शिमला: जेल बंदियों के बनाए सामानों की प्रदर्शनी, पर्यटकों से मिली सराहना
Himachal Jail Reforms: हिमाचल प्रदेश सरकार ने "हर हाथ को काम" पहल के तहत शिमला में जेल बंदियों के कौशल प्रदर्शन और उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई है. इसका उद्देश्य कैदियों को आत्मनिर्भर बनाना है.

हिमाचल प्रदेश में जेल सुधार और पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए प्रदेश सरकार ने “हर हाथ को काम” पहल को नई दिशा दी है. इसी क्रम में शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थिएटर में जेल बंदियों के कौशल व उत्पादों की चार दिवसीय प्रदर्शनी और बिक्री का आयोजन किया गया है. इस कार्यक्रम का शुभारंभ राज्य के मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने किया.
मुख्य सचिव ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल सज़ा देना नहीं, बल्कि कैदियों को समाज की मुख्यधारा से फिर से जोड़ना और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है. उन्होंने बताया कि जेलों में बंद कैदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें लकड़ी की कारीगरी, बेकरी के उत्पाद, शॉल-टोपी निर्माण, सिलाई-कढ़ाई और अन्य हस्तशिल्प कौशल सिखाए जा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में एनडीपीएस मामलों में बड़ी संख्या में युवा जेलों में आ रहे हैं. ऐसे में उन्हें सही दिशा देना बेहद आवश्यक है. प्रशिक्षण के माध्यम से न केवल उनका तनाव कम होता है बल्कि वे जेल से बाहर निकलने के बाद सम्मानजनक जीवन भी जी सकते हैं.
बढ़ता तनाव, सुधार की चुनौती
प्रदेश की जेलों में इस समय लगभग 3,000 बंदी हैं, जिनमें से कई अंडर-ट्रायल हैं और बाकी सज़ायाफ्ता. जेल अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय तक बंद रहने के कारण कई कैदी मानसिक तनाव का शिकार हो जाते हैं. ऐसे में हुनर और रोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम उनके लिए नई उम्मीद लेकर आते हैं.
बेहतर गुणवत्ता, बेहतर दाम
प्रदर्शनी में प्रस्तुत उत्पादों को स्थानीय लोगों और पर्यटकों से सराहना मिल रही है. हस्तनिर्मित वस्तुएं गुणवत्ता में बेहतरीन हैं और बाजार मूल्य से भी बेहतर दाम पर उपलब्ध हैं. आयोजकों का मानना है कि इन उत्पादों को खरीदकर लोग न केवल एक अच्छा सामान घर ले जाते हैं, बल्कि बंदियों के मनोबल और भविष्य निर्माण में भी योगदान देते हैं.
यह पहल साबित कर रही है कि अवसर और मार्गदर्शन मिलने पर जीवन की राह किसी के लिए भी बदली जा सकती है. चाहे वह जेल की चारदीवारी के भीतर ही क्यों न हो.
























