अभिजीत दीपके की मनोज जरांगे से अपील, खत्म करें अनशन, कहा- 'महाराष्ट्र को...'
अभिजीत दीपके का कहना है कि अगर सरकार ने शिक्षा और रोजगार की ओर ध्यान दिया होता तो आज मनोज जरांगे को अनशन नहीं करना पड़ता. महाराष्ट्र को मनोज जरांगे की जरूरत है.

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे से मुलाकात की. मराठा आरक्षण की मांग कर रहे मनोज जरांगे का आज (शुक्रवार, 11 सितंबर) को अनशन का 14वां दिन है. इस दौरान अभिजीत दीपके अंतरवाली सराटी पहुंचे और मनोज जरांगे के स्टेज पर जाकर उनसे बातचीत की और उनका हाल जाना.
अभिजीत दीपके ने अपने एक्स हैंडल पर फोटो शेयर कर बताया कि उन्होंने मनोज जरांगे से अपील की है कि अपना अनशन खत्म कर दें और अपनी सेहत पर ध्यान दें. महाराष्ट्र को उनकी जरूरत है.
गेल्या १४ दिवसांपासून उपोषणावर असलेल्या मनोज जरांगे पाटील साहेबांची आज भेट घेतली आणि त्यांच्या प्रकृतीची विचारपूस केली.
— Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) September 11, 2026
महाराष्ट्राला त्यांची गरज आहे. त्यामुळे त्यांनी उपोषण मागे घेऊन आपल्या प्रकृतीची काळजी घ्यावी, अशी मनापासून विनंती केली.
जर सरकारने ग्रामीण भागातील तरुणांना… pic.twitter.com/6DPRouDRcr
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'मनोज जरांगे को अनशन नहीं करना पड़ता'
इतना ही नहीं, महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार पर हमला बोलते हुए अभिजीत दीपके ने कहा कि आज अगर सरकार ने बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा और युवाओं के लिए बेहतर रोजगार योजनाओं पर काम किया होता तो मनोज जरांगे को भूख हड़ताल करने की जरूरत नहीं पड़ती. सीजेपी संस्थापक का कहना है कि मनोज जरांगे का अनशन यह साबित करता है कि जनता को अब सरकार पर भरोसा नहीं रह गया है.
जालना डीएम ने भी मनोज जरांगे से की थी अपील
इससे पहले गुरुवार, 10 सितंबर को अंतरवाली सराटी गांव में स्कूली छात्राओं को हो रही परेशानी का हवाला देते हुए जालना की जिलाधिकारी ने भी मनोज जरांगे से अनशन समाप्त करने का आग्रह किया था. वहीं, जरांगे ने कहा था कि उनका प्रस्तावित मुंबई मार्च निश्चित रूप से होगा. उन्होंने अपने समर्थकों से 12 सितंबर को धरनास्थल पर इकट्ठा होने को कहा है, जिसके बाद मुंबई कूच की तारीख घोषित की जाएगी.
'छात्राओं ने स्कूल जाना बंद कर दिया है'- डीएम
जिलाधिकारी आशिमा मित्तल का कहना है कि मनोज जरांगे की भूख हड़ताल समाप्त कराना प्रशासन का कर्तव्य है. इसलिए भी क्योंकि आंदोलन और गांव में भीड़ जुटने से सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है. विरोध स्थल पर बड़ी संख्या में भीड़ जुटने के कारण अंतरवाली सराटी में छात्राओं ने स्कूल जाना बंद कर दिया है.
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