दिल्ली में EV के लिए मौजूदा चार्जिंग प्वाइंट्स जरूरत से काफी कम, जानें क्या हैं आंकड़ें?
Delhi EV Charging: दिल्ली-एनसीआर में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन चार्जिंग ढांचा बेहद पीछे है. दिल्ली में 27 हजार से अधिक चार्जिंग प्वाइंट्स की कमी है.

राजधानी दिल्ली और उससे सटे एनसीआर शहरों में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन चार्जिंग ढांचा उसी रफ्तार से तैयार नहीं हो पा रहा है. आंकड़े बताते हैं कि मौजूदा चार्जिंग प्वाइंट्स जरूरत के मुकाबले काफी कम हैं, जिससे आने वाले समय में EV उपभोक्ताओं को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. सरकार ने लक्ष्य तय किए हैं, मगर विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ घोषणाएं नहीं, जमीनी अमल ज्यादा जरूरी है.
दिल्ली में इस वक्त करीब 8,998 पब्लिक EV चार्जिंग प्वाइंट्स सक्रिय हैं, जबकि अनुमानित जरूरत 36,177 की है. यानी राजधानी में 27 हजार से अधिक चार्जिंग प्वाइंट्स की कमी है. यह अंतर करीब 302 प्रतिशत का है, जो साफ संकेत देता है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते ट्रेंड के मुकाबले इंफ्रास्ट्रक्चर काफी पीछे है.
सरकार का लक्ष्य 16 हजार से अधिक प्वाइंट्स तक पहुंचने का
दिल्ली सरकार ने साल के अंत तक चार्जिंग प्वाइंट्स की संख्या बढ़ाकर 16,070 करने का लक्ष्य रखा है. हालांकि यह मौजूदा संख्या से लगभग दोगुना होगा, लेकिन इसके बावजूद जरूरत और उपलब्धता के बीच 20 हजार से ज्यादा का अंतर बना रहेगा. प्रस्तावित 7,000 नए प्वाइंट्स में अधिकतर ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट की निगरानी में लगाए जाएंगे. आनंद विहार और न्यू अशोक नगर RRTS स्टेशनों पर छह-छह नए प्वाइंट्स लगाने की योजना है, जबकि दिल्ली मेट्रो परिसरों में 66 अतिरिक्त चार्जिंग यूनिट्स स्थापित की जाएंगी.
एनसीआर शहरों में हाल और चिंताजनक
दिल्ली से सटे गुड़गांव और फरीदाबाद जैसे प्रमुख शहरों में स्थिति और भी गंभीर बताई जा रही है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इन शहरों में फिलहाल कोई सार्वजनिक EV चार्जिंग प्वाइंट नहीं है, जबकि अनुमानित जरूरत क्रमशः 20 और 26 प्वाइंट्स की है. इससे साफ है कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने की योजनाएं पूरे क्षेत्र में समान रूप से लागू नहीं हो पाई हैं.
बैटरी-स्वैपिंग स्टेशनों में भी कमी, 2026 तक सुधार का लक्ष्य
चार्जिंग के साथ-साथ बैटरी-स्वैपिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया है. राजधानी में जहां 1,606 स्वैपिंग स्टेशनों की जरूरत आंकी गई है, वहां फिलहाल 948 स्टेशन ही काम कर रहे हैं. 2026 के अंत तक इस संख्या को 1,268 तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्वैपिंग नेटवर्क मजबूत किया जाए तो दोपहिया और तिपहिया EV सेगमेंट को बड़ी राहत मिल सकती है.
‘राइट टू चार्ज’ कानून लागू करने पर जोर
पर्यावरण और क्लीन मोबिलिटी से जुड़े जानकारों का कहना है कि बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ कानूनी सुधार भी जरूरी हैं. विशेषज्ञ अनुमिता रॉयचौधरी का मानना है कि ‘राइट टू चार्ज’ जैसे प्रावधान लागू किए जाने चाहिए ताकि लोग अपनी निजी पार्किंग में चार्जर लगाने से वंचित न रहें. इसके अलावा नई आवासीय और व्यावसायिक इमारतों में पार्किंग का बड़ा हिस्सा EV-रेडी बनाना समय की मांग है.
सिर्फ पब्लिक चार्जिंग नहीं, घर और ऑफिस पर भी देना होगा ध्यान
इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन से जुड़े विशेषज्ञ अमित भट्ट के मुताबिक चार्जिंग प्वाइंट्स की योजना वाहन घनत्व को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए. उनका कहना है कि केवल सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन बढ़ाना काफी नहीं है, बल्कि घर और कार्यस्थल पर डेस्टिनेशन चार्जिंग को भी प्राथमिकता देनी होगी. शुरुआती दौर में कई चार्जिंग प्वाइंट्स उन जगहों पर लगाए गए जहां स्थान उपलब्ध था, लेकिन अब मांग के अनुरूप रणनीतिक प्लानिंग जरूरी है. साथ ही चार्जिंग स्टेशनों की सुरक्षा और रखरखाव पर भी निगरानी बढ़ानी होगी.
एक्शन प्लान पर होगी कड़ी नजर, प्रगति की नियमित समीक्षा
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के एक अधिकारी के अनुसार दिल्ली और एनसीआर शहरों द्वारा प्रस्तुत एक्शन प्लान्स की प्रगति पर लगातार नजर रखी जाएगी. जिन शहरों ने अपने-अपने लक्ष्य तय किए हैं, उनकी नियमित समीक्षा की जाएगी ताकि तय समयसीमा के भीतर काम पूरा हो सके.
तेजी से बढ़ती इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के बीच साफ है कि अगर चार्जिंग ढांचा मजबूत नहीं हुआ तो EV अपनाने की रफ्तार प्रभावित हो सकती है. आने वाले साल राजधानी और एनसीआर के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं.























