Jharkhand: झारखंड के पूर्व CM चंपाई सोरेन हाउस अरेस्ट, सोशल मीडिया पर पोस्ट खुद किया बड़ा दावा
Jharkhand News: झारखंड के पूर्व सीएम चंपाई सोरेन को नगड़ी में किसानों की जमीन बचाने के कार्यक्रम में शामिल होने से पहले हाउस अरेस्ट कर लिया गया. उन्होंने इसे सरकार की दमनकारी कार्रवाई बताया.

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता चंपाई सोरेन को रविवार (24 अगस्त) की सुबह हाउस अरेस्ट कर लिया गया है. ये जानकारी उन्होंने खुद सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर के दी है.
उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम उन्हें नगड़ी के आदिवासी और मूलवासी किसानों की आवाज उठाने से रोकने के लिए उठाया गया है. चंपाई सोरेन आज वहां किसानों की जमीन बचाने के लिए आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने वाले थे.
चंपाई सोरेन का आरोप
सोरेन ने सोशल मीडिया पर लिखा, “नगड़ी के आदिवासी/मूलवासी किसानों की आवाज उठाने से रोकने के लिए झारखंड सरकार ने आज सुबह से मुझे हाउस अरेस्ट कर लिया है.” उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई सरकार की दमनकारी नीति का हिस्सा है.
नगड़ी के आदिवासी/ मूलवासी किसानों की आवाज उठाने से रोकने के लिए झारखंड सरकार ने आज सुबह से मुझे हाउस अरेस्ट कर लिया है।
— Champai Soren (@ChampaiSoren) August 24, 2025
बीजेपी ने भी बोला हमला
राज्य की बीजेपी इकाई ने भी सरकार को घेरा है. पार्टी ने पोस्ट किया, “झारखंड के आदिवासी एवं मूलवासियों की खेतिहर जमीन की सुरक्षा हेतु आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने पर भी इस ठगबंधन सरकार ने पाबंदी लगाई. यह सीधा-सीधा तानाशाही है और दमनकारी मानसिकता को दर्शाता है.”
झारखंड के आदिवासी एवं मूलवासियों की खेतिहर जमीन की सुरक्षा हेतु आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने जाने पर भी इस ठगबंधन सरकार ने पाबंदी लगाकर पूर्व मुख्यमंत्री श्री @ChampaiSoren जी को सुबह से ही हाउस अरेस्ट करना सीधा-सीधा तानाशाही है और राज्य सरकार की दमनकारी मानसिकता को दर्शाती है। pic.twitter.com/XFnw7oscJL
— BJP JHARKHAND (@BJP4Jharkhand) August 24, 2025
किसानों की जमीन पर विवाद
सोरेन ने शनिवार (23 अगस्त) को घोषणा की थी कि वे 24 अगस्त को नगड़ी जाएंगे और किसानों की उपजाऊ जमीन बचाने की लड़ाई लड़ेंगे. उन्होंने कहा था कि अस्पताल का विरोध नहीं है, बल्कि रिम्स-2 के लिए स्मार्ट सिटी या अन्य बंजर जमीन का उपयोग हो सकता है.
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का पैटर्न साफ है-आदिवासी समाज की आवाज उठाने वालों को फर्जी मामलों या एनकाउंटर के जरिए दबाने की कोशिश की जा रही है.























