पार्सल वैन से कश्मीर पहुंचे 23 विदेशी नस्ल के कीमती सांड, पशुधन परिवहन में रेलवे की उपलब्धि
भारतीय रेलवे ने कश्मीर घाटी के लिए माल ढुलाई में क्रांति ला दी है. पहली बार, 'ब्रीडिंग डेवलपमेंट प्रोग्राम' के तहत 23 विदेशी नस्ल के सांडों को पार्सल वैन से सुरक्षित कश्मीर पहुंचाया गया.

कश्मीर घाटी के संपर्क रेल मार्ग से जुड़ने के बाद भारतीय रेलवे ने माल ढुलाई के क्षेत्र में एक नई क्रांति का सूत्रपात किया है. इतिहास में पहली बार, 'ब्रीडिंग डेवलपमेंट प्रोग्राम' (प्रजनन विकास योजना) के तहत बेंगलुरु से 23 विदेशी नस्ल के कीमती सांडों को पार्सल वैन के माध्यम से सुरक्षित कश्मीर पहुंचाया गया है. सुरक्षित और सस्ता विकल्प अब तक मालगाड़ियों का उपयोग मुख्य रूप से ऑटोमोबाइल, स्टील और अनाज के लिए होता था, लेकिन उत्तर रेलवे के जम्मू मंडल ने पशुधन परिवहन की दिशा में यह बड़ी उपलब्धि हासिल की है.
इन 23 सांडों में से 06 को बारी ब्राह्मणा गुड्स शेड और शेष 17 को बडगाम रेलवे स्टेशन पर उतारा गया. लंबी दूरी की इस यात्रा के दौरान पशुओं की सुरक्षा के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BSI) के कड़े मापदंडों और विशेष चेंबरों का उपयोग किया गया, ताकि उन्हें कोई शारीरिक क्षति या तनाव न हो.
डेयरी अर्थव्यवस्था में आएगी 'श्वेत क्रांति'
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक (जम्मू) उचित सिंघल ने बताया कि इन उच्च गुणवत्ता वाले विदेशी सांडों के आगमन से स्थानीय नस्लों में सुधार होगा, जिससे दूध उत्पादन की क्षमता में भारी वृद्धि होगी. उन्होंने कहा, "रेलवे द्वारा परिवहन से सड़क मार्ग की तुलना में न केवल खर्च कम हुआ है, बल्कि प्रतिकूल मौसम में भी समय पर डिलीवरी सुनिश्चित हुई है. यह कश्मीर के डेयरी किसानों की आय बढ़ाने और क्षेत्र में श्वेत क्रांति लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है."
विकसित भारत की ओर बढ़ते कदम
उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) के जरिए इस सफल परिवहन ने यह सिद्ध कर दिया है कि कश्मीर अब राष्ट्रीय माल ढुलाई नेटवर्क से पूरी तरह जुड़ चुका है. यह पहल न केवल लॉजिस्टिक्स की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि 'विकसित भारत' और 'आत्मनिर्भर जम्मू-कश्मीर' के संकल्प को भी मजबूती प्रदान करती है. आने वाले समय में अन्य पशुधन और कृषि उत्पादों का व्यापार इस रेल मार्ग से और भी सुगम होने की उम्मीद है.
























