हिमाचल प्रदेश में मौसम की बेरुखी बरकरार, सूखे के संकट ने बढ़ाई किसानों की चिंता
Himechal Weather News: शिमला में बारिश-बर्फबारी की भारी कमी है. 2025 की रिकॉर्ड बारिश के बाद अब तीन माह से सूखा है. मौसम विभाग ने जनवरी-मार्च 2026 तक कम बारिश का अनुमान लगाया है.

हिमाचल प्रदेश में मौसम की बेरुखी बरकरार है. मानसून सीजन में 2025 में अक्टूबर तक हुई रिकॉर्ड बारिश की तबाही के बाद इंद्रदेव ऐसे रूठे की हिमाचल में बरसना भूल गए. तीन माह से हिमाचल में सूखे जैसे हालात हैं. इस बीच मौसम विभाग ने जनवरी से मार्च 2026 के बीच सामान्य से कम बारिश की संभावना व्यक्त कर किसानों बागवानों की परेशानी बढ़ा दी है. लगातार प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे हिमाचल पर अब सूखे की मार पड़ रही है.
हिमाचल प्रदेश की आर्थिकी की रीढ़ माने जाने वाले पर्यटन, कृषि-बागवानी और जलविद्युत परियोजनाओं पर भी संकट के बादल मंडरा रहें हैं. कभी बर्फबारी के लिए मशहूर पहाड़ों पर सूखे ढलानों की तस्वीरें उभर रही है, तो कहीं सेब के बागानों और रबी सीजन में फसलों की चिंता किसानों-बागवानों की नींद उड़ा रही है.
नदियों और जलाशयों में कम होता जलस्तर विद्युत परियोजनाओं के उत्पादन पर विपरीत असर डाल रहा है. आपदाओं से उबरने की कोशिश कर रहे हिमाचल के लिए यह मौसमीय असंतुलन सिर्फ एक चेतावनी नहीं, बल्कि आने वाले समय की बड़ी चुनौती का संकेत है. जहां विकास, आजीविका और पर्यावरण तीनों एक साथ दांव पर लगे नजर आ रहे हैं.
जनवरी-मार्च के लिए डराने वाले पूर्वानुमान
डराने वाली बात ये है कि मौसम विभाग ने जनवरी से मार्च माह के दौरान हिमाचल के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से 55 से 65 फीसदी कम बारिश होने का अंदेशा ज़ाहिर किया है. दिसंबर माह में तो कम से कम हिल स्टेशन शिमला में बर्फ की पहली सफेदी देखने को मिलती थी, लेकिन लगातार चौथा साल है जब शिमला में दिसंबर में बर्फ नहीं गिरी. जनवरी भी आधा बीतने को है मौसम विभाग ने अभी तक मौसम में बड़े बदलाव की बात नहीं कही है. ऐसे में बारिश बर्फबारी की फिलहाल कम ही उम्मीद है.
शिमला में बर्फबारी के ट्रेंड में भारी गिरावट
आंकड़े बताते हैं कि शिमला में बर्फबारी का ट्रेंड पिछले तीन दशकों में तेजी से बदला है. वर्ष 1990 से 2000 के बीच औसतन 129 सेंटीमीटर बर्फ पड़ती थी, जो वर्ष 2010 से 2020 के दौरान घटकर लगभग 80 सेंटीमीटर रह गई, यानी करीब 37 फीसदी की गिरावट. वहीं 2022, 2023 और 2024 में दिसंबर पूरी तरह सूखा रहा और दिसंबर में आखिरी बार बर्फ 2021 में दर्ज की गई थी. क्रिसमस के दिन शिमला में बर्फबारी आखिरी बार 2016 में हुई थी. मौसम वैज्ञानिक इस बदलाव को तापमान में बढ़ोतरी और वर्षा के पैटर्न में आए बदलाव से जोड़ रहे हैं.
तापमान में बढ़ोतरी और शहरीकरण का अस
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के विज्ञानी संदीप शर्मा के अनुसार बीते एक सौ वर्षों में हिमाचल का औसत तापमान एक से डेढ़ डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है. इससे बर्फ के लिए अनुकूल हालात कम बन रहे हैं. वहीं, स्थानीय लोग और पर्यावरणविद अनियंत्रित शहरीकरण, पेड़ों की कटाई और बढ़ते वाहन प्रदूषण को भी इसकी बड़ी वजह मानते है.
जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियरों पर मंडराता खतरा
पर्यावरणविद डॉ एस अत्री का कहना है कि हरियाली के घटने और प्रदूषण बढ़ने का असर हिमाचल में भी हो रहा है. जलवायु परिवर्तन से लगातार ग्लेशियर पिघल रहे हैं. मौसम संतुलन बिगड़ा है और नियमित बर्फबारी अब दुर्लभ होती जा रही है.























