जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश से हालात खराब, अभी तक नहीं संभले हालात
Jammu Kashmir News: जम्मू-कश्मीर में बाढ़ से पुलवामा, बड़गाम और श्रीनगर के इलाके डूबे. 36 घंटे बाद भी पानी बढ़ रहा. मकान और खेत बर्बाद हो गए. मुख्यमंत्री ने लोगों को मदद देने का आश्वासन भी दिया.

जम्मू-कश्मीर में बारिश और बाढ़ के चलते आम लोग परेशान हैं और सरकार से मदद की उम्मीद और गुहार लगा रहे हैं. गुरुवार को पंपोर के चक-शालीना में जेहलम के तटबंध के टूट जाने के बाद पुलवामा, बड़गाम और श्रीनगर के कई इलाके बाढ़ के पानी में डूब गए. तटबंध के टूटने के ३६ घंटे बाद भी भारी मात्रा में पानी इन इलाकों में घुस रहा है.
बाढ़ के पानी में तीन जिलों के करीब ११२ गांव-देहात आ चुके हैं और यहां पर मकान, दुकान, फैक्ट्री और वेयरहाउस पानी के नीचे आ चुके हैं. अब प्रभावित लोग सिर्फ नुकसान का आंकलन कर सकते हैं. क्या गरीब और क्या अमीर सब बाढ़ के विनाश का शिकार हो चुके हैं.

पानी ने खेतों को बर्बाद कर दिया
वहीं, बाढ़ के पानी ने कटाई के लिए तैयार शाली के खेतों को बर्बाद कर दिया है आम लोगों के अनुसार, श्रीनगर के बाहरी इलाके में तटबंध के टूटने के कारण ५-६ हजार एकड़ पर खड़ी फसल बर्बाद हो चुकी है.
लोगों को सरकार से शिकायत यह है कि अगर इलाके को डूबने ही देना था, तो उन्हें फसल लगाने से पहले बता देना चाहिए था, ताकि उनकी मेहनत की फसल ऐसे बर्बाद न होती.सबसे बड़ी शिकायत यह है कि राजधानी श्रीनगर से महज १० किलोमीटर की दूरी पर भी चक-शाली के यह इलाके विकसित नहीं हो पाए हैं.

मुख्यमंत्री ने लोगों को मदद का आश्वासन दिया
इसका कारण सरकारी कागज में यह पूरा इलाका फ्लड चैनल, मतलब जेहलम के फ्लड एरिया के तौर पर आंकलन है, इसी लिए यहां निर्माण नहीं हो सकता. लेकिन सच यह है कि मकान, दुकान, कारोबारी अनुष्ठान और यहां तक कि सरकारी दफ्तर, हाईवे और रेलवे भी इसी जमीन के बीच से बनाए गए हैं.
विडंबना यह है कि जिस समय बाढ़ आई, तब जम्मू-कश्मीर सरकार का बिजली विभाग इलाके में स्मार्ट मीटर लगा रहा था. मुख्यमंत्री ने जब शुक्रवार को इलाके में आई बाढ़ के बाद दौरा किया, तो लोगों को मदद देने का आश्वासन भी दिया.

बाढ़ प्रभावित लोगों को हुए नुकसान के लिए रिलीफ पैकेज की मांग
केंद्रीय सरकार से कश्मीर के बाढ़ प्रभावित लोगों को हुए नुकसान के लिए रिलीफ पैकेज की मांग भी उठाई. लेकिन साथ-साथ पिछले ११ सालों में जेहलम फ्लड मिटिगेशन प्लान पर काम न होने का ठीकरा बिना नाम लिए पीडीपी-बीजेपी सरकार और उपराज्यपाल शासन पर डाल दी. लेकिन सच यह है कि सरकार की अनदेखी के बिना इतना बड़ा इलाका बस नहीं सकता था, और न ही इतना बड़ा नुकसान भी होता.
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Source: IOCL






















