'अखंड हिंदू राष्ट्र कोई दान नहीं देगा, हमें लड़कर...', उद्धव ठाकरे के सामना ने 'सीजफायर' को लेकर कह दी बड़ी बात
Uddhav Thackeray News: सामना के संपादकीय में कहा गया है कि पीएम मोदी की सरकार ने 'सीजफायर' को स्वीकार करने की गलती उस समय की, जब भारतीय सेना पीओके को वापस करने की मुहिम के करीब थी.

Uddhav Thackeray News today: जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादी हमले के खिलाफ भारतीय सेना ने 7 मई को 'ऑपरेशन सिंदूर' की शुरुआत की थी. पहले दिन भारतीय सेना ने पाकिस्तान नौ आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिए थे. इसके बाद 7 से 9 मई तक दोनों देशों की सेनाओं के बीच जमकर गोलीबारी और हवाई हमले का दौर चला. 10 मई को सीजफायर का दोनों देशों ने ऐलान कर दिया, लेनिक अब इसके नफा-नुकसान को लेकर बहस देश और दुनिया में जारी है.
इस बीच शिवसेना यूबीटी का अखबार सामना ने संपादकीय में उद्धव ठाकरे ने पीएम नरेंद्र मोदी पर 'युद्धविराम' को लेकर निशाना साधा है. सामना ने अपने संपादकीय में साफ शब्दों में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार ने 'सीजफायर' को स्वीकार कर वीर सावरकर के 'अखंड हिदुस्तान' के सपने को साकार करने का अवसर खो दिया. इसके साथ ही गोडसे की अस्थियों को विसर्जित करने का भी अवसर गंवा दिया.
मोदी की सरकार ने ऐसी गड़बड़ी क्यों की?
ऐसा इसलिए कि नाथूराम गोडसे की वसीयत में कहा गया है कि उनकी अस्थियों का विसर्जन तभी किया जाना चाहिए जब 'अखंड भारत' का लक्ष्य पूरा हो जाए, लेकिन मोदी सरकार की एक भूल की वजह से 'अखंड भारत' का सपना फिलहाल टूट गया. पीएम मोदी की सरकार ने ऐसी गड़बड़ी क्यों की, इसका जवाब अभी तक नहीं मिला है. फिलहाल, यह एक रहस्य बना हुआ है.
कोई दान में नहीं देगा 'अखंड भारत'
मोदी सरकार ने यह भूल उस समय की है जब पाक अधिकृत कश्मीर को वापस हासिल करने के लिए भारतीय सेनाओं ने वीर सावरकर को श्रद्धांजलि देने की तैयारी शुरू कर दी थी। मोदी और उनके समर्थकों को कौन बताए कि 'अखंड हिंदू राष्ट्र' उन्हें कोई दान में नहीं देगा. उसे लड़कर ही हासिल किया जा सकता है.
दरअसल, वीर सावरकर और नाथूराम गोडसे अखंड भारत के पुरोधा थे. प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह, महाराष्ट्र के शिंदे जैसे लोग खुद को सावरकर के अखंड हिन्दुस्तान का समर्थक बताते हैं, लेकिन जब सावरकर और गोडसे का अखंड विचार मूर्त रुप ले रहा था, ठीक उसी समय युद्धविराम स्वीकार कर बीजेपी की सरकार ने अपने ही सपनों पर पानी फेर दिया. अगर चार दिन और युद्ध जारी रहता तो कश्मीर, लाहौर और कराची को भारत में मिलाया जा सकता था, लेकिन वैसा कुछ नहीं हुआ.
पाकिस्तान 'पीओके' वापस करे तो होगी बात
अब पीएम मोदी के भक्त अपनी खीझ मिटाने के लिए यह बोल रहे हैं कि पीएम ने पाकिस्तान से 'पीओके' वापस करने की मांग की है. साथ ही ये भी कहा जा रहा है कि भारत पाकिस्तान के बीच बातचीत तभी संभव है, जब वो 'पीओके' हमें सौंप दे.
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL






















