Delhi News: स्कूल खुलते ही चुनावी ड्यूटी पर जाएंगे हजारों सरकारी शिक्षक, GSTA ने पढ़ाई प्रभावित होने की जताई चिंता
SIR In Delhi: निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 30 जून से 29 जुलाई 2026 तक BLO घर-घर जाकर मतदाताओं का verification और सर्वे करेंगे. इसके बाद 5 अगस्त को प्रारूप (ड्राफ्ट) मतदाता सूची प्रकाशित होगी.

दिल्ली के सरकारी स्कूलों में 1 जुलाई से गर्मी की छुट्टियों के बाद नियमित कक्षाएं शुरू हो रही हैं. लेकिन इसी दिन से हजारों सरकारी शिक्षक स्कूलों में पढ़ाने की बजाय मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानि Special Intensive Revision-SIR के चुनावी काम में जुट जाएंगे. इसे लेकर सरकारी स्कूल शिक्षक संघ (GSTA) ने छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका जताई है.
निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 30 जून से 29 जुलाई 2026 तक BLO घर-घर जाकर मतदाताओं का verification और सर्वे करेंगे. इसके बाद 5 अगस्त को प्रारूप (ड्राफ्ट) मतदाता सूची प्रकाशित होगी. 5 अगस्त से 4 सितंबर तक दावे और आपत्तियां ली जाएंगी. सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद 3 अक्टूबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी.
29 जून से 7 अक्टूबर तक फुल टाइम ड्यूटी के निर्देश
विकासपुरी विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) की ओर से जारी आदेश में BLO और BLO Supervisors को 29 जून से 7 अक्टूबर 2026 तक या पूरी प्रक्रिया खत्म होने तक रोज सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक फुल-टाइम चुनावी ड्यूटी करने के निर्देश दिए गए हैं. इस दौरान उन्हें किसी दूसरे सरकारी काम में नहीं लगाया जाएगा. स्कूलों और विभागों को भी ऐसे कर्मचारियों को नियमित काम से मुक्त करने को कहा गया है.
स्कूल की पढ़ाई पर होगा असर
GSTA का कहना है कि इसका सीधा असर स्कूलों की पढ़ाई पर पड़ेगा. संघ के मुताबिक, करीब साढ़े तीन महीने तक बड़ी संख्या में शिक्षक स्कूलों की बजाय दिल्ली की गलियों, घरों और मतदान केंद्रों पर चुनावी जिम्मेदारियां निभाएंगे. ऐसे में स्कूलों में बाकी शिक्षक केवल एडजस्टमेंट के आधार पर कक्षाएं चलाएंगे, जिससे लाखों छात्रों, खासकर 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है. इसी को देखते हुए GSTA के महासचिव अजय वीर यादव ने शिक्षा मंत्री आशीष सूद को पत्र लिखकर मांग की है कि जिन शिक्षकों की ड्यूटी SIR में लगाई गई है, उनकी जगह गेस्ट टीचरों की अस्थायी नियुक्ति की जाए, ताकि स्कूलों में पढ़ाई बिना किसी रुकावट के जारी रह सके.
एबीपी न्यूज से बातचीत में Government School Teachers Association, General Secretary Ajay Veer Yadav कहते हैं कि निर्वाचन आयोग के Special Intensive Revision (SIR) के लिए शिक्षकों को फुल-टाइम ड्यूटी करने के निर्देश दिए गए हैं. इससे पहले शिक्षकों ने जनगणना (Census) से जुड़ा काम भी पूरा किया है और अब उन्हें SIR की जिम्मेदारी सौंपी गई है.चुनाव से जुड़ा यह काम महत्वपूर्ण है और शिक्षक हमेशा इसमें सहयोग करते हैं.
लेकिन 1 जुलाई से स्कूलों में नियमित पढ़ाई शुरू हो रही है. ऐसे समय में बड़ी संख्या में शिक्षक SIR ड्यूटी पर चले जाएंगे, जिससे स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका है. हमने शिक्षा मंत्री आशीष सूद को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि जिन शिक्षकों की SIR ड्यूटी लगी है, उनकी जगह गेस्ट टीचरों की अस्थायी नियुक्ति की जाए. यह प्रक्रिया लंबी चलेगी और बिना वैकल्पिक व्यवस्था के छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होगी. SIR की प्रक्रिया के तहत अंतिम मतदाता सूची 3 अक्टूबर को जारी होनी है। इसी बीच सितंबर में स्कूलों में टेस्ट और परीक्षाएं भी होंगी. ऐसे में शिक्षकों की कमी का सीधा असर छात्रों की तैयारी पर पड़ेगा.
परिणाम बेहतर न आने पर शिक्षक होंगे जिम्मेदार
अजय वीर यादव आगे कहते हैं कि आखिर में रिजल्ट तो बच्चों का आता है, लेकिन अगर परिणाम अच्छे नहीं आते, तो जवाबदेही शिक्षकों की तय होती है और उन्हें कारण बताओ नोटिस तक मिल सकता है. SIR ड्यूटी में केवल एक वर्ग के शिक्षक नहीं, बल्कि प्राइमरी, TGT, PGT और बोर्ड कक्षाओं को पढ़ाने वाले शिक्षक भी शामिल हैं. फिलहाल हमारे पास पूरे दिल्ली के शिक्षकों का आधिकारिक आंकड़ा नहीं है. लेकिन जानकारी के अनुसार एक सरकारी स्कूल से औसतन 6 से 8 शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है.
दिल्ली में करीब 1100 सरकारी स्कूल हैं. इस हिसाब से अनुमान है कि करीब 8 हजार शिक्षक SIR ड्यूटी में लगे हो सकते हैं. अगर सरकार कम से कम 50 फीसदी गेस्ट टीचरों की भी अस्थायी नियुक्ति कर दे, तो स्कूलों में पढ़ाई की स्थिति काफी हद तक संभाली जा सकती है. फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यही है कि इस व्यवस्था का असर लाखों छात्रों की पढ़ाई पर पड़ सकता है.
बोर्ड परीक्षा की तैयारी पर दिखेगा असर
संघ का कहना है कि जुलाई से अक्टूबर तक का समय शैक्षणिक सत्र का सबसे महत्वपूर्ण दौर होता है. इसी दौरान नई पढ़ाई शुरू होती है और 10वीं व 12वीं के छात्रों की कई परीक्षाएँ और बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी की नींव रखी जाती है. अगर सत्र की शुरुआत में ही बड़ी संख्या में शिक्षक स्कूलों से बाहर रहेंगे, तो इसका असर पूरे शैक्षणिक सत्र के परिणामों पर पड़ सकता है.
GSTA ने दिल्ली सरकार से मांग की है कि छात्रों के हित को देखते हुए जल्द वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, ताकि शिक्षण कार्य प्रभावित न हो और स्कूलों में नियमित पढ़ाई जारी रह सके.
यह भी पढ़ें: अरविंद केजरीवाल का सवाल- ढाई साल में आज तक राम मंदिर क्यों नहीं गए गृह मंत्री अमित शाह?






















