Janmashtami 2025: पुणे में DJ मुक्त दही हांडी का उत्सव, उमड़ा जन सैलाब, 'गोविंदा आला रे' की रही गूंज
Dahi handi festival: पुणे के लाल महाल चौक पर इस बार जन्माष्टमी का उत्सव डीजे-मुक्त दहीहंडी के रूप में मनाया गया. ढोल-ताशों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज से पूरा चौक गूंज उठा.

जन्माष्टमी का पर्व इस बार पुणेकरों के लिए बेहद खास रहा. ऐतिहासिक लाल महाल चौक पर ऐसा नजारा देखने को मिला, जब हजारों लोग एक साथ उमड़े और पूरा चौक जनसागर में तब्दील हो गया. खास बात यह रही कि इस बार दहीहंडी डीजे-मुक्त उत्सव के रूप में मनाई गई, जहां ढोल-ताशों की थाप और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज ने पूरे माहौल को भक्ति और उल्लास से भर दिया.
पहली बार डीजे-मुक्त दही हंडी का आयोजन
शहर के 26 सार्वजनिक मंडलों की भागीदारी और पुनीत बालन ग्रुप के समन्वय से इस भव्य आयोजन को अंजाम दिया गया. आयोजक पुनीत बालन ने कहा, “यह राज्य की पहली डीजे-मुक्त दहीहंडी है. पुणेकरों ने इसे जिस उत्साह से स्वीकार किया, उसके लिए मैं आभारी हूँ. इस पहल से न केवल ध्वनि प्रदूषण कम हुआ बल्कि पारंपरिक वाद्य बजाने वाले कलाकारों को भी रोजगार का अवसर मिला.”
मानव पिरामिड के साथ गूंजे “गोविंदा आला रे”
जब देर रात राधेकृष्ण ग्रुप ने सात थर की मानवी पिरामिड बनाकर हंडी फोड़ी, तो पूरा चौक “गोविंदा आला रे” के नारों से गूंज उठा. माहौल इतना ऊर्जावान था कि हर कोई इस ऐतिहासिक क्षण का हिस्सा बनने को बेताब दिखा.
ढोल-ताशों की धुनों ने बांधा समां
उत्सव की शुरुआत प्रभात बैंड की धुनों से हुई. इसके बाद समर्थ पथक, रमणबाग, शिवमुद्रा और युवा वाद्य पथक ने ढोल-ताशों की जोरदार प्रस्तुति देकर माहौल को और भी जीवंत बना दिया. मुंबई से आए वरळी बिट्स और उज्जैन से आए शिव महाकाल पथक ने अपनी अद्भुत ताल से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया.
सितारों की मौजूदगी से बढ़ी रौनक
इस मौके पर अभिनेता-निर्देशक प्रविण तरडे, अभिनेता हार्दिक जोशी और मराठी बिग बॉस फेम ईरिना भी मौजूद रहे. उनकी मौजूदगी से उत्सव की रौनक और बढ़ गई.
वहीं, वंदे मातरम संघ, नटराज संघ, म्हसोबा संघ, भोईराज संघ, गणेश मित्र मंडल, गणेश महिला गोविंदा पथक, इंद्रेश्वर संघ (इंदापुर) और शिवकन्या गोविंदा पथक (चेंबुर-मुंबई) समेत कई मंडलों ने पारंपरिक अंदाज में भाग लेकर आयोजन को और भव्य बना दिया.
स्थानीय कलाकारों को हुआ सम्मान
यह दहीहंडी केवल धार्मिक आयोजन नहीं रही, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश देने का माध्यम भी बनी. आयोजकों का मानना है कि डीजे की जगह पारंपरिक वाद्ययंत्रों के उपयोग से न केवल ध्वनि प्रदूषण कम हुआ, बल्कि स्थानीय कलाकारों को भी रोजगार और सम्मान मिला.
पुनीत बालन ग्रुप और 26 मंडलों की इस संयुक्त पहल ने दहीहंडी उत्सव को नया आयाम दिया. लाल महाल चौक पर उमड़े जनसागर ने साबित कर दिया कि परंपराओं और सांस्कृतिक धुनों के साथ भी त्योहार उतने ही जोश और उमंग से मनाए जा सकते हैं जितना आधुनिक ध्वनियों के साथ.
मुंबई में दो हादसे, 95 घायल
जहां पुणे का आयोजन सुरक्षित और अनुशासित तरीके से संपन्न हुआ, वहीं मुंबई से दुखद खबरें भी आईं. दहीहंडी उत्सव के दौरान दो गोविंदाओं की मौत हो गई. घाटकोपर में 14 साल के रोहन मालवी की मृत्यु हो गई, जबकि मानखुर्द में 32 वर्षीय जगमोहन चौधरी दहीहंडी बांधते समय गिर गए.
जन्माष्टमी के मौके पर पूरे महाराष्ट्र में दहीहंडी उत्सव मनाया गया. रात 9 बजे तक उत्सव के दौरान कुल 95 लोग घायल हुए, जिनमें से दो की हालत गंभीर बताई जा रही है. राहत की बात यह रही कि 95 ‘गोविंदा’ में से 76 को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी मिल गई, जबकि 19 अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं.
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Source: IOCL























