Balrampur: बलरामपुर में नदी में मछली पकड़ने गए ग्रामीण को 40 हाथियों ने घेरा, कुचलकर ली जान
Chhattisgarh News: इस घटना के बाद से इलाके के लोगों में दहशत का माहौल है. पुलिस ने शव को परिजन को सौंप दिया है. गांव वालों ने बताया कि आस पास हाथियों का कई दल घूम रहा है.

Balrampur Elephants News: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में नदी में मछली मारने गए एक व्यक्ति को हाथियों ने कुचलकर मार डाला. इस घटना के बाद हाथी प्रभावित क्षेत्र में एक बार फिर दहशत फैल गई है. पुलिस ने मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद परिजनों को सौंप दिया है. इस घटना राजपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत अलखडीहा गांव का है. दरअसल कर्रा गांव के गगोलीपारा निवासी बिफना राम (50 साल) करवा के ढोढीपारा में रहने वाले अपने भतीजे पुरुषोत्तम एतवा के घर अलखडीहा गया हुआ था.
इस बस्ती के नजदीक से वन क्षेत्र से होकर महान नदी गुजरी है. जहां ग्रामीणों ने नदी में मछली मारने के लिए जाली और बांस का घेरा बनाया हुआ है. वहां बिफना राम आधी रात के समय कुछ लोगों के साथ मछली मारने चला गया. तब सभी लोग नदी किनारे आग जलाकर ताप रहे थे, तभी उन्हें हाथियों के आने की आहट सुनाई दी. इसके बाद डर से सभी जान बचाने के लिए बस्तियों की ओर दौड़ लगाने लगे, लेकिन बिफना राम बस्ती की ओर न भागकर पास में ही एक जगह पर छिप गया. इसके बाद करीब 40 की संख्या में पहुंचे हाथियों ने उसे घेर लिया और पटककर जान ले ली.
आज 25 अक्टूबर की सुबह बिफना राम घर नहीं पहुंचा तो गांव वालों और परिजनों को अनहोनी की आशंका हुई. तब कुछ लोग मिलकर उसे ढूंढने निकले. तब नदी किनारे मछली मारने वाली जगह पर बिफना राम की क्षत विक्षत लाश पड़ी हुई मिली. सभी ने समझ लिया कि हाथियों ने कुचलकर उसकी जान ली है. ग्रामीणों ने वन विभाग को घटना की जानकारी दी. इस मौके पर एसडीओ समेत वन विभाग के अफसर पहुंचे, उन्होंने भी जांच के बाद माना की बिफना राम की मौत हाथियों के हमले से हुई है. इसके बाद मृतक के परिजनों को तात्कालिक सहायता राशि के रूप में 25 हजार दी गई. वहीं पुलिस ने शव पंचनामा के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.
ग्रामीणों के मुताबिक इस इलाके में हाथियों का कई दल विचरण कर रहा है. ऐसे में सभी को सावधानी बरतनी होगी, वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीण कोशिश करें कि वे जंगल में न जाएं नहीं तो इस तरह कि अप्रिय घटना का सामना करना पड़ सकता है. बताया जाता है कि जंगल में चारा, पानी की कमी हो गई है जिससे हाथी अलग-अलग वन क्षेत्रों की ओर जा रहे हैं. इससे आबादी क्षेत्र के लोगों में डर का माहौल है.
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