नोएडा में इंजीनियर की मौत ने खोली प्रशासन की पोल, दिल्ली-NCR की सड़कें कितनी सुरक्षित? ये हैं हाई रिस्क इलाके
Yuvraj Mehta Death: नोएडा हादसे के बाद दिल्ली-एनसीआर में सड़क सुरक्षा पर सवाल उठने लगे है. दिल्ली पुलिस ने दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान के निर्देश दिए है. कई जगह प्रशासनिक लापरवाही उजागर हुई.

नोएडा सेक्टर-150 के दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे दिल्ली-एनसीआर में सड़क सुरक्षा और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. 20 जनवरी को घने कोहरे के बीच एक निर्माणाधीन स्थल पर पानी से भरे गड्ढे में कार गिरने से 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो गई. यह हादसा सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि सिस्टम की बड़ी चूक का उदाहरण बन गया.
इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस के शीर्ष अधिकारियों ने राजधानी दिल्ली में दुर्घटना संभावित और उच्च जोखिम वाले स्थानों की पहचान करने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं.
दिल्ली में जल्द शुरू होगा जिला स्तर अभियान
सूत्रों के मुताबिक, एक आंतरिक बैठक में यह फैसला लिया गया, जिसमें सड़क हादसों में हो रही मौतों पर लगाम लगाने को प्राथमिकता दी गई. अब जिला स्तर के पुलिस अधिकारियों को नगर निगम, सड़क निर्माण और रखरखाव एजेंसियों तथा ट्रैफिक विभाग के साथ मिलकर खतरनाक सड़कों, निर्माण स्थलों और कम रोशनी वाले इलाकों का गहन मूल्यांकन करना होगा.
जानकारी के अनुसार, नोएडा हादसे के बाद वहां के प्राधिकरण ने भी कार्रवाई की. एक जूनियर इंजीनियर को बर्खास्त किया गया, कई अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी हुए और निर्माण स्थलों पर सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा के आदेश दिए गए. पुलिस ने पीड़ित परिवार की शिकायत पर एफआईआर भी दर्ज की है. हालांकि सवाल यह है कि क्या ऐसी कार्रवाई सिर्फ हादसे के बाद ही होगी.
दिल्ली के कई इलाकों में देखने को मिल सकती है नोएडा जैसी घटना
हकीकत यह है कि नोएडा ही नहीं, बल्कि पूरे दिल्ली-एनसीआर में कई ऐसे इलाके हैं. जहां हर दिन लोग जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे हैं. नोएडा के सेक्टर-105 की तस्वीर इसका उदाहरण है. एक ओर ऊंची-ऊंची इमारतें विकास की कहानी कहती हैं, तो दूसरी ओर सड़क के समानांतर बहता खुला और गहरा नाला मौत को दावत देता नजर आता है. सड़क और नाले की ऊंचाई लगभग बराबर है. कोहरे या रात के समय कोई भी वाहन या पैदल व्यक्ति अनजाने में नाले की ओर जा सकता है.
सबसे चिंताजनक बात यह है कि यहां न तो कोई प्रोटेक्टिव वॉल है, न बैरिकेड, न डायवर्जन बोर्ड और न ही चेतावनी संकेत. ऐसे हालात में हादसे होना सिर्फ समय की बात है. यही स्थिति दिल्ली के कई इलाकों में भी देखने को मिलती है, जहां अधूरे निर्माण, खुले गड्ढे और खराब रोशनी दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं.
क्या दिल्ली-एनसीआर के सभी खतरनाक स्पॉट्स की होगी पहचान?
नोएडा की घटना के बाद दिल्ली में दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान का आदेश एक सकारात्मक कदम है, लेकिन सवाल यह है कि क्या दिल्ली-एनसीआर के सभी खतरनाक स्पॉट्स की समय रहते पहचान होगी? या फिर हर बार किसी की जान जाने के बाद ही प्रशासन जागेगा. यह मामला अब केवल एक हादसे का नहीं, बल्कि दिल्ली-एनसीआर में सड़क सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविकता का रिएलिटी चेक बन चुका है.
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Source: IOCL


























