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Jagdalpur: छत्तीसगढ़ का राजकीय पक्षी नर है या मादा, ये जानने के लिए लगा दिए 30 साल, अब तक नहीं चला पता

Chhattisgarh: पिछले 30 सालों से वन विभाग ने यह जानने के लिए लाखों रुपए खर्च कर दिये कि पहाड़ी मैना नर है या मादा, लेकिन विभाग को कोई सफलता नहीं मिली, अब विभाग ने शोध को बंद करने का फैसला किया है.

Jagdalpur News: हूबहू इंसानों की तरह आवाज निकालने में माहिर छत्तीसगढ़ की राजकीय पक्षी मैना (Mynah) पर बीते 30 साल से चल रहे शोध को आखिरकार वन विभाग ने बंद करने का फैसला लिया है. दरअसल, पिछले 30 साल से वन विभाग (Forest Department) ने यह जानने के लिए लाखों रुपये खर्च कर दिये कि पहाड़ी मैना (Hill Mynah) नर है या मादा. हालांकि, विभाग को इस काम में कोई सफलता नहीं मिली. आखिरकार विभाग ने मैना को पिंजरे से आजाद करने का फैसला किया है.

नर, मादा जानने के लिए 30 सालों से चल रहा था शोध

दरअसल छत्तीसगढ़ के जगदलपुर शहर में स्थित वन विद्यालय के प्रजनन केंद्र में पिछले 30 सालों से राजकीय पक्षी मैना को रखकर शोध किया जा रहा है, इन 30 सालों में कई पहाड़ी मैना की मौत भी हो चुकी है, वहीं वर्तमान में 3 पक्षियों को बड़े आकार के पिंजरे में रखकर शोध किया जा रहा है, लेकिन आखिरकार 30 सालों के शोध में कुछ हासिल नहीं हो पाने से मैना पक्षियों को पिंजरे से आजाद करने का फैसला लिया गया है, इसके लिए कांगेर वैली नेशनल पार्क ने हेड ऑफिस से अनुमति भी ले ली है.

दरअसल पक्षी के संरक्षण और संवर्धन के लिए छत्तीसगढ़ राज्य गठन के 7 साल पहले 1993 से ही बस्तर के जंगलों में पाई जाने वाली पहाड़ी मैना पक्षी को पिंजरे में रखकर शोध किया जा रहा था लेकिन शोध के नाम पर लाखों रुपये खर्च के बाद अब विभाग ने इसके शोध, सरंक्षण और संवर्धन से अपने हाथ खड़े कर दिए हैं.

तीनों मैना को किया जाएगा पिंजरे से आजाद
कांगेर वैली नेशनल पार्क के संचालक गणवीर धम्मशील ने बताया कि जगदलपुर शहर के वन विद्यालय में 30 साल पहले 6 पहाड़ी मैना को रखकर इनके संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रयास किया जा रहा था और देश और विदेशों से भी पक्षी विशेषज्ञ इसके शोध करने पहुंचे हुए थे, बावजूद इसके कई शोध के बावजूद आज तक यह पता नहीं लग पाया कि कौनसी  मैना नर है और कौन सी मादा जिसके चलते अब यह निर्णय लिया गया है कि वर्तमान में वन विद्यालय के प्रजनन केंद्र में मौजूद तीन पहाड़ी मैना मोनू, ऋतु  और सोनू को आजाद कर दिया जाएगा.

वहीं, 30 सालों से चली आ रही पक्षियों की पिंजरा प्रथा को भी समाप्त कर दिया जाएगा. इस प्रजनन केंद्र में रखे गए मैना को जंगल में छोड़ने की तैयारी कर ली गई है. संचालक ने कहा कि वर्तमान में कांगेर वैली पार्क के जंगलों में राजकीय पक्षी मैना की संख्या में बढ़ोतरी हुई है, ऐसे में इसके प्रजनन पर अब वन विद्यालय  में कोई शोध नहीं किया जाएगा.

30 सालों में शोध पर लाखों रुपये कर दिए खर्च 
गौरतलब है कि सन 1993 से पहाड़ी मैना पर चले आ रहे शोध की शुरुआत में वन विद्यालय के बड़े आकार के पिंजरे प्रजनन केंद्र में 6 मैना पक्षियों को रखा गया था जिसके बाद एक-एक कर कई पक्षियों की मौत होते चली गई और वर्तमान में इस पिंजरे में कांगेर वैली क्षेत्र से लाए गए तीन मैना सोनू, मोनू और ऋतु को रखा गया है, जिन्हें अब आजाद करने का फैसला लिया गया है.

दरअसल पक्षी विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रजनन केंद्र में चारों और शोरगुल होता है और पक्षियों को वह माहौल भी नहीं मिल पाता है जिसके चलते मैना के प्रजनन को लेकर अब तक कोई शोध सफल नहीं हो पाया है. खास बात यह है कि करीब 3 दशकों से चल रहे शोध पर लाखों रुपए खर्च करने के बाद अब जाकर वन विभाग के अधिकारियों की नींद खुली है और इसलिए प्रजनन केंद्र के नाम पर पिंजरा प्रथा को बंद करने का निर्णय लिया गया है.

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