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US ट्रेड डील से कश्मीरी सेब पर संकट? CM उमर अब्दुल्ला ने जताई चिंता, PM मोदी से की बड़ी मांग

India-US Trade Deal: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से अमेरिकी सेब पर इंपोर्ट ड्यूटी में छूट के चलते कश्मीर और हिमाचल के सेब उत्पादक चिंतित हैं. उन्हें डर है कि अमेरिकी सेब घरेलू बाजार पर कब्जा कर लेंगे.

भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए व्यापार समझौते (Trade Agreement) और अमेरिकी सेब पर इंपोर्ट ड्यूटी में छूट की खबरों ने कश्मीर घाटी से लेकर हिमाचल तक हड़कंप मचा दिया है. जम्मू-कश्मीर के सेब उत्पादकों और व्यापारियों ने आशंका जताई है कि सस्ते अमेरिकी सेबों की आमद से प्रदेश की 7,000 करोड़ रुपये की हॉर्टिकल्चर इंडस्ट्री बर्बाद हो सकती है. इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी सख्त रुख अपनाया है, वहीं उत्पादकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है.

कश्मीर वैली फ्रूट ग्रोअर्स कम डीलर्स यूनियन, जो घाटी के सभी फल उत्पादक संघों की प्रमुख संस्था है, ने प्रधानमंत्री से गुहार लगाई है. यूनियन के चेयरमैन बशीर अहमद ने पीएम को लिखे पत्र में कहा, "हम आपसे अनुरोध करते हैं कि घरेलू हॉर्टिकल्चर इंडस्ट्री को बचाने के लिए अमेरिकी और यूरोपीय सेबों पर 100% से अधिक इंपोर्ट ड्यूटी लगाने पर विचार करें."

उत्पादकों का तर्क है कि अगर अमेरिकी सेब कश्मीरी सेब से सस्ते बिकने लगे, तो वे बाजार पर कब्जा कर लेंगे और स्थानीय किसानों की रोजी-रोटी खतरे में पड़ जाएगी.

CM उमर अब्दुल्ला: 'हमें सिर्फ नुकसान होगा' 

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रस्तावित ट्रेड डील पर गंभीर सवाल उठाए हैं. जम्मू में विधानसभा के बाहर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिकी उत्पादों को ड्यूटी-फ्री (शुल्क मुक्त) आने की अनुमति देने से जम्मू-कश्मीर की पारंपरिक अर्थव्यवस्था खत्म हो जाएगी.

सीएम उमर ने कहा, "हमारी कोई मरीन (समुद्री) इंडस्ट्री नहीं है. हम ड्राई फ्रूट्स, बादाम, केसर, सेब और कीवी जैसी फसलों पर निर्भर हैं. अगर ये सभी प्रोडक्ट्स अमेरिका से बिना टैक्स के आते हैं, तो जम्मू-कश्मीर को पक्का नुकसान होगा. मैं अपने लोगों की तरफ से बोल रहा हूं—हमें इस डील से कोई फायदा नहीं, सिर्फ नुकसान होगा."

व्यापारियों की चिंता: अर्थव्यवस्था की रीढ़ टूट जाएगी 

कश्मीर चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष तारिक गनी ने कहा कि सेब उत्पादक जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं. उन्होंने कहा, "अगर इंपोर्टेड सेब घरेलू सेब से सस्ते हो गए, तो यह कश्मीर के लिए विनाशकारी होगा. इसका सीधा असर हमारी जीडीपी और रोजगार पर पड़ेगा."

सरकार का पक्ष: 'घरेलू किसान सुरक्षित हैं'

दूसरी ओर, केंद्र सरकार के सूत्रों का कहना है कि सेब के बाजार को पूरी तरह नहीं खोला गया है. घरेलू उत्पादकों को कोटा, मिनिमम इंपोर्ट प्राइस (MIP) और ड्यूटी के जरिए सुरक्षा दी गई है. सरकार का तर्क है कि अमेरिका को दिया गया कोटा मौजूदा इंपोर्ट लेवल से कम है, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा.

आंकड़ों में सेब का गणित

भारत का स्थान: दुनिया का 7वां सबसे बड़ा सेब उत्पादक.

कुल मांग: भारत में सालाना लगभग 2.5 मिलियन मीट्रिक टन सेब की खपत है.

घरेलू उत्पादन: देश में हर साल 2.0 से 2.1 मिलियन मीट्रिक टन सेब पैदा होता है.

कश्मीर की हिस्सेदारी: देश के कुल सेब उत्पादन का 80% हिस्सा अकेले जम्मू-कश्मीर से आता है, बाकी हिमाचल और उत्तराखंड से.

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