गुजरात पुलिस ने साइबर ठग को उसी के जाल में फंसाकर किया गिरफ्तार
Gujarat News: अहमदाबाद के एक रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी को साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट कर रखा था, लेकिन पीड़ित शख्स ने गुजरात पुलिस के साइबर सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस (CCoE) को इसकी जानकारी दे दी.

आधुनिक समय में जितना डिजिटल पेमेंट ने लोगों का जीवन आसान किया है उतना ही अपराधियों ने इसे अपने पैसे ऐंठने का जरिया बना रखा है. आये दिन डिजिटल अरेस्ट के जरिए लाखों रुपये ठगने की खबरें सामने आती हैं., लेकिन इस बार एक अपराधी को गुजरात पुलिस ने उसी के जाल में फंसाकर अपनी गिरफ्त में ले लिया है. यह नेटवर्क असम में बैठकर ठगी को अंजाम देता था.
यह मामला अहमदाबाद से जुड़ा है जहां एक रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी को साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट कर रखा था, लेकिन पीड़ित शख्स ने गुजरात पुलिस के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CCoE) को इसकी जानकारी दे दी. उसके बाद पुलिस ने साइबर ठग को ट्रैक किया और उसे उसी के जाल में फंसाकर भारत के चार राज्यों में 10 लोगों के लाखों रुपये बचा लिए हैं.
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क्या है पूरा मामला?
दरअसल, अहमदाबाद के एक रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी को साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट कर रखा था. ठगों ने खुद को नासिक पुलिस का अधिकारी बताया और कर्मचारी पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी में होने का आरोप लगाया. 9 अगस्त को कर्मचारी ने एक IAS अधिकारी की सलाह पर CCoE को मामले की जानकारी देते हुए बताया कि उसे डिजिटल अरेस्ट में रखा गया है.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, CCoE के SP विवेक भेड़ा ने मामले की जानकारी देते हुए कहा, "वह शिकायतकर्ता लगभग उनके जाल में फंस ही गया था. ये साइबर ठग उन्हें हर दिन 3-4 घंटे तक कॉल पर रखते थे. शिकायतकर्ता ने उन जालसाजों के झांसे में आकर अपनी पत्नी के बैंक अकाउंट से सारा पैसा अपने अकाउंट में ट्रांसफर भी कर लिया था और ठगों को 20 लाख रूपए ट्रांसफर करने थे." SP विवेक भेड़ा ने कहा कि गनीमत रही कि उन्होंने हमसे संपर्क कर लिया.
कैसे साइब ठग को किया 'डिजिटल अरेस्ट'
इसके बाद CCoE ने ठग को पकड़ने के लिए जाल बिछाया और शिकायतकर्ता को कहा कि वो ठगों को ऐसा दिखाए कि अब भी वो उनके डिजिटल अरेस्ट में है. इसके बाद शिकायतकर्ता के जरिए पुलिस ठगों से बातचीत को जारी रखा और वेरिफिकेशन के लिए उससे 200 रुपये ट्रांसफर करवाए. इसके बाद ठगों ने अपना बैंक अकाउंट नंबर दिया था, जिसकी साइबर टीम ने जांच शुरू कर दी. जांच में सामने आया कि संबंधित अकाउंट असम के बरपेटा का है और उसे 25 वर्षीय रफीकुल आलम नाम का व्यक्ति ऑपरेट कर रहा है.
आरोपी तक पहुंची पुलिस
इसके बाद गुजरात पुलिस की एक टीम असम पहुंची और जांच के बाद 16 अगस्त को रफीकुल आलम को हिरासत में ले लिया. 16 अगस्त (रविवार) को अपराधी को ट्रांज़िट वारंट पर गुजरात लाया गया और उसके खिलाफ CID क्राइम के स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में तीन FIR दर्ज की गई. इसके अलावा दूसरे राज्यों के पुलिस स्टेशनों में भी इस आरोपी के खिलाफ कम से कम पांच मामले दर्ज पाये गए. इसके अलावा पुलिस को ऐसे पीड़ितों के बारे में भी पता चला जो डिजिटल अरेस्ट थे, पुलिस ने अपनी टीमें भेजकर उन लोगों को सावधान किया और उनके पैसे बचा लिए.
खाते से हुए 1,000 करोड़ रुपये का लेन-देन
रिपोर्ट के अनुसार, CCoE ने इस खास बैंक अकाउंट के ट्रांजैक्शन हिस्ट्री को खंगाला तो पाया कि जरिए 1,000 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ है. SP भेड़ा ने बताया कि जांच में 1,754 और अकाउंट मिले हैं जो अपराध से मिली इस रकम को छिपाने इस्तेमाल में लाई जा रही थी. इसके अलावा पुलिस को 23 क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट भी मिले, जिनसे 16 करोड़ रुपये का लेन-देन किया गया था. पुलिस को शक है कि इस नेटवर्क का चीन से कनेक्शन है क्योंकि आरोपी के फोन में 'China Ma’am 4' नाम के कॉन्टैक्ट के साथ मैसेज मिले हैं. पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों की तलाश कर रही है और उम्मीद की जा रही है कि इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं.
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