Bastar: भीषण गर्मी में बूंद-बूंद को तरस रहे ग्रामीण, गड्ढे का गंदा पानी पीने के लिए मजबूर
Bastar Water Crisis बकावंड ब्लॉक के ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई सालों से गांव के लोग लाल पानी पी रहे हैं. नल-बोरिंग से सालों से लाल पानी निकल रहा है. गर्मी में यह परेशानी और बढ़ जाती है.

Chhattisgarh Water Crisis: छत्तीसगढ़ के बस्तर (Bastar) जिले में तेज गर्मी और तपती धूप से नदी, तालाब सुख गए हैं. वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में बोर, हैंडपंप सालों से खराब पड़े है. ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों के लोग झरिया (गड्ढे) का पानी पीने को मजबूर हो रहे हैं. बता दें कि, जिले के हजारों ग्रामीण बीते कई सालों से आयरन युक्त लाल पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे बीमारी बढ़ने के साथ उनकी मौतें भी हो रही हैं. जिले के बस्तर और बकावंड ब्लॉक में ऐसे 100 गांव हैं, जहां के ग्रामीण लाल पानी पीने को मजबूर हैं.
वहीं प्रशासन इन ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल मुहैया नहीं करा पा रही है. कुछ महीनों तक इन गांवों तक टैंकरों से पानी की सप्लाई तो की गई, लेकिन अब सप्लाई बंद होने से गर्मी के दिनों में ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. वहीं आप पार्टी के जिला अध्यक्ष नरेंद्र भवानी ने बताया कि, कई ऐसे गांव हैं जहां लोग झरिया का पानी पीने को मजबूर हो रहे हैं. गांव में हैंडपंप खराब हैं, बोर भी नहीं हुए हैं और पेयजल पहुंचाने की सरकार की कोई योजना भी यहां नहीं पहुंची है.
जगदलपुर शहरी क्षेत्रों में भी पानी की कमी
गर्मी के दिनों में पानी के लिए ग्रामीण अंचलों में त्राहि-त्राहि मची हुई है. जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में आधा से ज्यादा आबादी झरिया का पानी पी रहे हैं. वहीं सरकार इन गांवों तक पेयजल पहुंचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर पेयजल मुहैया कराने के लिए कोई काम नहीं हो रहा है. नरेंद्र भवानी ने आगे कहा कि, सिर्फ कागजों में पेयजल की पूर्ति कराने की योजना बन रही है. ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ जगदलपुर शहरी क्षेत्रों का भी पेयजल के लिए बुरा हाल है.
100 से ज्यादा गांव लाल पानी से प्रभावित
बस्तर जिले के बकावंड ब्लॉक के ग्रामीणों का कहना है कि, पिछले कई सालों से पूरे गांव के ग्रामीण लाल पानी पी रहे हैं. नल और बोरिंग से सालों से लाल पानी निकल रहा है. खासकर गर्मी के दिनों में सबसे ज्यादा तकलीफों का सामना करना पड़ता है. आसपास के ऐसे 100 से ज्यादा गांव हैं जहां के हजारों ग्रामीण लाल पानी पीने को मजबूर हो रहे हैं. इस पानी को पीकर कई ग्रमीण गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं. छोटे-छोटे बच्चों के दांत झड़ने के साथ बड़े और बुजुर्गों के हाथ पैर अपंग हो रहे हैं. पीएचई विभाग ने कुछ जगहों पर वाटर फिल्टर प्लांट तो लगाया, लेकिन मेंटेनेंस के अभाव में यह वाटर फिल्टर प्लांट खराब पड़ा है.
कुछ गांवों में बांध से पहुंचाया जा रहा पानी
जिले के पीएचई विभाग के अधिकारी का कहना है कि बकावंड और बस्तर के कई गांव लाल पानी से प्रभावित हैं. विभाग द्वारा कई जगह पर बोर किया गया है, लेकिन कुछ जगह लाल पानी निकल रहा है. हालांकि, कुछ क्षेत्रों में कोसारटेडा बांध से पानी पहुंचाया जा रहा है, लेकिन कई गांवो में समस्या हल नहीं हो पाई है. अधिकारी ने कहा कि विभाग के द्वारा वाटर फिल्टर प्लांट भी लगाया गया है, लेकिन ग्रामीणों से शिकायत मिली है कि यह प्लांट खराब पड़ा हुआ है. जल्द ही इनके मेंटेनेंस का काम किया जाएगा, ताकि ग्रामीणों को फिल्टर प्लांट के माध्यम से साफ पानी मिल सके.


















