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Chhattisgarh: ब्रश वुड निर्माण के लिए काट डाले साल व बीजा के पेड़, नरवा विकास योजना के तहत दो साल पहले मिली थी मंजूरी

Korba News: जानकारों की मानें तो ब्रश वुड निर्माण के लिए उपयोगहिन पेड़ों का उपयोग किया जा सकता है. इसमें टेढ़े मेढ़े व विकृत प्रजाति के लकड़ी का इस्तेमाल किया जा सकता है.

Korba Deforestation: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में जंगल की सुरक्षा में तैनात वन कर्मी निर्माण कार्य के लिए हरे भरे पेड़ की बलि ले रहे हैं. इसका जीता जागता उदाहरण सरहदी इलाके में बन रहे ब्रश वुड चेकडेम निर्माण से लिया जा सकता है. इस चेकडेम के लिए बड़ी तादाद में साल और बीजा के पेड़ को पूरी तरह विकसित होने से पहले ही काट दी गई. उनकी टहनियों से मेड़ तैयार कर चेकडेम का निर्माण किया गया है. ताज्जुब की बात तो यह है कि यह सारा काम संबंधित क्षेत्र के वन अफसर के देखरेख में हुई है.

यह पूरा मामला कटघोरा वन मंडल के वन परिक्षेत्र पसान अंतर्गत अड़सरा बीट की है. दरअसल अड़सरा क्षेत्र में चटनियां नाला प्रवाहित है. इस नाले में चेकडेम तैयार कर गर्मी के दिनों में भी ग्रामीणों को पानी उपलब्ध कराया जा सकता है. वन्यजीवों को भी पानी के लिए आबादी वाले क्षेत्र में कूच करने से राहत मिल सकती है. जिसे देखते हुए वर्ष 2020-21 में नरवा विकास योजना के तहत चटनियां नाले में ब्रश वुड निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई थी.

यह निर्माण कार्य अड़सरा बीट के कक्ष क्रमांक पी 190 में किया जाना था, लेकिन किसी कारणवश निर्माण कार्य लटका हुआ था. करीब दो साल इंतजार के बाद ब्रश वुड चेकडेम निर्माण की जिम्मेदारी संबंधित क्षेत्र में तैनात वनकर्मी ईश्वर मानिकपुरी को दी गई. उनकी देखरेख में निर्माण कार्य तो किया जा रहा, लेकिन जवाबदार अफसर ने तमाम नियम कायदों को न सिर्फ ताक पर रख दिया, बल्कि जंगल की सुरक्षा को ही खतरे में डाल दिया है.

मिट्टी डालकर चेकडेम का बंड किया गया है तैयार 
बताया जा रहा है कि उनकी देखरेख में चल रहे ब्रश वुड चेक डेम निर्माण के लिए सैकड़ों की तादाद में साल व बीजा के अविकसित पेड़ों की कटाई कर दी गई. इन पेड़ों के तने और टहनियों को जमीन पर गाड़ कर घेरा बनाया गया है, जिसमें परद दर परत मिट्टी डालकर चेकडेम का बंड तैयार किया गया है. वन विभाग द्वारा तैयार किए जा रहे ब्रश वुड चेकडेम से नाले की पानी रूके न रूके, चेकडेम से वन्यजीवों को पानी मिले न मिले, लेकिन हरे भरे पेड़ों को जरूर क्षति हुई है. जंगल के भीतर भारी संख्या में पेड़ों की कटाई किए जाने से तस्करों को बल जरूर मिलेगा.

क्या है नियम?  
जानकारों की मानें तो ब्रश वुड निर्माण के लिए उपयोगहिन पेड़ों का उपयोग किया जा सकता है. इसमें टेढ़े मेढ़े व विकृत प्रजाति के लकड़ी का इस्तेमाल किया जा सकता है. ब्रश वुड के लिए इमारती अथवा उपयोगी प्रजाति के वृक्षों को नहीं काटा जा सकता. खासकर अविकसित और साल, बीजा जैसे पेड़ों की कटाई नही की जा सकती.

ऐसे होता है ब्रश वुड निर्माण
ब्रश वुड एक तरह का बंधान ही है, जिससे प्रवाहित जल का संचित किया जाता है. इसके लिए पहले लकड़ी का घेरा तैयार किया जाता है. इस घेरे के भीतर परत दर परत मिट्टी डालकर बंड तैयार किया जाता है, ताकि प्रवाहित जल को रोका जा सके. इससे न सिर्फ जल का स्तर बढ़ सकता है, बल्कि वन्यजीवों के लिए भी उपयोगी है. कटघोरा डीएफओ कुमार निशांत ने कहा कि ब्रश वुड निर्माण के लिए नियम निर्धारित है. निरीक्षण के दौरान ऐसी बातें सामने नहीं आई है. मामले में जानकारी ली जाएगी.

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