वास्तविकता है.
उन्होंने कहा कि बीजेपी ने मराठी भाषा, मराठी संस्कृति और मराठी मानुस के लिए ठोस काम किया है. मराठी भाषा को अभिजात भाषा का दर्जा दिलाने के लिए देवेंद्र फडणवीस और बीजेपी नेताओं ने लगातार केंद्र सरकार के स्तर पर प्रयास किए. मेरी ‘माय मराठी’ को अभिजात भाषा का दर्जा मिला, यह फडणवीस जी के लगातार प्रयासों का ही परिणाम है, इसे स्वीकार करना होगा.
'चुनाव आते ही उद्धव ठाकरे को मराठी मानुस की याद'
रविंद्र चव्हाण ने एक सवाल के जवाब में स्पष्ट किया कि मुंबई की BDD चाली में रहने वाले मराठी भाइयों को उनका हक का घर केवल देवेंद्र फडणवीस की सरकार की पहल से ही मिल सका है. उन्होंने कहा, ''चुनाव आते ही ठाकरे साहब को मराठी मानुस याद आता है. वरना पांच साल तक वे ‘मराठी’ शब्द भी भूल जाते हैं. महानगरपालिका के ठेके देते समय उद्धव ठाकरे को परप्रांतीय ठेकेदार ही चाहिए होते हैं, लेकिन पिछले 30 सालों में उन्होंने मुंबई के मराठी मानुस के लिए वास्तव में क्या किया, यह सार्वजनिक रूप से बताने का साहस करें.''
बीजेपी के मराठी संस्कृति में योगदान पर बोलते हुए रविंद्र चव्हाण ने कहा कि आज पूरे देश में जिस गुड़ी पाड़वा की भव्य हिंदू नववर्ष शोभायात्रा का गौरव से उल्लेख होता है, वह डोंबिवली के संघ–बीजेपी कार्यकर्ताओं की ही संकल्पना है, जो आज पूरे महाराष्ट्र के लिए प्रेरणादायी बन चुकी है.
उन्होंने आगे कहा, “तुम यानी मराठी मानुस नहीं और तुम यानी मुंबई नहीं”, यह बात देवेंद्रजी बार-बार कहते हैं, लेकिन इस सत्य को स्वीकार करने की मानसिकता और वैचारिक तैयारी उबाठा नेताओं में नहीं है, यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बात है. “मी मराठी” की पहचान को बदलकर “मी मुंबईकर” की संकल्पना मुंबई के मराठी मानुस पर किसने थोपी?''
मुंबई की मराठी पहचान मिटाने का पाप उद्धव ठाकरे ने किया- चव्हाण
उन्होंने ये भी कहा कि मुंबई की मराठी पहचान मिटाने का पाप 'मी मुंबईकर' अभियान के जरिए खुद उद्धव ठाकरे ने किया. क्या ये बदलाव बालासाहेब ठाकरे जी को स्वीकार्य थे? इसका ईमानदार उत्तर भी उद्धव ठाकरे को देना चाहिए. मराठी मानुस का सम्मान, भाषा, संस्कृति और भविष्य, इन सब पर केवल भावनाओं के बुलबुले खड़े करने के बजाय, घोषणाओं से अधिक महत्वपूर्ण होता है कि वास्तव में क्या काम किया गया है और यह काम केवल बीजेपी ने करके दिखाया है. यह सूरज की रोशनी जितना साफ है.
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Source: IOCL
























