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बस्तर का लाल अध्याय खत्म की तरफ, नक्सलियों ने थामी संविधान की किताब, 210 नक्सलियों का सरेंडर

Bastar News: छत्तीसगढ़ में बस्तर का लाल अध्याय समाप्ति की ओर चल पड़ा है. 210 नक्सलियों ने संविधान की किताब थामकर बंदूकों की जगह फूल उठाए हैं.

लाल आतंक (नक्सलवाद) से कराहते बस्तर में शुक्रवार (17 अक्टूबर) को इतिहास लिखा गया. चार दशक से जंगलों में बंदूक थामे माओवादी घूम रहे थे. जिन्होंने बरसों तक गोलियों की गूंज से गांवों को दहला रखा था. आज उसी बस्तर के पुलिस लाइन में आत्मसमर्पण करने कुल 210 हार्डकोर नक्सलियों ने एक साथ अपनी बंदूकें रख दीं.

इनमें सेंट्रल कमेटी मेंबर रुपेश उर्फ सतीश, दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के राजू सलाम, भास्कर, रणीता और 21 डिवीजन कमेटी सदस्यों के नाम प्रमुख हैं. यह वही नेतृत्व था, जिसने बस्तर के घने जंगलों में नक्सल आंदोलन की गहरी जड़ें जमाई थी.

सरकार की मुहिम से किया सरेंडर

सरकार की पुनर्वास नीति और बढ़ते जनजागरण के असर से माड़ डिवीजन के 158 और कांकेर इलाके के 50 हार्डकोर नक्सली भी शुक्रवार को मुख्यधारा में लौट आए. सौंपे गए हथियारों में 19 एके-47, 17 एसएलआर और 117 देसी और 3-नॉट-3 राइफलें शामिल हैं. पुलिस लाइन में बिछाए गए लाल कारपेट पर जब नक्सली आगे बढ़े तो मंच पर मौजूद अधिकारी उन्हें नए जीवन की किताब भारत का संविधान सौंपते दिखाई दिए.

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय क्या बोले?

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा पहुंचे. दोनों नेताओं ने आत्मसमर्पण कर चुके सभी नक्सलियों से मुलाकात की और उनकी मांगे सुनीं. रुपेश उर्फ सतीश की दो मांगे सरकार ने मौके पर ही स्वीकार कर लीं. उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा, आज का दिन बस्तर के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा. अब नक्सलवाद अंत की ओर है और बस्तर विकास की नई राह पर बढ़ चुका है.

मूलवासी बचाओ मंच से हटेगा प्रतिबंध

सरकार ने कार्यक्रम के दौरान दो बड़े ऐलान किए. मूलवासी बचाओ मंच से 30 अक्टूबर के बाद प्रतिबंध हटा लिया जाएगा और आत्मसमर्पित नक्सली अपनी स्वेच्छा से DRG (डिस्ट्रिक्ट रिज़र्व गार्ड) में शामिल हो सकेंगे. इसके अलावा, रुपेश की एक और मांग जेल में कैद नक्सलियों की रिहाई पर सरकार ने कानूनी प्रक्रिया के तहत विचार करने का भरोसा दिया.

क्या बोले सेंट्रल कमेटी के मेंबर?

आत्मसमर्पण के बाद सेंट्रल कमेटी मेंबर रुपेश भावुक नजर आए. उन्होंने कहा, हमने हथियार इसलिए उठाए थे कि समाज को हक मिले, लेकिन अब संविधान के रास्ते पर चलने का समय है. नई पीढ़ी को हम हिंसा नहीं, विकास का रास्ता दिखाएंगे.

सरकार देगी हर योजना का लाभ

डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा, सभी 210 नक्सलियों को तिरंगे की छांव में पुनर्वास योजना के तहत तात्कालिक सहायता राशि और रोजगार के अवसर दिए जाएंगे. इनमें से कई लोग स्किल ट्रेनिंग, कृषि परियोजनाओं और सामुदायिक विकास कार्यों में भाग लेंगे. उन्होंने बताया कि अब माड़ और उत्तर-पश्चिम जोन लगभग नक्सल-मुक्त हो चुके हैं. कंपनी नंबर-10 और 5 के कुछ सदस्य ही बाकि हैं, जिन पर जल्द कार्रवाई होगी.

लाल आतंक से हरियाली की ओर

कभी गोलियों की आवाज से गूंजता यह इलाका आज ताली और जयकारों से भर उठा. जगदलपुर के पुलिस लाइन ग्राउंड में खड़े वे लोग जिन्होंने बरसों सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला था. आज उसी सरकार के साथ खड़े दिखाए दिए. कंधों से उतरी बंदूकें शायद अब खेतों में हल बनेंगी, और उंगलियां ट्रिगर नहीं, कलम थामेंगी.

खास बात यह है कि जिस जगह ये नक्सली पुलिस को हथियार देकर मुख्य धारा से जुड़े, इसी जगह पर आज से 15 साल पहले 6 अप्रैल 2010 को सुकमा के ताड़मेटला में हुए नक्सली हमले में शहीद सीआरपीएफ के 76 जवानों को अंतिम सलामी दी गई थी.

इस बड़े नक्सली वारदात के मास्टरमाइंड रहे सीसी मेंबर रूपेश उर्फ सतीश, राजू सलाम, भास्कर और रानीता ने अपने हथियार पुलिस के सामने रखकर लाल आंतक को अलविदा कह दिया. जिससे शहीद जवानों को सच्ची श्रद्धांजलि मिली.

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