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Jharkhand: 29 साल से चल रहे आंदोलन को मिली जीत, नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज को नहीं मिलेगा एक्सटेंशन

Ranchi News: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज' के नोटिफिकेशन को अवधि विस्तार देने का प्रस्ताव खारिज कर दिया है.

Jharkhand Netarhat Firing Range: 'जान देंगे, पर जमीन नहीं देंगे!' इस नारे के साथ पिछले 29 वर्षों से चले आ रहे झारखंड (Jharkhand) के हजारों ग्रामीणों के एक आंदोलन को आखिरकार जीत हासिल हो गई है. ये आंदोलन झारखंड की प्रसिद्ध नेतरहाट पहाड़ी के पास 245 गांवों की जमीन को सेना की फायरिंग प्रैक्टिस के लिए नोटिफाई किए जाने के विरोध में चल रहा था. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज' के नोटिफिकेशन को अवधि विस्तार देने का प्रस्ताव खारिज कर दिया है.

1964 में पहली बार किया गया था नोटिफाई
पहली बार वर्ष 1964 में इस इलाके को फील्ड फायरिंग रेंज' के तौर पर नोटिफाई किया गया था, जिसे अब तक लगातार विस्तार मिल रहा था. इसके पहले आखिरी बार वर्ष 1999 में तत्कालीन बिहार सरकार ने इस फील्ड फायरिंग रेंज को वर्ष 2022 तक के लिए विस्तार देने की अधिसूचना जारी की थी.

ग्रामीणों ने राज्यपाल को सौंपा था ज्ञापन
सेना को फायरिंग प्रैक्टिस के लिए नेतरहाट के आसपास के गांवों की जमीन देने के विरोध में ग्रामीणों का आंदोलन 1993 से संगठित तौर पर चला आ रहा था. बीते 24-25 अप्रैल को सैकड़ों ग्रामीणों का जत्था फायरिंग रेंज की अधिसूचना को रद्द करने की मांग को लेकर नेतरहाट के टुटवापानी से पदयात्रा करते हुए रांची पहुंचा था. उन्होंने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर मांग की थी कि 2022 में समाप्त हो रही फील्ड फायरिंग रेंज की मियाद को विस्तार नहीं दिया जाए. लातेहार जिले के 39 राजस्व ग्राम के ग्रामीणों ने आमसभा में इसी मांग को लेकर प्रस्ताव पारित किया और इसकी प्रति भी राज्यपाल को सौंपी गई थी.

समझें पूरी बात 
झारखंड के ग्रामीणों के इस ऐतिहासिक संघर्ष और नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज का पूरा मसला समझने के लिए थोड़ा पीछे चलना होगा. वर्ष था 1954 और तब झारखंड एकीकृत बिहार का हिस्सा था. 1954 में केंद्र सरकार ने ब्रिटिश काल से चले आ रहे कानून 'मैनुवर्स फील्ड फायरिंग एंड आर्टिलरी प्रैटिक्स एक्ट, 1938' की धारा 9 के तहत नेतरहाट पठार के सात गांवों को तोपाभ्यास (तोप से गोले दागने का अभ्यास) के लिए नोटिफाई किया था. इसके बाद वर्ष 1992 में फायरिंग रेंज का दायरा बढ़ा दिया गया और इसके अंतर्गत 7 गांवों से बढ़ाकर 245 गांवों की कुल 1471 वर्ग किलोमीटर इलाके को शामिल कर दिया गया. इस बार इलाके को वर्ष 2002 तक के लिए फायरिंग रेंज घोषित किया गया था.

ग्रामीणों के हुआ नुकसान 
सेना की टुकड़ियां वर्ष 1964 से 1994 तक यहां हर साल फायरिंग और तोप दागने की प्रैक्टिस के लिए आती रहीं. ग्रामीणों का आरोप है कि फायरिंग और तोप दागने के दौरान उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ा. आंदोलन की अगुवाई करने वाले जेरोम जेराल्ड कुजूर ने ग्रामीणों को हुए नुकसान को लेकर एक दस्तावेज तैयार कर रखा है. वो कहते हैं, "सेना के अभ्यास के दौरान 30 ग्रामीणों को जान गंवानी पड़ी. कई महिलाओं के साथ रेप की घटनाएं घटीं, इनमें से 2 महिलाओं को जान गंवानी पड़ी. 3 लोग पूरी तरह अपंग हो गए. अनगिनत वन्य प्राणियों और मवेशियों की मौत हो गई. फसलों को भारी नुकसान हुआ, इलाके का वातावरण बारूदी गंध से विषाक्त हो गया."

पूरे देश तक पहुंची आंदोलन की गूंज 
ऐसी घटनाओं को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश संगठित रूप से पहली बार तब फूटा, जब वर्ष 1994 में यहां सेना की टुकड़ियां तोप और बख्तरबंद गाड़ियों के साथ फायरिंग अभ्यास के लिए पहुंचीं. 22 मार्च 1994 को हजारों ग्रामीण सेना की गाड़ियों के आगे लेट गए. आंदोलन की अगुवाई महिलाएं कर रही थीं. विरोध इतना जबर्दस्त था कि इसकी गूंज पूरे देश में पहुंची और आखिरकार सेना की गाड़ियों को वापस लौटना पड़ा. तभी से ये आंदोलन लगातार चल रहा था. फायरिंग रेंज के नोटिफिकेशन को रद्द करने की मांग को लेकर तब से सैकड़ों दफा सभा, जुलूस, प्रदर्शन हुए. आंदोलनकारी हर साल 22-23 मार्च को विरोध और संकल्प दिवस मनाते रहे. हजारों लोग नेतरहाट के टुटवापानी नाम की जगह पर इकट्ठा होते रहे हैं. बीते 22 मार्च को आंदोलन की 28वीं वर्षगांठ पर हुई सभा में किसान आंदोलन के नेता राकेश टिकैत भी शामिल हुए थे.

11 मई 2022 को समाप्त हुई नोटिफिकेशन की अवधि
1994 से लगातार जारी आंदोलन के बीच वर्ष 1999 में नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज को लेकर सरकार ने एक नया नोटिफिकेशन जारी किया और इसकी अवधि 11 मई 2022 तक के लिए बढ़ा दी थी. हालांकि 1994 में ग्रामीणों के जोरदार आंदोलन के बाद से सेना ने यहां फायरिंग प्रैक्टिस नहीं की थी, लेकिन लोग इस बात को लेकर हमेशा आशंकित रहे कि फायरिंग रेंज का नोटिफिकेशन एक बार फिर बढ़ाया जा सकता है. नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज के नोटिफिकेशन की अवधि 11 मई 2022 को समाप्त हो गई थी, लेकिन इस संबंध में सरकार की ओर से अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं की गई थी. 17 अगस्त की शाम झारखंड सरकार ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज को पुन: अधिसूचित (नोटिफाई) करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है.

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